Telangana Politics: 'पाताल में विकास', तेलंगाना विधान परिषद में ये क्या हुआ, जानें क्यों मचा हंगामा
Telangana News: तेलंगाना विधान परिषद में बीआरएस के एमएलसी ने सरकार के बजट और किसानों की समस्याओं पर विरोध प्रदर्शन किया और मिर्ची किसानों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाने की मांग की.

BRS Demonstration: तेलंगाना विधान परिषद में बीआरएस (भारत राष्ट्र समिति) के एमएलसी ने राज्य सरकार की ओर से प्रस्तुत बजट के खिलाफ अनोखे तरीके से विरोध प्रदर्शन किया. विरोध के दौरान उन्होंने अपने हाथों में प्लेकार्ड्स पकड़े हुए थे जिन पर “अत्यधिक ऋण, विकास शून्य” और “ऋण आसमान में, विकास पाताल में” जैसे नारों के साथ असंतोष व्यक्त किया. ये विरोध राज्य सरकार की नीतियों और बजट के कार्यान्वयन पर सवाल उठाने के उद्देश्य से किया गया था.
बीआरएस (BRS) एमएलसी ने सरकार से कई सवाल पूछे जिनका जवाब वे मानते हैं कि सरकार को देना चाहिए. उन्होंने 1.58 लाख करोड़ के ऋण लेने के बावजूद महिलाओं को 2,500 रुपये की सहायता, वृद्ध नागरिकों को 4,000 रुपये की पेंशन, छात्राओं को स्कूटी और एक तोला सोना देने के बारे में सवाल उठाए. उनका आरोप है कि इन योजनाओं का सही तरीके से क्रियान्वयन नहीं हुआ है और सरकार इन आंकड़ों के पीछे छुपी असलियत को छिपा रही है. उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि राज्य का विकास दर बहुत कम है जबकि सरकार की ओर से लिया गया ऋण बहुत ज्यादा है.
मिर्ची किसानों के मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन
बीआरएस एमएलसी मिर्ची किसानों की समस्याओं को लेकर भी सरकार से सवाल कर रहे हैं. उन्होंने मिर्ची के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को 25,000 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग की. इस मुद्दे को लेकर उन्होंने मिर्ची की मालाएं पहनकर अपनी विरोध की अनोखी शैली को दर्शाया. उनका कहना है कि मिर्ची किसानों की आर्थिक स्थिति गंभीर है और उन्हें उचित मूल्य मिलना चाहिए ताकि उनकी मुश्किलों को कम किया जा सके.
सरकार से तत्काल समाधान की अपील
बीआरएस एमएलसी ने सरकार से आग्रह किया है कि मिर्ची किसानों की समस्याओं का तुरंत समाधान किया जाए और उन्हें उचित मूल्य पर मिर्ची की खरीदारी की जाए. इसके साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि अगर सरकार किसानों के मुद्दे को नजरअंदाज करती है तो इसका असर राज्य की कृषि नीति और किसानों की आजीविका पर पड़ेगा. उन्होंने राज्य सरकार को चेतावनी दी कि यदि किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो उनका विरोध और तेज हो सकता है.
Source: IOCL
























