जब उमर की लापरवाही के कारण कश्मीर में हुई थी मरीज की मौत, डॉक्टरी छोड़ आतंक का कोर्स करने लगा था नबी...
दिल्ली ब्लास्ट में मारा गया आतंकी डॉक्टर उमर उन नबी कभी कश्मीर के अनंतनाग में डॉक्टर हुआ करता था, लेकिन अपनी हरकतों से आतंकी ने इस पवित्र पेशे को भी बदनाम कर दिया.

राजधानी दिल्ली में लाल किले के पास सोमवार (10 नवंबर) को हुए कार विस्फोट में संदिग्ध आतंकी डॉक्टर उमर उन नबी भी मारा गया. सामने आए सीसीटीवी फुटेज में दिख रहा है कि जिस गाड़ी में ब्लास्ट हुआ था, उसकी स्टीयरिंग व्हील पर उमर बैठा नजर आया था. विस्फोट में उसके शरीर के टुकड़े-टुकड़े हो गए. जांच एजेंसियों ने कश्मीर में नबी के परिवार के सदस्यों को गिरफ्तार किया है और उनके डीएनए सैंपल लिए गए हैं. चालक की पहचान की पुष्टि के लिए इनका मिलान घटनास्थल पर मिले डीएनए से किया जाएगा.
कश्मीर में एक रिटायर्ड मेडिकल प्रोफेसर, जिन्होंने पूरी दुनिया के साथ इस खबर को देखा वो इसलिए ज्यादा हैरान नहीं हुए, क्योंकि उन्होंने बहुत पहले ही डॉक्टर नबी में वो देख लिया था, जिसे पूरी दुनिया ने अब जाना. प्रोफेसर डॉ. गुलाम जिलानी रोमशू उन 4 लोगों में शामिल थे, जिन्होंने अनंतनाग के सरकारी मेडिकल कॉलेज में नबी को नौकरी से हटाने के लिए सिफारिश की थी, जिसका कारण एक मरीज की मौत थी.
2023 में क्या हुआ था
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, ये घटना साल 2023 की है. उस समय नबी श्रीनगर से एमबीबीएस और एमडी की डिग्री लेने के बाद सरकारी मेडिकल कॉलेज में सीनियर रेजिडेंट (एसआर) के पद पर तैनात था. वो तीन साल के रेजिडेंसी प्रोग्राम के लिए अनंतनाग आया था. वहां पर जनरल मेडिसिन विभाग में डॉ. जिलानी नबी के सीनियर थे.
नबी ने अपनी नापाक हरकतों से डॉक्टरी के पेशे को भी बदनाम कर दिया. शुरू से ही उसके ख़िलाफ़ शिकायतें मिलने लगी. साथी डॉक्टरों, पैरामेडिकल स्टाफ़ और यहां तक कि मरीज़ों ने भी आरोप लगाया कि डॉ. उमर नबी ना सिर्फ़ असभ्य और लापरवाह था, बल्कि वो अक्सर अस्पताल से भी गायब ही रहता था. यह बात डॉ. नबी की भाभी मुज़म्मिला द्वारा 10 नवंबर को पत्रकारों को दिए बयान के एकदम उलट है, जिसमें उसने कहा था कि नबी पढ़ाई लिखाई करने वाला और अच्छा इंसान था.
आतंकी नबी के सीनियर रहे डॉ. जिलानी ने क्या बताया
डॉ. जिलानी ने इंडिया टुडे को बताया कि नबी की लापरवाही के कारण सरकारी अस्पताल में एक मरीज की जान चली गई थी. गंभीर हालत में मरीज नबी की देखरेख में था, लेकिन डॉक्टर नबी मरीज को छोड़कर अचानक ड्यूटी से गायब हो गया था. इस बीच मरीज की हालत बिगड़ गई. वहां मौजूद एक जूनियर डॉक्टर ने उसे बचाने की कोशिश की, लेकिन नाकाम रहा. इस कारण उस मरीज की जान चली गई.
मरीज के परिजनों ने अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक से नबी के खिलाफ शिकायत की. इसके बाद मामले की जांच के लिए 4 वरिष्ठ डॉक्टरों की एक समिति बनाई गई, जिसमें डॉ. जिलानी भी शामिल थे.
आखिरकार चली गई नबी की नौकरी
डॉ. जिलानी के अनुसार, नबी ने अपने पद से अनुपस्थित होने से साफ़ इनकार किया, लेकिन जब अस्पताल ने उस दिन के सीसीटीवी फुटेज की जांच की तो उसका झूठ सामने आ गया. डॉ. जिलानी ने कहा कि सबसे आश्चर्यजनक बात यह थी कि जांच के दौरान कई बार तलब किए जाने के बाद भी नबी अपना पक्ष रखने के लिए समिति के सामने पेश नहीं हुआ. आखिरकार समिति ने उसकी बर्खास्तगी की सिफ़ारिश की और बाद में उसे नौकरी से निकाल दिया गया.
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Source: IOCL





















