Dharmendra Pradhan Resign: कौन हैं OBC समाज से आने वाले धर्मेंद्र प्रधान, कहां के रहने वाले हैं? जानें उनका सियासी सफर
Dharmendra Pradhan Resignation: धर्मेंद्र प्रधान ने पिछले एक महीने से दिल्ली के जंतर-मंतर पर जारी छात्रों के विरोध और युवाओं के प्रदर्शन के बाद शिक्षा मंत्री पद से अपना इस्तीफा दे दिया है.

- 2014 से पेट्रोलियम, फिर शिक्षा मंत्री पद संभाला।
Dharmendra Pradhan Resign: देश की राजधानी दिल्ली में स्थित जंतर मंतर पर पिछले एक महीने से कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में नीट यूजी 2026 परीक्षा के पेपर लीक मामले को लेकर विरोध प्रदर्शन में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को निशाना बनाया जा रहा था. सीजेपी और विपक्ष लगातार धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे थे और अंततः धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार (25 जुलाई, 2026) को केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से अपना इस्तीफा दे दिया.
हालांकि, धर्मेंद्र प्रधान ने देश के युवाओं और छात्रों की ओर से इस्तीफे की लगातार मांग और भारी विरोध प्रदर्शन के बाद अपने पद को छोड़ दिया है, लेकिन 57 वर्षीय धर्मेंद्र प्रधान का बायोडेटा काफी सरकार और पार्टी के भीतर काफी मजबूत रहा है.
मूल रूप से कहां के रहने वाले हैं धर्मेंद्र प्रधान?
धर्मेंद्र प्रधान भारत के एक प्रमुख राजनीतिज्ञ और भारतीय जनता पार्टी (BJP) में एक वरिष्ठ नेता हैं, जो केंद्र सरकार में अब तक कई विभागों की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं. धर्मेंद्र प्रधान मूल रूप से ओडिशा राज्य के अंगलु जिले के तालेचर के रहने वाले हैं, जिनका जन्म 26 जून, 1969 को हुआ था और वह अत्यंत पिछड़ा वर्ग (OBC) के तहत आने वाले कुर्मी जाति से संबंध रखते हैं.
हालांकि, 57 वर्षीय धर्मेंद्र प्रधान को राजनीति विरासत में मिली है, उनके पिता डॉ. देवेंन्द्र प्रधान भी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री रह चुके हैं, लेकिन विरासत में मिली राजनीति के बावजूद धर्मेंद्र प्रधान ने बीजेपी में अपनी जगह कड़ी मेहनत से बनाई है. प्रधान ने साल 1983 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की थी, इसके बाद वे 1985 में तलचर कॉलेज छात्रसंघ के अध्यक्ष और 1995 में ABVP के राष्ट्रीय सचिव बने थे.
2004 में पहली बार लोकसभा सांसद बने थे प्रधान
धर्मेंद्र प्रधान साल 2004 में पहली बार ओडिशा के देवगढ़ से लोकसभा सांसद बना थे. इसके बाद वह बिहार और मध्य प्रदेश से राज्यसभा सांसद भी रहे. वहीं, साल 2005 में धर्मेंद्र प्रधान भाजपा युवा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी भी निभा चुके हैं. वे 2005 में 36 साल की उम्र में भाजयूमो के 10वें अध्यक्ष बने थे.
साल 2014 के आम चुनाव में प्रधान ने ओडिशा के संबलपुर सीट से शानदार जीत हासिल कर लोकसभा में वापसी की. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सत्ता आने के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने 2014 से 2021 तक लगातार केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री के रूप में काम किया. पेट्रोलियम मंत्री के रूप में धर्मेंद्र प्रधान का कार्यकाल स्वतंत्र भारत में सबसे लंबा कार्यकाल रहा. इसके बाद उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के रूप से काम किया. शिक्षा मंत्री के तौर पर धर्मेंद्र प्रधान को पूरे देश की स्कूली और उच्च शिक्षा ढांचे में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के नीतिगत बदलावों को साल 2020 में लागू करवाने का भी श्रेय दिया जाता है.
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