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इंटरनेट ठप करने के मामले में भारत पहले नंबर पर, जानिए पहली बार किस देश में लिया गया था फैसला

क्या आपको पता है कि किसी भी राज्य या क्षेत्र में इंटरनेट बंद क्यों किया जाता है, भारत में अब तक कितनी बार इंटरनेट शटडाउन की गई है और दुनिया के अन्य देशों में इसको लेकर क्या नियम है? 

पंजाब में फरार अमृतपाल सिंह की तलाश के बीच पिछले तीन दिनों से इस राज्य की इंटरनेट सेवाएं बंद हैं. भारत के किसी भी क्षेत्र में हिंसक घटनाओं या तनाव की स्थिति में वहां कि इंटरनेट की सेवाओं को बंद कर दिया जाता है. जम्मू-कश्मीर में अक्सर ऐसा फैसला लिया जाता है. राजस्थान के उदयपुर और झारखंड के लोहरदगा में भी बीते साल तनाव की स्थिति में इंटरनेट बंद करने का फैसला लिया गया था ताकि कोई भी भड़काऊ मैसेज न फैला सके. 

लेकिन क्या आपको पता है कि भारत में अब तक कितनी बार इंटरनेट शटडाउन किया गया है और दुनिया के अन्य देशों में इसको लेकर क्या नियम हैं? 

दुनिया में सबसे ज्यादा बार इंटरनेट बंद करने वाला देश है भारत

  • इंटरनेट एडवोकेसी वॉचडॉग एक्सेस नाउ ने अपने एक रिपोर्ट में कहा है कि भारत ने साल 2022 में दुनिया में सबसे ज्यादा इंटरनेट शटडाउन किया है. इस रिपोर्ट के साथ ही यह लगातार पांचवां साल है जब इंटरनेट शटडाउन करने वाले देश की लिस्ट में भारत सबसे ऊपर है. यह एक ऐसा रिकॉर्ड है जिसपर कोई भी देश गर्व नहीं कर सकता. 
  • डिजिटल राइट्स एडवोकेसी ग्रुप की एक रिपोर्ट में इस बात का जिक्र किया गया है कि साल 2022 में पूरी दुनिया में कुल 187 बार इंटरनेट शटडाउन किए गए. जिसमें से 84 शटडाउन केवल भारत में हुए. इसमें से भी 49 बार जम्मू और कश्मीर में किया गया. 
  • एक्सेस नाउ की रिपोर्ट के अनुसार भारत के बाद दूसरे स्थान पर यूक्रेन रहा. यहां रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद से रूसी सेना ने कम से कम 22 बार इस देश की इंटरनेट सेवा को ठप कर दिया. था. इसके बाद तीसरे स्थान पर ईरान है जहां अधिकारियों ने सरकार के खिलाफ प्रदर्शनों के जवाब में 2022 में 18 बार इंटरनेट बंद किया है.

2012 से 2019 के बीच भारत में 367 बार इंटरनेट शटडाउन 

इंडियन काउंसिल फॉर रिसर्च ऑन इंटरनेशनल इकनॉमिक रिलेशन्स की रिपोर्ट के मुताबिक साल 2012 से जनवरी, 2019 तक भारत में केंद्र या राज्य सरकार ने 367 बार इंटरनेट बंद किया है. वहीं साल 2019 में दिसंबर तक लगभग 95 बार इंटरनेट सेवाएं बंद की गईं. जिसमें 60 बार पूरे एक दिन के लिए सेवा बंद की गई थी. वहीं 55 बार 24 से 72 घंटे और 39 बार 72 घंटे से ज्यादा समय तक इंटरनेट शटडाउन किया गया.

रिपोर्ट में दिए गए डाटा के मुताबिक साल 2012 से 2017 यानी पांच साल में 16 हजार घंटे तक इंटरनेट की सेवाएं ठप रहीं. साल 2019 के पहले तक सबसे ज्यादा यानी लगभग 180 बार जम्मू कश्मीर में इंटरनेट सेवा बंद की गई थीं. साल 2016 में चरमपंथी बुरहान वानी के मारे जाने के बाद प्रदर्शनों के बीच भी चार महीने इंटरनेट सेवाएं बंद रहीं. वहीं साल 2012 से 2017 तक इंटरनेट शटडाउन के कारण  तीन अरब डॉलर का घाटा हुआ. 

आखिर क्या है इंटरनेट शटडाउन

इंटरनेट शटडाउन को आसान भाषा में समझे तो इसका मतलब है किन्हीं भी कारणों से देश के किसी हिस्से में इंटरनेट बंद कर दिया जाना, आम तौर पर इस तरह के फैसले सरकार तब लेती है जब  हिंसा फैलने से रोकना होता है, या किसी भी विरोध-प्रदर्शन को बढ़ने से रोकने जैसे उपाय के तौर पर सरकार अपनाती है. 

भारत को क्यों पड़ती है इंटरनेट शटडाउन की जरूरत

भारत में पिछले कुछ सालों में पाया गया कि किसी सांप्रदायिक या राजनीतिक तनाव की घटना के दौरान मैसेजिंग ऐप्स या सोशल मीडिया के जरिए फेक न्यूज तेजी से फैलाई जाती है. इंटरनेट की मदद से आम तौर पर ऐसे क्षेत्र में हिंसा करने के लिए लोगों को इकट्ठा किया जाता है या दूसरी तरह की हिंसक गतिविधियां शामिल होती हैं.

केंद्र सरकार ने कश्मीर में इंटरनेट बंद करने के पीछे तर्क दिया था कि यहां इंटरनेट का इस्तेमाल पत्थरबाजी करने या आतंकी गतिविधियों के लिए किया जा रहा है. इसके अलावा कानून व्यवस्था बिगड़ने से रोकने के लिए भी कई राज्यों में इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी जाती है.

भारत में इंटरनेट शटडाउन को लेकर क्या है नियम? 

भारत में केंद्र सरकार और राज्य सरकार दोनों के पास ताकत है कि वह किसी भी टेलीकॉम कंपनियों को इंटरनेट सेवा को पूरी तरह बंद कर देने का आदेश दे सकती है. इसके अलावा सरकार कुछ साइटों को बंद करवा सकती है. इंटरनेट शटडाउन से पहले कोर्ट में मंजूरी लेना अनिवार्य नहीं है. 

इंटरनेट सर्विस प्रवाइडर कानून के तहत देश के सभी लाइसेंसधारी इंटरनेट सर्विस प्रवाइडर एक समझौते पर हस्ताक्षर करने को बाध्य हैं जिसमें भारत सरकार को यूजर के डाटा तक पहुंच रखने का अधिकार दिया जाता है. इस समझौते के अनुसार भारत सरकार किसी भी इंटरनेट कंपनियों से यूजरों का डाटा ले सकती है. 

साल 2017 से पहले इंटरनेट सेवा बंद की जानी चाहिए या नहीं इसका निर्णय जिले के डीएम लेते थे. लेकिन 2017 में सरकार ने इंडियन टेलिग्राफ ऐक्ट 1885 के तहत टेम्प्ररी सस्पेंशन ऑफ टेलीकॉम सर्विसेज (पब्लिक इमरजेंसी या पब्लिक सेफ्टी) नियम बनाए. जिसके तहत सिर्फ केंद्र या राज्य के गृह सचिव या उनके द्वारा अधिकृत अथॉरिटी इंटरनेट बंद करने का आदेश दे सकते हैं.

नियम कहते हैं कि अस्थायी निलंबन "सार्वजनिक आपातकाल या सार्वजनिक सुरक्षा के कारण" हो सकता है. इंटरनेट शटडाउन का अधिकार केंद्रीय और राज्य स्तर पर गृह मंत्रालय के पास है.  

दुनिया में इंटरनेट शटडाउन को लेकर क्या है नियम 

भारत के अलावा यूक्रेन, ईरान, चीन जैसे कई देशों में इंटरनेट सेवा बंद होती रही हैं, दुनियाभर के कई मानवाधिकार संगठन इसे मूल अधिकारों का उल्लंघन बताते रहे हैं और अभिव्यक्ति की आजादी पर ताला कह कर इंटरनेट और फोन पर लगे प्रतिबंधों का विरोध भी किया जाता रहा है. 

दुनिया का पहला इंटरनेट शटडाउन

दुनिया का ध्यान खींचने वाला पहला बड़ा इंटरनेट शटडाउन साल 2011 में मिस्र में हुआ था और इसके साथ ही सैकड़ों गिरफ्तारियां और हत्याएं भी हुई थीं. दरअसल साल 2011 में मिस्र में सरकार के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया. 

इस प्रदर्शन का वीडियो इंटरनेट पर वायरल होने लगा और जल्द ही यह अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में आ गया. जिससे मिस्त्र की सरकार डर गई और लगभग एक हफ्ते तक पूरे देश की इंटरनेट सेवा को ठप करवा दिया गया. यह दुनिया का पहला इंटरनेट शटडाउन था.  इसके बाद से तो इंटरनेट बंदी का राजनीतिक हथियार के तौर पर इस्तेमाल होने लगा.

दुनिया भर में इंटरनेट शटडाउन की निगरानी कर रहे 'कीप इट ऑन गठबंधन'  के अनुसार साल 2016-2021 तक दुनियाभर में 74 देशों में 931 शटडाउन का दस्तावेजीकरण किया गया है.

साल 2016 से 2021 के दौरान 12 देश ऐसे हैं जहां से 10 से ज्यादा बार इंटरनेट सेवाएं रद्द की गईं. लेकिन धिकांश रिपोर्ट एशिया और अफ्रीका से आई हैं.

कैसे बंद किया जाता है किसी भी क्षेत्र का इंटरनेट

इंटरनेट सेवा को ठप करने को आसान भाषा में समझे तो आमतौर पर हर किसी के घर में वाईफाई लगा होता है उस वाईफाई का एक राउटर भी होता है. ठीक इसी तरह फोन में चलने वाले इंटरनेट का राउटर उस क्षेत्र का मोबाइल टावर होता है. 

ऐसे में सरकार की किसी भी कारणवश किसी क्षेत्र का इंटरनेट सेवा बंद करना हो तो वह मोबाइल सेवा प्रदाता कंपनियों (आईएसपी) को आदेश देकर इंटरनेट बंद करवा देती हैं.

अब ये आईएसपी कंपनियां प्राइवेट और सरकारी दोनों हो सकती हैं. सरकार के हाथ में सरकारी कंपनियों का पूरा नियंत्रण हैं. लेकिन प्राइवेट कंपनियों को सरकार लाइसेंस देती है. लाइसेंस देने से पहले ही समझौते पर हस्ताक्षर किया जाता है कि अगर ऐसी किसी भी परिस्थिति में ये निजी कंपनियां केंद्र सरकार के निर्देशों का पालन नहीं करेंगी तो सरकार इनका लाइसेंस रद्द कर सकती है. 

इंटरनेट सेवा बंद करने के आदेश देने के बाद आईएसपी कंपनियां उस इलाके के इंटरनेट कनेक्टिविटी डिवाइस को बंद कर देते हैं. इसके बंद होने के बाद फोन पर सिग्नल तो आते हैं लेकिन इंटरनेट नहीं चलता. यही कारण है कि मोबाइल इंटरनेट बंद होने के बाद भी उस क्षेत्र में वाईफाई का इंटरनेट काम करते हैं क्योंकि मोबाइल इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर और वाई फाई सर्विस प्रोवाइडर कंपनियां अलग अलग होने के चलते वाई-फाई इंटरनेट चलता रहता है.

इंटरनेट शटडाउन का प्रभाव

आर्थिक गतिविधियों पर: अचानक से किसी भी क्षेत्र, राज्य या देश का इंटरनेट सेवा बंद कर दिया जाना उन क्षेत्रों के लिए बड़ी आर्थिक नुकसान की वजह बनता है. इसके अलावा इंटरनेट शटडाउन वित्तीय लेनदेन, वाणिज्य और उद्योग को बाधित करता है. विश्व बैंक की एक रिपोर्ट के अनुसार अकेले म्यांमार में इंटरनेट शटडाउन की वजह से फरवरी-दिसंबर 2021 से लगभग 2.8 बिलियन अमेरिकी डॉलर थी.

साल 2021 में भारत में इंटरनेट करीब 1,157 घंटे के लिए बंद किया गया जिसमें कुल मिलाकर 4300 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ. दरअसल, जब नेट बंद रहता है तो सभी फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन आदि रुक जाते हैं जिससे बड़े स्तर पर करोड़ों का नुकसान हो जाता है. 

व्यवसाय: इंटरनेट सेवाओं ने व्यवसाय के क्षेत्र में सबसे ज्यादा शॉपिंग मॉल और मल्टीकंपलेक्स को प्रभावित करता है.  जहां ज्यादातर ऑन लाइन पेमेंट होते हैं. जो पूरा का पूरा इंटरनेट सेवा पर आधारित है.

शिक्षा पर: इंटरनेट सेवा का बंद किया जाना उस क्षेत्र के लोगों के शिक्षा पर भी असर डालता है. दुनियाभर में हर छोटी छोटी चीजों के बारे में जानकारी पाने के लिए इंटरनेट का इस्तेमाल किया जाता है. ऐसे में इसका ठप होना लोगों की शिक्षा पर भी असर डालता है.

क्या बिना इंटरनेट के चैट नहीं की जा सकती है?

ऐसा नहीं है. आजकल कई ऐसे ऐप्स आ गए हैं जो वाईफाई से फाइल ट्रांसफर की सुविधा देते हैं. इसके साथ ही किसी भी फेन में ब्लूटूथ से फाइल ट्रांसफर का पुराना तरीका आज भी काम आता है. इंटरनेट सेवा बंद किए जाने की परिस्थिति में ब्लूटूथ और मोबाइल के वाईफाई और हॉटस्पॉट का इस्तेमाल कर मैसेज या वीडियो एक फोन से दूसरे फोन में पहुंचाया जा सकता है.

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