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नागरिकता संसोधन कानून: दिल्ली में आगजनी और हिंसा, करीब 60 लोग घायल

नागरिकता संसोधन कानून को लेकर हो रहे विरोध के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प में पुलिसकर्मी, दमकलकर्मी और छात्रों समेत करीब साठ लोग घायल हो गए.

नई दिल्ली: नागरिकता (संशोधन) कानून का विरोध कर रहे प्रदर्शनकारियों की जामिया मिल्लिया इस्लामिया के समीप न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी में पुलिस के साथ झड़प हो गई, जिसमें प्रदर्शनकारियों ने डीटीसी की चार बसों और दो पुलिस वाहनों में आग लगा दी. झड़प में छात्रों, पुलिसकर्मियों और दमकलकर्मी समेत करीब 60 लोग घायल हो गए.

जामिया मिल्लिया इस्लामिया के छात्रों के प्रदर्शन के दौरान यह बवाल हुआ. दरअसल, पुलिस ने विश्वविद्यालय में प्रवेश किया और कथित तौर पर हिंसा में शामिल कई लोगों को हिरासत में ले लिया.

हालांकि, जामिया छात्र संघ ने बयान जारी कर नागरिकता अधिनियम के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा से खुद को अलग कर लिया है. छात्रों के समूह ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन में ‘‘कुछ खास तत्व’’ शामिल हो गए और उन्होंने इसे ‘‘बाधित’’ किया.

शाम को बाद में जवाहरलाल नेहरू (जेएनयू) विश्वविद्यालय के छात्रों ने जामिया विश्वविद्यालय में पुलिस की कार्रवाई के खिलाफ मध्य दिल्ली में पुलिस मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन किया और यह गतिरोध रात तक चलता रहा.

हिंसा और दिल्ली मेट्रो के कई स्टेशन बंद होने के कारण लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा. हिंसा के तुरंत बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया के चीफ प्रॉक्टर वसीम अहमद खान ने रविवार को दावा किया कि दिल्ली पुलिस के कर्मी बगैर इजाजत के जबरन विश्वविद्यालय में घुस गये और कर्मचारियों तथा छात्रों को पीटा तथा उन्हें परिसर छोड़ने के लिए मजबूर किया.

विश्वविद्यालय की कुलपति नजमा अख्तर ने पुलिस कार्रवाई की निंदा करते हुए कहा कि पुस्तकालय के भीतर मौजूद छात्रों को निकाला गया और वे सुरक्षित हैं. इस बीच पुलिस उपायुक्त (दक्षिणपूर्व) चिन्मॉय बिस्वाल ने कहा कि प्रदर्शन के दौरान चार बसों और दो पुलिस वाहनों को जला दिया गया. उन्होंने कहा कि इसमें छह पुलिसकर्मी घायल हुए है. उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय के अंदर से पुलिसकर्मियों पर पथराव किया गया और ‘‘हिंसक भीड़’’ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े गये. बिस्वाल ने कहा कि कुछ लोगों को हिरासत में लिया गया है लेकिन उन्होंने इस संबंध में विस्तृत जानकारी नहीं दी.

दक्षिण दिल्ली में हिंसा होने के मद्देनजर डीएमआरीस ने जीटीबी नगर, शिवाजी स्टेडियम, पटेल चौक और विश्वविद्यालय समेत कई मेट्रो स्टेशनों के गेट रविवार शाम को कई घंटों के लिए बंद कर दिए. पुलिस के साथ युवक छात्रावासों से बाहर आते दिखे जिनके हाथ ऊपर की तरफ उठे हुए थे. उनमें से कुछ ने दावा किया कि पुलिस पुस्तकालय में भी घुसी और छात्रों का ‘‘उत्पीड़न’’ किया.

सूत्रों ने बताया कि जामिया मिलिया इस्लामिया के समीप नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों एवं पुलिस के बीच झड़प में करीब 35 घायल विद्यार्थियों को समीप के अस्पताल ले जाया गया.

होली फैमिली अस्पताल के निदेशक फादर जॉर्ज पीए ने कहा, ‘‘हमारे पास विश्वविद्यालय के छात्र और दो पुलिसकर्मी भी आए हैं जिन्हें चोटें, खरोंचें आयी हैं. इनमें से ज्यादातर को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है.’’उन्होंने बताया कि दो पुलिसकर्मियों समेत तीन-चार लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है. उन्होंने बताया, ‘‘उन्हें सिर पर चोटें आयी हैं शायद पथराव के कारण. किसी की भी हालत गंभीर नहीं है. हम उनकी देखभाल कर रहे हैं.’’

एक प्रत्यक्षदर्शी ने दावा किया कि प्रदर्शनकारियों ने एक मोटरसाइकिल से पेट्रोल निकाला और इसका इस्तेमाल बसों को जलाने के लिए किया. प्रदर्शनकारियों ने दावा किया कि पुलिस ने उन पर लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले का इस्तेमाल किया जब वे शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे थे.

दिल्ली अग्निशमन सेवा के एक अधिकारी ने कहा कि घटनास्थल पर दमकल की चार गाड़ियां भेजी गई हैं. प्रदर्शनकारियों की हिंसा में एक दमकल गाड़ी पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई और दो कर्मी जख्मी हो गए. जलाई गई बसों से धुएं का गुबार उठता दिखा और दमकलकर्मियों ने उन्हें बुझाने का प्रयास किया.

कांग्रेस से संबद्ध नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय सचिव सिमॉन फारूकी ने दावा किया कि प्रदर्शनकारी शांतिपूर्ण तरीके से मथुरा रोड पर बैठे थे तभी पुलिस ने उनमें से कुछ को ‘‘परेशान’’ करने का प्रयास किया जिसका उन्होंने विरोध किया. उन्होंने आरोप लगाया कि इसके बाद पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया और आंसू गैस का इस्तेमाल किया. हिंसा से इलाके में कई वाहन घंटों तक सड़कों पर फंसे रहे.

इस बीच जामिया टीचर्स एसोसिएशन ने स्थानीय राजनीतिक नेताओं के नेतृत्व वाले इस तरह के ‘‘दिशाहीन’’ प्रदर्शन से दूर रहने की छात्रों से अपील की. जामिया के छात्र नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में प्रदर्शन कर रहे हैं. शनिवार की शाम को उन्होंने विश्वविद्यालय को पूरी तरह से बंद रखने की अपील की थी और घोषणा की थी कि वे शांतिपूर्ण प्रदर्शन करेंगे.

जामिया के छात्रों ने आज हुई हिंसा के बाद बयान जारी कर कहा, ‘‘हम बार-बार कहते रहे हैं कि हमारा प्रदर्शन शांतिपूर्ण और अहिंसक है. हम इस रुख पर अड़े हुए हैं और हिंसा में शामिल किसी भी पक्ष की निंदा करते हैं.’’

बयान में कहा गया है, ‘‘हमने उस समय भी शांति बनाए रखी जब छात्रों पर लाठीचार्ज किए गए और कुछ महिला प्रदर्शनकारियों को बुरी तरह पीटा गया. मीडियाकर्मी इन घटनाओं के गवाह रहे हैं.’’

सूत्रों ने बताया कि पुलिस जामिया मिल्लिया इस्लामिया के परिसर में घुस गई और विश्वविद्यालय के गेट बंद कर दिए ताकि ‘‘बाहरी’’ लोगों को पकड़ सके जो छिपने के लिए परिसर में घुस गए थे.

हालांकि, विश्वविद्यालय के चीफ प्रॉक्टर वसीम अहमद खान ने रविवार को दावा किया कि दिल्ली पुलिस के कर्मी बगैर इजाजत के जबरन विश्वविद्यालय में घुस गये और कर्मचारियों तथा छात्रों को पीटा तथा उन्हें परिसर छोड़ने के लिए मजबूर किया. कुलपति ने कहा कि उनके छात्र हिंसक प्रदर्शन में शामिल नहीं थे. उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘शाम में जब आंदोलन शुरू हुआ तो मेरे छात्रों ने इसका आह्वान नहीं किया था. वे समूह से जुड़े हुए नहीं थे.’’उन्होंने कहा, ‘‘... किस विश्वविद्यालय में इतनी भारी भीड़ हो सकती है. कम से कम मेरे विश्वविद्यालय में नहीं. आज रविवार था और हमने पहले ही शनिवार को शीतकालीन अवकाश घोषित कर दिया था, इसलिए आधे छात्र पहले ही अपने घर जा चुके थे.’’

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि किसी भी तरह की हिंसा अस्वीकार्य है और प्रदर्शन शांतिपूर्ण होना चाहिए. उन्होंने ट्वीट किया, ‘‘किसी को भी शांति नहीं करनी चाहिए. किसी भी तरह की हिंसा अस्वीकार्य है. प्रदर्शन शांतिपूर्ण होने चाहिए.’’

बीजेपी ने हिंसा के लिए आम आदमी पार्टी को जिम्मेदार ठहराया और उससे लोगों को उकसाना बंद करने की मांग की. हालांकि आप ने इस आरोप को खारिज कर दिया. दिल्ली बीजेपी प्रमुख मनोज तिवारी ने ट्वीट किया कि आप विधायक जनता को ‘‘उकसा’’ रहा था और उन्होंने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को ‘‘गद्दार’’ बताया. उन्होंने कहा, ‘‘अरविंद केजरीवाल के इशारे पर आप का विधायक जनता को भड़का रहा है. भारत का मुसलमान भारत के साथ है, तुम जैसे गद्दारों की बातों में आने वाला नहीं. लोगों को उकसाना बंद करो. दिल्ली की जनता गद्दारों को सबक सिखाएगी. आप का पाप सामने आ रहा है.’’

बहरहाल, ओखला विधायक अमानतुल्ला खान जिनकी तरफ तिवारी का इशारा था, उन्होंने आरोपों से इनकार किया. उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘‘कुछ टेलीविजन चैनलों ने समाचार चलाये हैं कि मेरे नेतृत्व में प्रदर्शनकारियों ने बसों को आग लगायी जो कि गलत है. मैंने शाहीन बाग के पास प्रदर्शन किया जहां कुछ भी नहीं हुआ.’’

दिल्ली यातायात पुलिस ने ट्वीट कर कहा कि आंदोलन के कारण ओखला अंडरपास से सरिता विहार तक यातायात बंद रहा. जाम के कारण बदरपुर और आश्रम चौक से आने वाले वाहनों को वैकल्पिक मार्गों की तरफ भेजा गया.

बीजेपी नेता कपिल मिश्रा ने हिंसा की तुलना गोधरा घटना से की और आप सरकार पर इसके पीछे होने का आरोप लगाया. उन्होंने यह भी कहा कि हिंसा किसी आतंकवादी हमले से कम नहीं है.’’उन्होंने कहा, ‘‘यह एक आतंकवादी हमला है. किसी बस को आग लगाना जिसमें एक सीएनजी सिलेंडर है, का मतलब है कि किसी बड़े विस्फोट की साजिश थी. आप इसे एक आतंकवादी हमला नहीं कहेंगे तो क्या कहेंगे? यह अमानतुल्ला खान द्वारा शुरू किया गया था. वे दिल्ली में गोधरा घटना को दोहराना चाहते हैं.’’

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