एक्सप्लोरर

Xप्लेन: अंडा, चिकन और दूध के दाम क्यों नहीं होंगे सस्ते? जानिए 10 बड़ी वजहें

सोयाबीन मील, मूंगफली की खली और रेपसीड ऑयलकेक जैसी प्रोटीन से भरपूर चारे की सामग्रियों की कीमतें पिछले वर्षों की तुलना में काफी अधिक हैं, जिससे किसानों का मुनाफा सीधे प्रभावित हो रहा है.

पूरे भारत में घरों के बजट पर लगातार दबाव बना हुआ है क्योंकि रोज़मर्रा की खाने-पीने की चीज़ों जैसे अंडे, चिकन और दूध की खुदरा कीमतें ऊंची बनी हुई हैं और निकट भविष्य में इनमें राहत के कोई आसार नहीं दिख रहे हैं. हालांकि मौसमी उतार-चढ़ाव के कारण अक्सर कीमतों में थोड़ी देर के लिए उछाल आता है, लेकिन कीमतों में मौजूदा बढ़ोतरी की मुख्य वजह पशुपालन और पोल्ट्री सेक्टर की गहरी संरचनात्मक समस्याएं हैं. इस महंगाई के रुझान के केंद्र में पशुओं के चारे की लागत में भारी बढ़ोतरी है, जो किसानों के लिए कुल उत्पादन खर्च का लगभग 60 से 70 प्रतिशत हिस्सा होती है.

पशुओं के आहार के लिए ज़रूरी चीज़ों कार्बोहाइड्रेट के लिए मक्का और प्रोटीन के लिए सोयाबीन मील या तिलहन की खली आदि की कीमतों में पिछले एक साल में काफी बढ़ोतरी हुई है. अल नीनो के कारण मौसम में गड़बड़ी, स्थानीय स्तर पर पानी की कमी और मक्का जैसी मुख्य फसलों की कम बुवाई के अनुमान जैसे कारकों ने कच्चे चारे वाले अनाज की आपूर्ति को बुरी तरह प्रभावित किया है. इसके अलावा, इथेनॉल ब्लेंडिंग को बढ़ावा देने वाली नीति ने भी मक्के की आपूर्ति को पशु चारे से हटाकर दूसरी तरफ मोड़ दिया है, जिससे लागत का दबाव और बढ़ गया है.

कच्चे चारे के अलावा अन्य बड़े ऑपरेशनल चैलेंज भी हैं; जैसे गर्मी के तनाव के कारण पशुओं की मौत, ऊर्जा और परिवहन खर्च में बढ़ोतरी, और छोटे किसानों का घटता मुनाफा. ये सभी कारक खेत पर मिलने वाली कीमतों में कमी की गुंजाइश को सीमित कर रहे हैं. नतीजतन, धार्मिक या त्योहारों के समय मांग में अस्थायी कमी के बावजूद, संरचनात्मक इनपुट लागत के कारण आने वाले महीनों में पोल्ट्री और डेयरी उत्पादों की ऊंची कीमतों का बोझ उपभोक्ताओं को ही उठाना पड़ सकता है.

10 मुख्य कारण जानिए

पशु चारे की बढ़ती लागत: दूध, अंडे और पोल्ट्री उत्पादों के महंगे होने का मुख्य कारण मक्का और सोयाबीन मील जैसी ज़रूरी पशु आहार सामग्री की बढ़ती दरें हैं.

पशुपालन क्षेत्र का बढ़ता महत्व: वर्ष 2023-24 में भारतीय पशुपालन क्षेत्र का 'ग्रॉस वैल्यू एडेड' (GVA) फसल मूल्य का 57% तक पहुंच गया (जो 2013-14 में 34% था), जिससे पता चलता है कि कृषि अर्थव्यवस्था में पशुपालन तेज़ी से महत्वपूर्ण होता जा रहा है.

मक्के की ऊंची कीमतें: मक्का जो ब्रॉयलर चारे का 55–65%, अंडा देने वाली मुर्गियों (लेयर) के चारे का 50–60% और मवेशियों के चारे का 15–20% हिस्सा होता है, उसकी कीमतों में भारी बढ़ोतरी हुई है, जिससे इनपुट लागत ऊंची बनी हुई है.

प्रोटीन के महंगे स्रोत: सोयाबीन मील, मूंगफली की खली और रेपसीड ऑयलकेक जैसी प्रोटीन से भरपूर चारे की सामग्रियों की कीमतें पिछले वर्षों की तुलना में काफी अधिक हैं, जिससे किसानों का मुनाफा सीधे प्रभावित हो रहा है.

उत्पादन लागत में चारे की बड़ी हिस्सेदारी: पोल्ट्री और लेयर फार्मिंग में कुल उत्पादन लागत का लगभग 65–70% हिस्सा चारे का होता है. इसलिए चारे की लागत ऊंची रहने पर खुदरा कीमतों में कमी की गुंजाइश बहुत कम रह जाती है.

गर्मी का तनाव और पक्षियों की मौत: लंबे समय तक गर्मी और अल नीनो के प्रभाव से मौसम में आई गड़बड़ी के कारण पानी की कमी हुई. इससे भीषण गर्मी के तनाव और पक्षियों की मृत्यु दर में वृद्धि हुई, जिससे आपूर्ति में गिरावट आई.

मक्का उत्पादन में गिरावट का अनुमान: सरकारी आंकड़ों के अनुसार खरीफ मक्के के रकबे में 4.1% की गिरावट आई है. USDA के अनुमानों के मुताबिक भारत का मक्का उत्पादन रिकॉर्ड 55.1 मिलियन टन (2025-26) से गिरकर 50 मिलियन टन (2026-27) पर आ सकता है.

इथेनॉल निर्माण के लिए मक्के का उपयोग: पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने की नीति के तहत मक्के के बढ़ते इस्तेमाल ने बाज़ार में इसकी उपलब्धता कम कर दी है, जिससे अनाज की कीमतों पर दबाव बढ़ा है.

मौसमी मांग में बदलाव: हालांकि धार्मिक उपवासों और त्योहारों (जैसे सावन या नवरात्रि) के दौरान अंडों की मांग कुछ समय के लिए कम हो जाती है, लेकिन चारे की ऊंची लागत के कारण कीमतें स्थायी रूप से कम नहीं हो पातीं.

किसानों के मुनाफ़े में कमी: चारे की ज़्यादा लागत की वजह से ब्रॉयलर के उत्पादन की लागत लगभग ₹110 प्रति किलोग्राम और लेयर फ़ीड की लागत ₹30–32 प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई है. इससे मुनाफा काफी घट गया है और फार्मगेट कीमतों में भी गिरावट नहीं आ पा रही है.

संकल्प ठाकुर पिछले 10 वर्षों से मीडिया जगत में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत न्यूज़ 24 से की, इसके बाद न्यूज़ नेशन में कार्य किया. वर्तमान में वह एबीपी हिंदी डिजिटल में डिप्टी प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं और पिछले सात वर्षों से संस्थान के साथ जुड़े हुए हैं. उन्हें खेल, अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और चुनावी राजनीति से जुड़ी खबरों की गहरी समझ है. इसके अलावा साहित्य, कला और संस्कृति से जुड़े विषयों पर लेखन उनकी विशेष रुचि और विशेषज्ञता का क्षेत्र है. उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी साहित्य में स्नातक की उपाधि प्राप्त की है.

Read More
और पढ़ें
Sponsored Links by Taboola
Advertisement

टॉप हेडलाइंस

'ऑपरेशन ट्राइडेंट' का चाबुक: पूर्वोत्तर में नार्को-हवाला कार्टेल का पर्दाफाश, 18 गिरफ्तार
'ऑपरेशन ट्राइडेंट' का चाबुक: पूर्वोत्तर में नार्को-हवाला कार्टेल का पर्दाफाश, 18 गिरफ्तार
'कॉलेजियम से पहले...', पूर्व CJI चंद्रचूड़ पर जस्टिस कौल का खुलासा, मचा सियासी बवाल
'कॉलेजियम से पहले...', पूर्व CJI चंद्रचूड़ पर जस्टिस कौल का खुलासा, मचा सियासी बवाल
'नमो घाट' पर एयरफोर्स का जलवा! आसमान में राफेल-सुखोई, PM मोदी का रोड शो
'नमो घाट' पर एयरफोर्स का जलवा! आसमान में राफेल-सुखोई, PM मोदी का रोड शो
दक्षिण की सियासत में हलचल, विजय की राह पर धनुष? तमिलनाडु में लगे पोस्टर!
दक्षिण की सियासत में हलचल, विजय की राह पर धनुष? तमिलनाडु में लगे पोस्टर!
Advertisement

वीडियोज

Delhi News: स्कूल में मौत की पहेली ! | Sansani | ABP News
JDU Action on Anant Singh: बगावत की सजा...अनंत सिंह JDU से विदा! | MLC Election Bihar
Janhit With Chitra Tripathi: कारोबारियों की दीवाली..काली करके मानेंगे राहुल? | Delhi | Gyanesh Kumar
Congress Ramlila Maidan Rally: Rahul Gandhi और INDIA गठबंधन की महारैली! | Delhi | Ramlila Ground
SIR Controversy: SIR गड़बड़झाले का मास्टरमाइंड कौन? पत्रकारों का सटीक विश्लेषण! | Rahul Gandhi
Advertisement

फोटो गैलरी

Advertisement

पर्सनल कार्नर

टॉप आर्टिकल्स
टॉप रील्स
'हमने पहले कभी ऐसा राष्ट्रपति नहीं देखा...', डोनाल्ड ट्रंप पर क्यों भड़के ओबामा
'हमने पहले कभी ऐसा राष्ट्रपति नहीं देखा...', डोनाल्ड ट्रंप पर क्यों भड़के ओबामा
लखनऊ में वकीलों के चैंबरों पर चला बुलडोजर, नाराज वकील बोले- 2027 में देंगे जवाब
लखनऊ में वकीलों के चैंबरों पर चला बुलडोजर, नाराज वकील बोले- 2027 में देंगे जवाब
दलेर मेहंदी विवाद के बाद बेटे गुरदीप ने पिता को बताया था फर्स्ट क्लास, अब बोले- मेरी बात का गलत मतलब निकाला
दलेर मेहंदी विवाद के बाद बेटे गुरदीप ने पिता को बताया था फर्स्ट क्लास, अब बोले- मेरी बात का गलत मतलब निकाला
टीम इंडिया के 3 धुरंधर मचा रहे गदर, दुनिया में किसी के पास नहीं इनका तोड़
टीम इंडिया के 3 धुरंधर मचा रहे गदर, दुनिया में किसी के पास नहीं इनका तोड़
'कोई भी लक्ष्य पहुंच से दूर नहीं', ऑपरेशन सिंदूर पर बोले IAF चीफ एपी सिंह, पाक को चेतावनी!
'कोई भी लक्ष्य पहुंच से दूर नहीं', ऑपरेशन सिंदूर पर बोले IAF चीफ, पाक को चेतावनी!
स्टिंग ने बढ़ाई कांग्रेस की टेंशन? कर्नाटक में शिवकुमार को लेकर हो सकता है राजनीतिक घमासान
स्टिंग ने बढ़ाई कांग्रेस की टेंशन? कर्नाटक में शिवकुमार को लेकर हो सकता है राजनीतिक घमासान
दरवाजे से आ रही चरमराने के आवाज, घर पर ऐसे करें ठीक
दरवाजे से आ रही चरमराने के आवाज, घर पर ऐसे करें ठीक
Maruti ला रही पहली इलेक्ट्रिक 7 सीटर कार, मिलेगी 500KM की रेंज
Maruti ला रही पहली इलेक्ट्रिक 7 सीटर कार, मिलेगी 500KM की रेंज
Embed widget