एक्सप्लोरर
महात्मा गांधी पुण्यतिथि विशेष: सत्याग्रह का रास्ता अपनाने वाले राष्ट्रपिता अहिंसा में रखते थे भरोसा

नई दिल्लीः राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की आज पुण्यतिथि है. पूरे देश में इसे शहीद दिवस के रूप में मनाया जाता है. आज ही के दिन साल 1948 में महात्मा गांधी की नाथूराम गोडसे ने गोली मारकर हत्या कर दी थी. इस हत्या ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था. उस दिन देशवासियों की आंखें नम थीं. महात्मा गांधी की याद में इस दिन को शहीद दिवस के रूप में मनाया जाता है. इस साल गांधी की 150वीं जयंती भी मनाई जा रही है. क्यों मनाया जाता है शहीद दिवस महात्मा गांधी और देश के स्वतंत्रता संग्राम में देश की आजादी के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले वीर सपूतों की याद में यह दिन मनाया जाता है. इस दिन महात्मा गांधी की समाधि स्थल राजघाट पर राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, रक्षा मंत्री राष्ट्रपिता को श्रद्धा-सुमन अर्पित करते हैं. पूरे देश में महात्मा गांधी की याद में प्रार्थना सभाएं आयोजित की जाती हैं. इस दिन इस बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने 'मन की बात' कार्यक्रम में देश के सभी लोगों से अपील की है कि वह महात्मा गांधी के पुण्यतिथि के अवसर पर दो मिनट का मौन धारण करें. देश में एक और दिन भी शहीद दिवस मनाया जाता है. 23 मार्च को जिस दिन अंग्रेजो ने भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को फांसी दी थी उस दिन को भी शहीद दिवस के तौर पर मनाया जाता है. भगत सिंह को उनके दो साथियों के साथ 23 मार्च, 1931 को फांसी दी गई थी. महात्मा गांधी का देश की आजादी में योगदान महात्मा गांधी ने देश को आजाद करने के लिए सत्याग्रह का रास्ता अपनाया. वो अहिंसा में विश्वास करते थे और पूरे जीवन उन्होंने लोगो को इसी का पाठ पढ़ाया. गांधी 1915 में अफ्रीका से वापस भारत आए और इसके बाद उन्होंने पूर्ण रूप से खुद को आजादी के आंदोलन में झोंक दिया. 1915 के बाद महात्मा गांधी ने अंग्रेजो के खिलाफ एक के बाद एक आंदोलन और सत्याग्रह किए. 70वें गणतंत्र दिवस पर पूरे विश्व ने देखी महात्मा गांधी के त्याग और बलिदान की झलक चंपारण सत्याग्रह की सफलता ने गांधी की ओर संपूर्ण देश का ध्यान खींचा. इसके बाद उन्होंने 1920 में असहयोग आंदोलन चलाया फिर 1930 में उन्होंने नमक के अत्याचारी कानून को तोड़ने के लिए आंदोलन किया. दलितों पर देश में जारी विभेद को खत्म करने के लिए उन्होंने दलित आंदोलन चलाया और उसके बाद साल 1942 में उन्होंने भारत छोड़ो आंदोलन चलाया. गांधी के इन्हीं अथक प्रयासों के कारण अंग्रेजों को बाद में हार माननी पड़ी और देश 15 अगस्त, 1947 को आजाद हो गया. महात्मा गांधी की सीख महात्मा गांधी ने अपने विचारों और कामों से हमें अनेक चीजें सिखाई हैं. इनका प्रयोग हमारे लिए जीवन के अनेक पड़ाव में मददगारी साबित होता है. उन्होंने हमेशा सच बोलने की सीख दी, अच्छा व्यवहार करने नसीहत दी, जरूरतमंदों की मदद की अपील की. महात्मा गांधी सत्य को ही भगवान मानते थे और किसी प्रकार के जाति, मजहब, लिंग, धर्म और समाज के नाम पर भेदभाव के खिलाफ थे. सत्याग्रह और अहिंसा मानवता को उनके द्वारा दी गई सबसे कीमती उपहार है. महात्मा गांधी पुण्यतिथि विशेष: 'धर्म' और 'हिन्दुत्व' को लेकर क्या सोचते थे राष्ट्रपिता पीएम मोदी का एक और मास्टर स्ट्रोक, दांडी में बनवाया महात्मा गांधी का 'नमक सत्याग्रह स्मारक'
और पढ़ें


















