राजस्थान में राजभवन के आगे सोमवार को प्रदर्शन नहीं करेगी कांग्रेस, प्रदेश अध्यक्ष ने दी जानकारी
राजस्थान कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने ट्वीट करते हुए कहा कि हम राजस्थान में ऐसा कुछ नहीं करेंगे.

जयपुर: राजस्थान में राजनीतिक संकट के बीच राजस्थान कांग्रेस पार्टी ने एक बड़े बदलाव के तहत सोमवार को ‘संविधान और लोकतंत्र को बचाने’ के लिये राजभवन के सामने प्रस्तावित अपना प्रदर्शन वापस ले लिया है. कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि कांग्रेस पार्टी की ओर से दिये गये राजभवनों के सामने देशव्यापी विरोध प्रदर्शन के आह्वान का राजस्थान कांग्रेस हिस्सा नहीं होगी.
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने ट्वीट कर दी जानकारी
डोटासरा ने ट्वीट करके कहा, ‘‘सोमवार को 'लोकतंत्र बचाने, संविधान बचाने' के अभियान के तहत कांग्रेसी देश के सभी राज्यों में राजभवनों के सामने प्रदर्शन करेंगे, लेकिन हम राजस्थान में ऐसा कुछ भी नहीं करेंगे. हमने महामहिम को कैबिनेट का ‘रिवाइज्ड’ (संशोधित) नोट भेज दिया है और उम्मीद करते हैं कि वे जल्द सत्र आहूत करने की स्वीकृति देंगे.’’
इससे पहले कांग्रेस के सीनियर नेता अजय माकन ने रविवार को कहा था, ‘‘राजस्थान की बहुमत वाली कांग्रेस सरकार के पक्ष में, कांग्रेस विधायकों के समर्थन में, संविधान और प्रजातंत्र की रक्षा के लिए कल पूरे देश में राजभवनों के सामने कांग्रेसजन और देशवासी गांधीवादी धरना देंगे. यह लोकतंत्र की रक्षा और सुरक्षा के हमारे संकल्प को और ज्यादा मजबूत करेगा.’’
विधानसभा सत्र बुलाने के लिए कांग्रेस विधायकों द्वारा राजभवन के लॉन में पांच घंटे का धरना देने के बाद राज्यपाल कलराज मिश्र ने शुक्रवार को राज्य सरकार से छह मुद्दों पर स्पष्टीकरण मांगा था. कांग्रेस के अनुसार धरना राज्यपाल मिश्र के संविधान के अनुसार कार्य करने और दबाव में कार्य नहीं करने के आश्वासन के बाद समाप्त कर दिया गया था. राज्यपाल ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से विधानसभा सत्र को बुलाने के लिये उनकी अनुशंषा को स्पष्टीकरण के साथ फिर से पेश करने को कहा था.
राजस्थान मामले कल SC में सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट राजस्थान मामले पर कल सुनवाई करेगा. सुनवाई सुबह 11 बजे शुरु होगी. कोर्ट को यह तय करना है कि राजस्थान हाई कोर्ट पायलट खेमे के विधायकों की याचिका पर सुनवाई कर सकता था या नहीं? स्पीकर ने अर्ज़ी दायर कर कहा है कि हाई कोर्ट ने विधायकों की अयोग्यता के मसले पर उनके फैसले से पहले सुनवाई कर के उनके अधिकार क्षेत्र का हनन किया है. उधर स्पीकर के सुप्रीम कोर्ट पहुंच जाने के बाद हाई कोर्ट ने भी फिलहाल अपना फैसला टाल दिया है. ऐसे में राजस्थान की राजनीतिक रस्साकशी में सुप्रीम कोर्ट की भूमिका अहम हो गई है.
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