'हमारे बच्चों को खामियाजा भुगतना होगा', H-1B वीजा को लेकर PM मोदी की चुप्पी पर ओवैसी का हमला
ट्रंप सरकार की ओर से एच-1बी वीजा शुल्क बढ़ोतरी को लेकर सोमवार को AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि भारत को किसी भी हाल में अमेरिका के सामने झुकना नहीं चाहिए.

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने सोमवार (22 सितंबर, 2025) को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन के आगे झुकना नहीं चाहिए.
ओवैसी ने ट्रंप प्रशासन की ओर से एच-1बी वीजा शुल्क बढ़ाकर 1,00,000 अमेरिकी डॉलर करने के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इसका असर भारतीयों पर पड़ेगा, क्योंकि इस तरह के वीजा धारकों में लगभग 71 प्रतिशत भारतीय नागरिक हैं और इनमें से अधिकांश लोग आंध्र प्रदेश और तेलंगाना से हैं.
आने वाली बच्चों को भुगतना खामियाजा पड़ेगा खामियाजा
उन्होंने कहा, ‘मैं राजनीतिक लाभ नहीं उठाना चाहता, लेकिन मोदी सरकार को इस बात पर विचार करना चाहिए कि पाकिस्तान के सैन्य प्रमुख ने ट्रंप के साथ रात्रिभोज किया और हम अपने पड़ोसी देश को अमेरिका के साथ व्यापार समझौता करते हुए भी देख रहे हैं. इस घटनाक्रम का क्या मतलब है?’
हैदराबाद से लोकसभा सदस्य ने संवाददाताओं से कहा, ‘अगर हम इन पर नियंत्रण नहीं कर पाए तो हमारे बच्चों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा. हमें ट्रंप सरकार के आगे बिल्कुल नहीं झुकना चाहिए.’ उन्होंने पूछा कि ‘हाउडी मोदी’ और ट्रंप समर्थक अन्य कार्यक्रमों की क्या उपलब्धि है?
रेवंत रेड्डी की बातों का ओवैसी ने किया समर्थन
जीएसटी पर तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी की मांग पर प्रतिक्रिया देते हुए, ओवैसी ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि वह मुख्यमंत्री के अनुरोध से पूरी तरह सहमत हैं और उसका समर्थन करते हैं. रेड्डी ने सोमवार को मांग की है कि केंद्र सरकार हाल ही में जीएसटी दरों को युक्तिसंगत बनाने से राज्यों को हुए राजस्व नुकसान की भरपाई पांच साल तक करे.
ओवैसी ने कहा, ‘मैं रेवंत रेड्डी की ओर से रखी गई मांग से पूरी तरह सहमत हूं और उसका समर्थन करता हूं. नरेंद्र मोदी सरकार को इस मांग को स्वीकार करना चाहिए और इससे सभी राज्यों को मदद मिलेगी. इससे देश को पता चलेगा कि मोदी सरकार संघवाद में विश्वास करते है या नहीं. तेलंगाना राज्य को उसके विकास के लिए दंडित नहीं किया जाना चाहिए.’
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