Explained: केरल के मुख्यमंत्री की रेस में शशि थरूर किस पोजिशन पर? किसे अगला CM बनाने की चाहत, जानें जनता का मूड
Kerala Next CM: केरल के एग्जिट पोल में UDF सरकार बनाती दिख रही है. अगर यह अंदाजा सटीक बैठता है तो फिर सीएम पद की रेस भी शुरू हो जाएगी. अब सवाल है कि इसमें शशि थरूर शामिल हैं या नहीं?

केरल विधानसभा चुनाव 2026 के एग्जिट पोल जारी हो गए हैं. एक्सिस माय इंडिया समेत कई एजेंसियों ने 29 अप्रैल की शाम 6:30 बजे के बाद अपने-अपने अनुमान पेश कर दिए, लेकिन यह समझना जरूरी है कि केरल में सीएम की रेस में कौन हैं या ये कहें कि केरल की जनता किसे बतौर सीएम पसंद करती है. इनमें पिन्ररई विजयन, वी. डी. सतीशन, रमेश चेन्निथला और शशि थरूर समेत कई नाम हैं. लेकिन सवाल यह है कि आगे कौन है और पीछे कौन?
केरल की सियासी जंग: कौन हैं असली दावेदार?
केरल में इस बार मुख्य मुकाबला तीन गठबंधनों के बीच है और हर तरफ से मुख्यमंत्री पद के मजबूत दावेदार मैदान में हैं.
- वामपंथी लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF): मौजूदा मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन लगातार तीसरी बार सत्ता में आने की कोशिश कर रहे हैं. वे LDF के सबसे बड़े और स्वाभाविक सीएम चेहरा हैं.
- संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (UDF): कांग्रेस के नेतृत्व वाला यह गठबंधन सत्ता में वापसी की उम्मीद लगाए हुए है. इस खेमे से मुख्यमंत्री पद के लिए कोई एक आधिकारिक चेहरा सामने नहीं है, लेकिन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष वी.डी. सतीशन, वरिष्ठ नेता रमेश चेन्निथला और शशि थरूर अहम दावेदार माने जा रहे हैं.
- राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA): भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व में NDA भी राज्य में अपनी पैठ बनाने की कोशिश कर रही है. हालांकि, पार्टी ने किसी को सीएम चेहरे के रूप में पेश नहीं किया है.
केरल की जनता किसे सीएम के रूप में पसंद कर रही है?
एक्सिस माय इंडिया ने केरल की जनता से पूछा कि वह किसे सीएम देखना चाहती है, तो नतीजे चौंकाने वाले आए. केरल की 21% जनता वी. डी. सतीशन को मुख्यमंत्री की कुर्सी पर देखना चाहती है. इसके बाद 8% जनता ने रमेश चेन्नीथला को पसंद किया है.
इस सर्वे में के.सी. वेनुगोपाल को 3%, शशि थरूर को 1% और UDF के अन्य कैंडिडेट्स को 11% लोग सीएम बना देखना चाहते हैं. इन आंकड़ों में सबसे ज्यादा शशि थरूर ने चौंकाया है.
क्या शशि थरूर सीएम की रेस से बाहर माने जाएंगे?
शशि थरूर बीते कुछ महीनों से अपने बयानों की वजह से चर्चा में बने हुए हैं. शशि थरूर ने कांग्रेस पार्टी की रिवायत से अलग जाकर पीएम मोदी और बीजेपी की तारीफों के पुल बांधे हैं. इस बीच कयास लगाए गए कि क्या वह बीजेपी में जाने वाले हैं? हालांकि इसका जवाब नहीं मिला. लेकिन शायद इस सवाल का जवाब केरल की जनता ने दे दिया है.
वहीं, LDF के नेताओं में पिनाराई विजयन (33%), के.के. शैलजा (2%) और LDF के अन्य कैंडिडेट्स (5%) पर हैं. इसके अलावा राजीव चंद्रशेखर को 4% लोग सीएम बने देखना चाहते हैं, जो शशि थरूर के मुकाबले 4 गुना ज्यादा है.
एग्जिट पोल ने क्या तस्वीर दिखाई?
अलग-अलग एग्जिट पोल के आंकड़े भले ही अलग-अलग हों, लेकिन एक अहम ट्रेंड साफ नजर आता है.
- वोट प्रतिशत: एक्सिस माय इंडिया के आंकड़ों के मुताबिक, केरल में UDF को 44% वोट शेयर मिलने का अनुमान है, जबकि LDF 39% और NDA 14% वोटों पर सिमटती दिख रही है.
- सीटों का अनुमान: सीटों के लिहाज से, एग्जिट पोल में कांग्रेस के नेतृत्व वाले UDF को 70 से 80 सीटें मिलने का अनुमान है. वहीं, सत्तारूढ़ LDF 58 से 68 सीटों पर सिमट सकती है और NDA को 0 से 4 सीटें मिलने का अनुमान है. एक अन्य एजेंसी वोटवाइब ने भी UDF को 70-80 और LDF को 58-68 सीटें दिए जाने का अनुमान लगाया है.
इन अनुमानों के मुताबिक, UDF को 140 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत के आंकड़े को पार करते हुए दिखाया गया है.
एग्जिट पोल के नतीजे समझने के लिए इतिहास जरूरी
इन एग्जिट पोल को समझने के लिए केरल के चुनावी इतिहास पर गौर करना जरूरी है. 2021 के विधानसभा चुनाव में LDF ने इतिहास रचते हुए लगातार दूसरी बार सरकार बनाई थी. पिनाराई विजयन के नेतृत्व में LDF ने 99 सीटों पर शानदार जीत हासिल की थी, जबकि UDF महज 41 सीटों पर सिमट गई थी और NDA का खाता भी नहीं खुल पाया था. यह इसलिए भी ऐतिहासिक था क्योंकि 1977 से केरल में हर पांच साल में सरकार बदलने की परंपरा रही थी, जिसे LDF ने तोड़ा था.
2026 के चुनाव में 78.27% मतदान हुआ, जो पिछले 49 सालों में दूसरा सबसे ज्यादा है और इसने सभी राजनीतिक दलों की धड़कनें बढ़ा दी हैं.
एग्जिट पोल पर एक नजर: सावधानी क्यों जरूरी है
यह याद रखना बेहद जरूरी है कि एग्जिट पोल वोटरों के एक छोटे से नमूने से पूछे गए सवालों पर आधारित अनुमान होते हैं. ये वास्तविक चुनाव परिणाम नहीं होते और कई बार ये गलत भी साबित हो सकते हैं. ये महज एक रुझान बताते हैं. असली तस्वीर तो 4 मई को मतगणना के बाद ही साफ होगी, जब यह तय होगा कि केरल की जनता ने पिनाराई विजयन के नेतृत्व में LDF की हैट्रिक पर मुहर लगाई है या फिर UDF को वापसी का मौका दिया है.























