बांकीपुर और दतिया कैसे हारी BJP? समझें पार्टी का क्या है एनालिसिस
BJP IT सेल प्रमुख अमित मालवीय ने बांकीपुर और दतिया उपचुनाव के नतीजों का आंकड़ा शेयर करते हुए कहा कि केवल जीत-हार नहीं, बल्कि वोट प्रतिशत और मतदान के आंकड़ों को भी समझना जरूरी है.

भारतीय जनता पार्टी (BJP) को मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट और बिहार के बांकीपुर विधानसभा सीट के उपचुनाव में हार का सामना करना पड़ा. इसमें से बांकीपुर सीट पर जनसुराज के प्रशांत किशोर के हाथों मिली हार BJP के लिए करारा झटका साबित हुई है, क्योंकि इस सीट पर BJP बीते 1995 से नहीं हारी थी. इसके अलावा ये सीट पूर्व में BJP राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के पास थी. मौजूदा उपचुनाव में मिली हार BJP के लिए काफी बड़ा आघात है. इस हार के बाद BJP के IT हेड अमित मालवीय ने कुछ फैक्ट एक्स पर शेयर किए हैं, जिसकी मदद से उन्होंने चुनावी गणित को समझाने की कोशिश की है.
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कुछ आंकड़े साझा करते हुए कहा कि चुनावी नतीजों को केवल जीत और हार के नजरिए से नहीं देखना चाहिए, बल्कि वोट प्रतिशत और मतदान के आंकड़ों को भी समझना जरूरी है. बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट के उपचुनाव में जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने जीत दर्ज की. इस नतीजे पर अमित मालवीय ने कहा कि 2025 के विधानसभा चुनाव में इस सीट पर 41.1 प्रतिशत मतदान हुआ था. उस चुनाव में BJP को 63.25 प्रतिशत वोट मिले थे, जबकि आरजेडी को 29.83 प्रतिशत वोट मिले थे. 2026 के उपचुनाव में मतदान घटकर 33.3 प्रतिशत रह गया, यानी लगभग 8 प्रतिशत कम लोगों ने वोट डाला. इस चुनाव में BJP को 34.4 प्रतिशत वोट मिले, आरजेडी को 10.95 प्रतिशत वोट मिले और जन सुराज पार्टी को 49.23 प्रतिशत वोट मिले.
The Bankipur bypoll tells a more nuanced story than the headline suggests.
— Amit Malviya (@amitmalviya) August 3, 2026
In the 2025 Assembly election:
• Turnout: 41.1%
• BJP: 63.25%
• RJD: 29.83%
In the 2026 bypoll:
• Turnout: 33.3% (down by nearly 8 percentage points)
• BJP: 34.4%
• RJD: 10.95%
• Jan Suraaj:…
The Datia bypoll was always going to be a tough contest. It was a Congress-held seat, and while the BJP fell short, the verdict deserves a closer look.
— Amit Malviya (@amitmalviya) August 3, 2026
Compared to the 2023 Assembly election:
• Congress’ vote share has fallen by over 8 percentage points, from 50.8% to 42.39%.…
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मतदान में आई कमी का असर सभी दलों पर
अमित मालवीय का कहना है कि मतदान में आई कमी का असर सभी दलों पर पड़ा, लेकिन यह देखना ज्यादा जरूरी है कि किस पार्टी का वोट आधार सबसे ज्यादा कमजोर हुआ. उनके अनुसार, BJP अपने पुराने वोट शेयर का 54 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा बचाने में सफल रही, जबकि RJD अपने पुराने वोट शेयर का केवल 37 प्रतिशत ही बचा पाई. उन्होंने दावा किया कि BJP के वोट शेयर में 45.6 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि RJD के वोट शेयर में 63.3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई. मालवीय ने कहा कि इससे यह संकेत मिलता है कि RJD का बड़ा वोट बैंक जन सुराज पार्टी की ओर चला गया. उन्होंने यह भी कहा कि तेजस्वी यादव के चुनाव प्रचार से दूर रहने का असर भी चुनावी नतीजों पर पड़ा हो सकता है.
BJP के लिए रिजल्ट एक मैसेज
अमित मालवीय ने माना कि BJP के लिए भी यह रिजल्ट एक मैसेज है. उनके अनुसार, कम मतदान होने की वजह से BJP के कई समर्थक मतदान केंद्र तक नहीं पहुंचे. उन्होंने कहा कि पार्टी इस नतीजे से सीख लेगी, संगठन को और मजबूत करेगी, कार्यकर्ताओं और मतदाताओं तक ज्यादा प्रभावी तरीके से पहुंचेगी और जनता से किए गए वादों को पूरा करने के लिए काम करेगी. मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट के उपचुनाव पर भी अमित मालवीय ने रिएक्शन दिया. इस सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार घनश्याम सिंह ने BJP उम्मीदवार आशुतोष तिवारी को हराकर जीत हासिल की. मालवीय ने कहा कि दतिया सीट पहले से कांग्रेस के पास थी और यह चुनाव BJP के लिए चुनौतीपूर्ण था.
दतिया विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को मिले वोट
अमित मालवीय ने कहा कि 2023 के दतिया विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को 50.8 प्रतिशत वोट मिले थे, लेकिन उपचुनाव में उसका वोट शेयर घटकर 42.39 फीसदी रह गया. यानी कांग्रेस के वोट फीसदी में 8 फीसद से अधिक की गिरावट आई है. मालवीय के अनुसार, इसे कांग्रेस के पक्ष में बड़ा जनादेश नहीं माना जा सकता. उन्होंने यह भी कहा कि 2023 में कांग्रेस की जीत का अंतर 4.5 फीसदी था, जो उपचुनाव में घटकर 3.82 फीसदी रह गया. इसी तरह वोटों का अंतर भी 2023 में 7,155 था, जो अब घटकर 6,016 रह गया है. इसके अलावा मतदान भी पिछले चुनाव की तुलना में लगभग 8 फीसदी कम हुआ. आखिर में उन्होंने यह भी कहा कि बांकीपुर और दतिया दोनों चुनावों के नतीजों के बाद किसी ने EVM पर सवाल नहीं उठाए, जो अपने आप में एक जरूरी बात है.
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