दिल्ली मेट्रो का नया कीर्तिमान, 314 KM लंबे नेटवर्क के साथ लंदन, न्यूयॉर्क जैसी विशाल मेट्रो में शामिल
दिल्ली मेट्रो यहां के लोगों के लिए लाइफलाइन है. हर दिन 30 लाख से ज्यादा लोगों को अपनी मंजिल तक पहुंचाने वाली इस सर्विस ने एक बार फिर सफलता की नई कहानी लिखी है. अब दिल्ली मेट्रो विश्व की उन चुनिंदा मेट्रो में शामिल हो गई हैं जिनके पास 300 किलोमीटर से बड़ी नेटवर्क है.

नई दिल्ली: दिल्ली मेट्रो अब विश्व की सबसे विशाल मेट्रो नेटवर्क लंदन, शंघाई, न्यूयॉर्क, बीजिंग की सूची में शामिल हो गया है. दिल्ली मेट्रो ने यह कीर्तिमान बुधवार को हासिल किया. यह रिकॉर्ड पिंक लाइन मेट्रो के केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के जरिए उद्घाटन के साथ हासिल हुई. इस लाइन की शुरूआत के बाद दिल्ली मेट्रो की कुल लंबाई 314 किलोमीटर और स्टेशनों की संख्या 229 हो गई है. इतने लंबे नेटवर्क वाले विश्व में चुनिंदा मेट्रो हैं, जिनमें अब दिल्ली मेट्रो का नाम शुमार हो गया है.
17.86 किलोमीटर लंबे पिंक लाइन के इस मेट्रो लाइन पर कुल 15 स्टेशन हैं. इनमें त्रिलोकपुरी संजय लेक, इस्ट विनोद नगर, आनंद विहार, कड़कड़डूमा, कड़कड़डूमा कोर्ट और वेलकम स्टेशन प्रमुख हैं. इस मेट्रो के शुभारंभ से नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली में लोगों को ट्रैफिक जाम से मुक्ति मिलेगी. इस लाइन पर यात्रा करने वाले वेलकम, कड़कड़डूमा और आनंद विहार स्टेशनों पर इंटरचेंज कर सकेंगे.
इस मेट्रो लाइन के खुलने का सीधा फायदा यमुनापार के मौजपुर, बाबरपुर, गोकलपुरी, जाफराबाद, वेलकम जैसे घनी आबादी वाले इलाकों में रहने वाले लोगों को होगा. हालांकि, कुछ कमियों के कारण त्रिलोकपुरू संयय लेक और आईपी एक्सटेंशन के बीच मेट्रो सिंगल रूट पर चलेगी. इसके कारण यहां मेट्रो 15.36 मिनट के फ्रीक्वेंसी पर चलेगी.
दिल्ली मेट्रो ने पिंक लाइन मेट्रो नेटवर्क के लिए अपने 21 नए ट्रेनों को अपने बेड़े में शामिल किया है. ये नए ट्रेन इस लाइन पर 812 अतिरिक्त ट्रिप लगाएंगे, जिसमें 14 ट्रेन के त्रिलोकपुरी-संजय लेक के बीच के 730 ट्रिप शामिल हैं. इस सेवा के बाद अब दिल्ली मेट्रो एक दिन में 4,749 ट्रिप प्रतिदिन लगाएगी.
मेट्रो ने पिंक लाइन के निर्माण में अनेक रिकॉर्ड भी कायम किए हैं. इसमें कड़कड़डूमा मेट्रो स्टेशन के ऊपर से 21 मीटर ऊपर ट्रैक बनाया गया है. इससे भी बड़ी कामयाबी दिल्ली मेट्रो ने मायापुरी और साउथ कैंपस के बीच पर कायम में की है. यहां पर 23.6 मीटर ऊंची मेट्रो लाइन जो कि लगभग 7 मंजिले इमारत की ऊंचाई के बराबर है का निर्माण किया गया है. वहीं, दिल्ली मेट्रो ने पहली बार विनोद नगर में दो मंजिला मेट्रो डिपो का निर्माण किया है.
डीएमआरसी ने अपना पहला कॉरिडोर दिल्ली के शाहदरा और तीस हजारी के बीच 25 दिसम्बर, 2002 को प्रारंभ किया था. इसके बाद 65 किलोमीटर लंबी मेट्रो लाइन्स के निर्माण का पहला चरण 2005 में उसके निर्धारित समय से दो साल नौ महीने पहले पूरा कर लिया गया था. दूसरे चरण में डीएमआरसी 125 किलोमीटर के अन्य मेट्रो कॉरीडोर्स का निर्माण केवल साढ़े चार साल में पूरा कर चुकी है.
डीएमआरसी के पास आज चार, छह और आठ कोच की 280 ट्रेन का सेट है. वर्तमान में छह कोच वाली 100 से अधिक और आठ कोच वाली 60 से अधिक ट्रेनें चलाई जा रही हैं. दिल्ली मेट्रो ने पर्यावरण के मोर्चे पर भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है. डीएमआरसी को संयुक्त राष्ट्र (यूएन) ने भी ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन कम करने के लिए कार्बन क्रेडिट्स प्राप्त करने वाली विश्व में पहली मेट्रो रेल और रेल आधारित प्रणाली के रूप में प्रमाणित किया है.
दिल्लीवासियों को एक आरामदेह परिवहन विकल्प उपलब्ध कराने के साथ ही दिल्ली मेट्रो सड़कों पर वाहनों की भीड़ कम करने की दिशा में भी योगदान दे रही है. केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान (सीआरआरआई) द्वारा वर्ष 2011 में किए गए एक अध्ययन के मुताबिक दिल्ली मेट्रो के आने से दिल्ली की गलियों से 1.17 लाख वाहन हटाने में सहायता मिली है.
दिल्ली मेट्रो रेल कार्पोरेशन (डीएमआरसी) का पंजीकरण दिनांक 3 मई, 1995 को कंपनी अधिनियम, 1956 के अधीन राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार (जीएनसीटीडी) और केंद्र सरकार की समान इक्विटी भागीदारी के साथ एक विश्वस्तरीय तीव्रगामी जन परिवहन प्रणाली (एमआरटीएस) के निर्माण और प्रचालन के सपने को साकार करने हेतु किया गया था.
यह भी पढ़ें-
कॉलेजियम ने चार मुख्य न्यायाधीशों को सुप्रीम कोर्ट में जज बनाने की सिफारिश की
देखें वीडियो-
Source: IOCL






















