OSM पर SC में सुनवाई, CBSE ने कहा- ‘1.68 लाख छात्रों की कॉपियां दोबारा जांचीं’
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सीबीएसई की तरफ से दोबारा से जितने छात्रों की कॉपियां जांची गई, उसका ब्यौरा साझा किया. जबकि याचिकाकर्ता ने छात्रों ने शिकायत करने में आ रही मुश्किलों के बारे में बताया.

- ओएसएम तकनीकी खामियां जांचने को पूर्व IAS अधिकारी समिति बनी।
सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार (21 अगस्त) को सीबीएसई की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) व्यवस्था से जुड़ी याचिका पर सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि CBSE ने छात्रों की शिकायतों के लिए एक हफ्ते की विशेष ग्रीवांस विंडो खोली थी. इसके जरिए करीब 1 लाख 68 हजार छात्रों ने शिकायत दर्ज कराई और उनकी उत्तर पुस्तिकाओं का दोबारा मूल्यांकन किया गया.
याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि जिन छात्रों को शिकायत है, उनकी संख्या 1.68 लाख से कहीं ज्यादा हो सकती है. उन्होंने कहा कि कुछ छात्रों ने प्रवेश परीक्षाएं पास कर ली हैं, लेकिन सीबीएसई में जरूरी न्यूनतम अंक नहीं मिलने के कारण उन्हें दाखिले में परेशानी हो रही है. वकील ने मांग की कि छात्रों को शिकायत दर्ज कराने के लिए एक सप्ताह की समय-सीमा फिर से दी जाए.
शिकायत के लिए अतिरिक्त समय देने पर बोले सॉलिसिटर जनरल
इस पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि अभी यह कहना मुश्किल है कि शिकायत की समय-सीमा दोबारा खोली जा सकती है या नहीं. उन्होंने कहा कि सरकार इस मुद्दे पर सोमवार (24 अगस्त) को अपना जवाब हलफनामे के रूप में कोर्ट में दाखिल करेगी. उन्होंने कहा कि सरकार छात्रों के हितों को लेकर गंभीर है और इस मुद्दे पर सरकार से चर्चा के बाद ही अंतिम रुख कोर्ट के सामने रखा जाएगा.
सीजेआई की अध्यक्षता वाली बेंच ने की मामले की सुनवाई
चीफ जस्टिस (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने याचिकाकर्ता से कहा कि वह अपने जवाबी हलफनामे में उन सभी तरह के मामलों का विवरण दें, जिन पर अभी ध्यान देने की जरूरत है. कोर्ट ने उदाहरण देते हुए कहा कि कुछ छात्रों ने समय पर शिकायत की होगी, लेकिन उन्हें जरूरी दस्तावेज नहीं मिल पाए होंगे. वहीं, कुछ छात्र तकनीकी या बुनियादी ढांचे की कमी के कारण समय पर शिकायत दर्ज नहीं करा पाए होंगे.
सुनवाई के अंत में कोर्ट ने केंद्र से सोमवार (24 अगस्त) तक अपना जवाब दाखिल करने को कहा. मामले की अगली सुनवाई मंगलवार (25 अगस्त) को होगी. यह याचिका एक छात्र की ओर से दाखिल की गई है. इसमें सीबीएसई बोर्ड परीक्षाओं में डिजिटल मूल्यांकन के लिए स्पष्ट नियम और दिशा-निर्देश बनाने की मांग की गई है. याचिका में कहा गया कि मूल्यांकन में गड़बड़ी के कारण कई छात्रों को उच्च शिक्षा में दाखिले में परेशानी हो रही है.
पिछली सुनवाई में सॉलिसिटर जनरल ने क्या कहा था?
15 जुलाई को हुई पिछली सुनवाई में सॉलिसिटर जनरल ने बताया था कि मूल्यांकन व्यवस्था में सुधार के लिए पूर्व IAS अधिकारी एस. राधा चौहान की अध्यक्षता में एक सदस्यीय समिति बनाई गई है. समिति को ओएसएम सिस्टम में तकनीकी खामियों के कारण हुई समस्याओं की जांच करने के साथ-साथ सिस्टम की खरीद प्रक्रिया और टेंडर की शर्तों की समीक्षा का भी जिम्मा दिया गया है.
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