'1372 वोटर हटाए, मुझे पता है किसने, 8 लोग इसके पीछे', MP पाटिल का सनसनीखेज आरोप
कर्नाटक मंत्री एमबी पाटिल ने एसआईआर के खुलासे के बाद बीजेपी पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा, मेरे चुनाव क्षेत्र में 1,372 वोटरों के नाम हटा दिए गए हैं.

एसआईआर के खुलासे के बाद से विपक्ष बीजेपी और चुनाव आयोग पर निशाना साध रहा है. कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने आरोप लगाया था कि चुनाव आयोग बीजेपी के इशारे पर काम कर रहा है. अब मंत्री एमबी पाटिल ने बीजेपी पर लिस्ट से वोटरों के नाम हटाने का आरोप लगाया है.
न्यूज एजेंसी एएनआई से बात करते हुए एमबी पाटिल ने कहा, ज़रा देखिए कि SIR के मुद्दे पर BJP और चुनाव आयोग क्या कर रहे हैं. मेरे चुनाव क्षेत्र में 1,372 वोटरों के नाम हटा दिए गए हैं. मुझे पता है कि यह किसने किया है और किस मकसद से किया है. इसके पीछे 8 लोग हैं; मैं उन सभी को जानता हूं.
Vijayapura, Karnataka: State Minister MB Patil says, "Look at what the BJP and the Election Commission are doing on the issue of SIR. In my constituency, 1,372 voter names have been removed. I know who has done it and with what intention. There are 8 people behind this; I know… pic.twitter.com/ArI2f23YMD
— ANI (@ANI) September 27, 2026
फ्रीडम पार्क में किया प्रदर्शन
कर्नाटक कांग्रेस के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने शनिवार को बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क में प्रदर्शन किया. जहां पर उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की. पार्टी ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग अपने संवैधानिक अधिकारों का दुरुपयोग कर रहा है और पात्र मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं.
सीएम ने कही ये बात
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने अल्पसंख्यक समुदायों से विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान सतर्क रहने और अपने मतदान अधिकारों की रक्षा करने का आग्रह किया. उन्होंने कहा, युवाओं को सतर्क रहना चाहिए. एसआईआर प्रक्रिया के दौरान अल्पसंख्यक समुदायों के मतदाताओं को मतदाता सूची से हटाने की साजिश रची जा रही है, और हम इसके खिलाफ लड़ रहे हैं. मतदान का आपका अधिकार आपके जीवन का अधिकार है। इसकी रक्षा करें.
बता दें एसआईआर को लेकर हंगामा द इंडियन एक्सप्रेस अखबार में छपी रिपोर्ट के बाद से हुआ है. उसमें खुलासा हुआ है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने करीब 10 महीनों में कम से कम 14 बार चुनाव आयोग के कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं पर औपचारिक आपत्तियां दर्ज की थीं. इन आपत्तियों में नए मतदाताओं के पंजीकरण, मतदाता सूची से नाम हटाने और दोबारा जोड़ने, Form 6 में बदलाव और मतदाता सूची के डिजिटल डेटाबेस तक पहुंच जैसे मुद्दे शामिल थे.
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