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Assembly Elections: 2010 के बाद से कितने राज्यों में अपने दम पर सरकार बना पाई कांग्रेस, पढ़िए पूरी खबर

Congress: हिमाचल प्रदेश में जीत हासिल करके कांग्रेस पार्टी को बड़े दिनों बाद लड्डू बांटने का मौका मिला है. पार्टी अपने प्रदर्शन से काफी खुश है.

Congress News: गुजरात और हिमाचल प्रदेश के नतीजे सामने आ चुके हैं. गुजरात में बीजेपी ने प्रचंड बहुमत के साथ वापसी की है, तो हिमाचल प्रदेश की सत्ता उसके हाथों से फिसल गई है. हिमाचल की जनता ने रिवाज को कायम रखते हुए इस बार कांग्रेस को मौका दिया है. प्रदेश में कांग्रेस (Congress) ने 40 और बीजेपी (BJP) ने 25 सीटों पर जीत हासिल की है. तीन सीटें निर्दलीय प्रत्याशियों के खाते में भी गई हैं. 

कांग्रेस पार्टी को बड़े दिनों बाद लड्डू बांटने का मौका मिला है. पार्टी अपने प्रदर्शन से काफी खुश है. 2024 में होने वाले लोकसभा चुनावों की तैयारी में जुटी कांग्रेस पार्टी के लिए ये बड़ी अहम जीत है. पार्टी को ये जीत उस वक्त मिली है, जब राहुल गांधी भारत जोड़ो यात्रा निकाल रहे हैं. आइए देखते हैं कि 2010 के बाद से कांग्रेस पार्टी ने कितने राज्यों में अपने दम पर सरकार बनाई है?

  • मणिपुर चुनाव 2012- मणिपुर में साल 2012 में हुए विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए 60 में से 42 सीटों पर जीत हासिल की थी. बीजेपी का तो खाता भी नहीं खुला था. वहीं ममता बनर्जी की पार्टी TMC को सात, मणिपुर स्टेट कांग्रेस पार्टी को पांच, नगा पीपुल्स फ्रंट को चार, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी तथा लोक जनशक्ति पार्टी को एक-एक सीट मिली थीं. कांग्रेस की ओर से ओकराम इबोबी को लगातार तीसरी बार मुख्यमंत्री बनाया गया था. केंद्र में मोदी सरकार आने के बाद बड़े स्तर पर स्थानीय कांग्रेस नेताओं ने बीजेपी ज्वाइन की. इसका नतीजा ये हुआ कि 2017 में बीजेपी सत्ता में आ गई. 
  • हिमाचल प्रदेश चुनाव 2012- हिमाचल प्रदेश में सत्ता परिवर्तन का रिवाज है. इससे पहले प्रदेश की जनता ने 2012 में कांग्रेस को सत्ता में बैठने का मौका दिया था. इस चुनाव में कांग्रेस और बीजेपी के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिली थी. प्रदेश की कुल 68 विधानसभा सीटों में से कांग्रेस ने 36 सीटों पर जीत दर्ज की थी, तो बीजेपी को 26 सीटें मिली थीं. सीपीआई, सीपीएम, बसपा, सपा और हिमाचल लोकहित कांग्रेस ने भी एक-एक सीट हासिल की थी. 5 सीटों पर निर्दलीय जीते थे. कांग्रेस ने वीरभद्र सिंह को मुख्यमंत्री बनाया था. 
  • कर्नाटक चुनाव 2013- कर्नाटक में अगले साल विधानसभा का दंगल सजने वाला है. प्रदेश में इस समय बीजेपी की सरकार और पार्टी ने अभी से चुनावों की तैयारी शुरू कर दी है. कर्नाटक में कांग्रेस को पूर्ण बहुमत से सरकार बनाने का मौका 2013 में मिला था. इस चुनाव से ठीक पहले बीजेपी के वरिष्ठ नेता बीएस येदियुरप्पा ने अपनी अलग पार्टी बना ली थी. इससे बीजेपी को तगड़ा नुकसान हुआ था और बीजेपी के हाथ से सत्ता फिसल गई थी. इस चुनाव में कांग्रेस को121 सीटें, बीजेपी को 40 सीटें, जेडीएस को 40 सीटें मिली थीं. येदियुरप्पा की पार्टी केजेपी को सिर्फ 06 सीटें मिली थीं. वहीं 16 सीटों पर अन्य को जीत मिली थी. कांग्रेस की ओर से सिद्धारमैया को मुख्यमंत्री बनाया गया था. सिद्धारमैया दूसरे ऐसे हैं, जो पूरे 5 साल तक मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठ सके.
  • अरुणाचल प्रदेश चुनाव 2014- अरुणाचल प्रदेश को कांग्रेस को आखिरी बार 2014 में जीत मिली थी. इस चुनाव में प्रदेश की कुल 60 सीटों में से सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी ने 42 सीटें जीत कर दो तिहाई बहुमत प्राप्त किया था. भारतीय जनता पार्टी 11 सीटें जीत कर दूसरे स्थान पर जबकि पीपुल्स पार्टी ऑफ अरुणाचल 5 सीटें जीतकर तीसरे स्थान पर रही थी. कांग्रेस नेता नबम तुकी ने लगातार दूसरे कार्यकाल के लिए 18 मई 2014 को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी.
  • पंजाब चुनाव 2017- पंजाब में हाल ही में हुए चुनावों में आम आदमी पार्टी की झाड़ू चल गई थी. प्रदेश में कांग्रेस को खुश होने का मौका 2017 में मिला था. इस चुनाव में कांग्रेस पार्टी ने अकाली दल-बीजेपी गठबंधन से 10 साल बाद सत्ता छीनी थी. प्रदेश की कुल 117 सीटों में से कांग्रेस ने 77 सीटों पर कब्जा जमाया था. अकाली-बीजेपी गठबंधन को महज 18 सीटें हासिल हुई हैं. वहीं अपने पहले ही चुनाव में आम आदमी पार्टी ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए 20 सीटें हासिल करके प्रमुख विपक्षी पार्टी का दर्जा हासिल कर लिया था. 
  • छत्तीसगढ़ चुनाव 2018- साल 2018 में हुए विधानसभा चुनावों में बीजेपी को जबरदस्त तगड़ा झटका लगा था. 15 साल से सत्ता में काबिज बीजेपी को कांग्रेस ने करारी शिकस्त दी थी. प्रदेश की कुल 90 में से कांग्रेस ने 68 सीटों पर जीत दर्ज करके सरकार बनाई थी. बीजेपी को सिर्फ 15 सीटें ही हासिल हुई थी. कांग्रेस की ओर भूपेश बघेल को मुख्यमंत्री बनाया गया था. अगले साल भूपेश बघेल को अग्निपरीक्षा देनी होगी, मतलब अगले साल प्रदेश में विधानसभा चुनाव होना है.
  • राजस्थान चुनाव 2018- साल 2018 में हुए चुनावों में कांग्रेस भले ही सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी हो, लेकिन बहुमत के जादुई आंकड़े को छूने से एक कदम पहले ही रुक गई थी. कांग्रेस को 99 सीटें मिली थीं, जबकि बीजेपी 73 सीटें ही जीत पाई थी. बसपा ने 6 सीटों में जीत दर्ज की थी, तो 13 सीटों पर निर्दलीय जीते थे. बसपा ने कांग्रेस को समर्थन कर दिया था और अशोक गहलोत को मुख्यमंत्री बनाया गया था. 
  • मध्य प्रदेश चुनाव 2018- राजस्थान की तरह मध्य प्रदेश में भी कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी, लेकिन बहुमत नहीं हासिल कर पाई थी. इस चुनाव में कांग्रेस ने 114 सीटों पर जीत दर्ज की थी, जबकि बीजेपी को 109 सीटें मिली थीं. वहीं बसपा ने 2, सपा ने 1 और अन्य ने 4 सीटों पर जीत हासिल की थी. सपा-बसपा ने कांग्रेस को समर्थन कर दिया था. कांग्रेस की ओर से कमलनाथ को मुख्यमंत्री बनाया गया था. इस तरह से शिवराज सिंह चौहान के हाथ से सत्ता फिसल गई थी. हालांकि ज्योतिरादित्य सिंधिया की बगावत से शिवराज को भी फिर से सीएम की कुर्सी पर बैठने का मौका मिल गया था. 

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