दिल्ली मेट्रो की शुरुआत करने वाली ऐतिहासिक ट्रेन TS#01, 23 साल बाद भी बनी भरोसे की पहचान
DMRC के प्रधान कार्यकारी निदेशक अनुज दयाल ने बताया कि शुरुआत में TS#01 चार कोच की ट्रेन थी, लेकिन यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए 2014 में इसे छह कोच और फिर 2023 में आठ कोच का बना दिया गया.

साल 2002 की सर्दियों में दिसंबर महीने की एक सुबह जिस ट्रेन ने राजधानी दिल्ली को आधुनिक सार्वजनिक परिवहन का सपना दिखाया था, वही TS#01 आज भी उसी समर्पण के साथ यात्रियों की सेवा कर रही है. 24 दिसंबर 2025 को दिल्ली मेट्रो अपने सफल संचालन के 23 वर्ष पूरे कर रही है और इस ऐतिहासिक सफर की सबसे जीवंत गवाह बनी हुई है उसकी पहली ट्रेन TS#01.
दिल्ली मेट्रो की ऐतिहासिक शुरुआत की गवाह
दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) के प्रधान कार्यकारी निदेशक अनुज दयाल ने बताया कि दिसंबर 2002 में दिल्ली मेट्रो के संचालन की शुरुआत के साथ ही TS#01 ने राजधानी के परिवहन इतिहास में एक नया अध्याय लिखा. यह सिर्फ एक ट्रेन नहीं थी, बल्कि भारत के सबसे सफल मास ट्रांजिट सिस्टम की नींव थी. आज 23 वर्षों बाद भी यह ट्रेन दिल्ली मेट्रो के विशाल बेड़े का गर्वित हिस्सा बनी हुई है.
समय के साथ बदला स्वरूप और बढ़ी क्षमता
दयाल ने बताया कि शुरुआत में TS#01 चार कोच की ट्रेन थी, लेकिन यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए वर्ष 2014 में इसे छह कोच और फिर 2023 में आठ कोच का बना दिया गया. यह बदलाव दिल्ली मेट्रो की दूरदर्शी योजना और यात्रियों की जरूरतों के अनुरूप ढलने की क्षमता को दर्शाता है.
आंकड़ों में TS#01 की उपलब्धियां
वर्ष 2002 से अब तक TS#01 लगभग 2.9 मिलियन किलोमीटर का सफर तय कर चुकी है. इस दौरान इसने 60 मिलियन से अधिक यात्रियों को सुरक्षित उनके गंतव्य तक पहुंचाया है. ट्रेन के दरवाजे अब तक करीब 2.4 मिलियन बार खुले और बंद हुए, जो इसकी लगातार सेवा का प्रमाण है.
कोरिया से कोलकाता और फिर दिल्ली तक का सफर
TS#01 का निर्माण साउथ कोरिया के MRM कंसोर्टियम द्वारा किया गया था. इसके बाद इसे समुद्री मार्ग से कोलकाता लाया गया और वहां से भारतीय रेलवे नेटवर्क के जरिए दिल्ली पहुंचाया गया. उस समय चार कोच की इस ट्रेन की अनुमानित लागत करीब 24 करोड़ रुपये थी.
पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार तकनीक
TS#01 का उन्नत प्रोपल्शन सिस्टम इसे पर्यावरण के अनुकूल बनाता है. रीजेनेरेटिव ब्रेकिंग तकनीक के जरिए यह ट्रेन अपनी कुल ऊर्जा खपत का लगभग 40 प्रतिशत बिजली दोबारा उत्पन्न कर लेती है, जिससे कार्बन फुटप्रिंट में उल्लेखनीय कमी आती है.
2024 में हुआ मिड लाइफ रिहैबिलिटेशन
अब तक TS#01 दो बड़े ओवरहॉल से गुजर चुकी है. डीएमआरसी की मेंटेनेंस टीम द्वारा समय पर किए गए सुधारों की बदौलत इस ट्रेन ने 85,000 किलोमीटर का MDBF हासिल किया है, जो न्यूनतम अनुबंधित मानक 40,000 किलोमीटर से कहीं अधिक है. वर्ष 2024 में TS#01 का मिड लाइफ रिहैबिलिटेशन किया गया, जिसमें यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कई आधुनिक अपग्रेड शामिल किए गए.
यात्रियों की सुरक्षा के लिए अत्याधुनिक सिस्टम, रियल टाइम जानकारी और बेहतर सुविधाएं
ट्रेन में नवीनतम IP आधारित पैसेंजर अनाउंसमेंट और इंफॉर्मेशन सिस्टम लगाया गया. सीसीटीवी कैमरों से सुरक्षा बढ़ाई गई, जबकि इंटीग्रेटेड पैसेंजर इमरजेंसी अलार्म ने यात्रियों को अतिरिक्त भरोसा दिया.
LCD आधारित डायनामिक रूट मैप और पब्लिक इंफॉर्मेशन बोर्ड्स के जरिए स्टेशनों की जानकारी, दरवाजे खुलने की दिशा और सेफ्टी वीडियो यात्रियों को उपलब्ध कराए गए. मोबाइल और लैपटॉप चार्जिंग सॉकेट्स ने रोजाना सफर को और सुविधाजनक बना दिया.
विश्वसनीयता और सौंदर्य दोनों में सुधार
डोर सिस्टम, फायर डिटेक्शन सिस्टम और रिले पैनल का रिफर्बिशमेंट कर ट्रेन की समयपालन और भरोसेमंदी को और मजबूत किया गया. इसके साथ ही इंटीरियर और कैब एक्सटीरियर की नई पेंटिंग ने ट्रेन को आधुनिक और आकर्षक रूप दिया.
23 साल बाद भी जारी है गौरवशाली सफर
आज जब दिल्ली मेट्रो अपने संचालन के 23 वर्ष पूरे कर रही है, TS#01 उसी ऊर्जा और प्रतिबद्धता के साथ यात्रियों को सुरक्षित, विश्वसनीय और आरामदायक यात्रा का अनुभव दे रही है. यह ट्रेन न सिर्फ दिल्ली मेट्रो के इतिहास का हिस्सा है, बल्कि उसके उज्ज्वल भविष्य का भी प्रतीक बनी हुई है.
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