छत्तीसगढ़ शराब घोटालाः ED ने दाखिल की सप्लीमेंट्री चार्जशीट, 2883 करोड़ की अवैध कमाई का आरोप
Chhattisgarh Liquor Scam: ED ने सप्लीमेंट्री चार्जशीट में कहा कि साल 2019 से 2023 के बीच राज्य के आबकारी विभाग में सुनियोजित भ्रष्टाचार के जरिए करीब 2,883 करोड़ रुपये की अवैध कमाई की गई.

छत्तीसगढ़ शराब घोटाले मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक और सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की है, जिसके मुताबिक छत्तीसगढ़ में शराब कारोबार से जुड़ा अब तक का सबसे बड़ा घोटाला सामने आया है. ED ने आरोप लगाया कि साल 2019 से 2023 के बीच राज्य के आबकारी विभाग में सुनियोजित भ्रष्टाचार के जरिए करीब 2,883 करोड़ रुपये की अवैध कमाई की गई.
सिंडिकेट ने की 2,883 करोड़ रुपये की अवैध कमाई
जांच में खुलासा हुआ है कि अफसरों, नेताओं और प्राइवेट कारोबारियों का एक मजबूत सिंडिकेट मिलकर शराब नीति को अपने फायदे के लिए चला रहा था. ईडी के जांच के मुताबिक, इस पूरे घोटाले में अवैध कमाई के चार बड़े रास्ते थे.
- पहला, शराब सप्लायरों से गैर-कानूनी कमीशन वसूला गया. इसके लिए शराब का लैंडिंग प्राइस जानबूझकर बढ़ाया गया, ताकि सरकारी खजाने से ही रिश्वत का पैसा निकाला जा सके.
- दूसरा, सरकारी दुकानों से बिना हिसाब की देशी शराब बेची गई. नकली होलोग्राम और नकद में खरीदी गई बोतलों का इस्तेमाल हुआ, जिससे टैक्स और एक्साइज ड्यूटी पूरी तरह बचा ली गई.
- तीसरा, डिस्टिलरी मालिकों से हर साल मोटी रकम ली गई, ताकि उनका बाजार बना रहे और लाइसेंस सुरक्षित रहे.
- चौथा, विदेशी शराब के लिए FL-10A नाम की नई लाइसेंस कैटेगरी बनाई गई, जिसमें मुनाफे का करीब 60 फीसदी हिस्सा सीधे सिंडिकेट तक पहुंचता था.
ईडी की चार्जशीट में क्या हुआ खुलासा?
ED की चार्जशीट के मुताबिक, इस घोटाले की रीढ़ कुछ सीनियर अफसर थे. रिटायर्ड IAS अनिल टुटेजा, तत्कालीन आबकारी आयुक्त निरंजन दास और CSMCL के MD अरुण पति त्रिपाठी पर नीति से लेकर वसूली तक का मैनेजमेंट संभालने का आरोप है. इसके अलावा 30 से ज्यादा फील्ड लेवल एक्साइज अफसरों पर हर केस के हिसाब से कमीशन लेकर बिना हिसाब की शराब बिकवाने का आरोप लगा है.
चार्जशीट में बताया गया है कि तत्कालीन आबकारी मंत्री कवासी लखमा और पूर्व मुख्यमंत्री के बेटे चैतन्य बघेल पर नीति को हरी झंडी देने और अवैध कमाई को बिजनेस व रियल एस्टेट में लगाने के आरोप है. वहीं, मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) में डिप्टी सेक्रेटरी रहीं सौम्या चौरसिया को काले धन की हैंडलिंग और अपने मुताबिक अफसरों की पोस्टिंग कराने में अहम कड़ी बताया गया है. इस सिंडिकेट की अगुवाई अनवर ढेबर और उसके सहयोगी अरविंद सिंह ने की.
ईडी की चार्जशीट में कुल 81 आरोपी नामजद, 59 नए नाम शामिल
ED के अनुसार, छत्तीसगढ़ डिस्टिलरीज लिमिटेड, भाटिया वाइन मर्चेंट्स और वेलकम डिस्टिलरीज जैसी कंपनियों ने ना सिर्फ बिना हिसाब की शराब बनाई, बल्कि अलग-अलग तरह के कमीशन भी दिए. नकद कलेक्शन में सिद्धार्थ सिंघानिया और नकली होलोग्राम सप्लाई में विदु गुप्ता की भूमिका बताई गई है.
ईडी ने अब तक इस केस में कुल 81 आरोपियों को नामजद किया है, जिनमें 59 नए आरोपी हालिया चार्जशीट में जोड़े गए हैं. वहीं, 9 बड़े नामों की गिरफ्तारी हो चुकी है, इनमें अनिल टुटेजा, अरविंद सिंह, त्रिलोक सिंह ढिल्लों, अनवर ढेबर, अरुण पति त्रिपाठी, कवासी लखमा, चैतन्य बघेल, सौम्या चौरसिया और निरंजन दास शामिल है. कुछ आरोपी जमानत पर है जबकि कुछ अभी जेल में है.
घोटाले में अब तक 382.32 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त
ईडी ने इस मामले में अब तक 382.32 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्तियां जब्त की है. कुल 1,041 प्रॉपर्टीज अटैच की गई है, जिनमें रायपुर का चर्चित होटल वेलिंगटन कोर्ट (Hotel Vennington Court) और ढेबर व बघेल परिवार से जुड़ी सैकड़ों संपत्तियां शामिल हैं.
एजेंसी का कहना है कि ये घोटाला सिर्फ शराब तक सीमित नहीं था, बल्कि सिस्टम के भीतर गहरे बैठे गठजोड़ का नतीजा था. आने वाले दिनों में इस केस में और बड़े खुलासे और कार्रवाई होने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा रहा है.
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Source: IOCL






















