सालों की सेवा के बाद भी...' कर्नाटक कैबिनेट से बाहर होने पर निराश हुए दिनेश गुंडु राव
Karnataka Cabinet: कर्नाटक में कैबिनेट विस्तार में बाहर होने के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक दिनेश गुंडू राव निराश हो गए हैं. उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर करके अपनी नाराजगी जताई है.

कर्नाटक में कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक दिनेश गुंडू राव ने मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के नेतृत्व वाले मंत्रिमंडल में शामिल न किए जाने पर निराशा जताई है. पार्टी के ब्राह्मण चेहरे, राव ने पूर्ववर्ती सिद्धरमैया सरकार में स्वास्थ्य मंत्री के तौर पर काम किया था.
जताई नाराजगी
राव ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा- 'अपने पूरे राजनीतिक कार्यकाल में कर्नाटक के लोगों की विधायक और मंत्री के तौर पर सेवा करने का मौका मिलने के लिए मैं बहुत आभारी रहा हूं. जिन पहलों पर मैंने काम किया है और जिनमें मेरा पूरा भरोसा है, उनसे जमीनी स्तर पर बदलाव आया है. छह बार विधायक बनना केवल इसलिए मुमकिन हो पाया है क्योंकि लोगों ने मुझ पर भरोसा बनाए रखा और यह भरोसा मेरे लिए सबसे अधिक मायने रखता है.' उन्होंने आगे कहा- यह निराशाजनक है कि राज्य और पार्टी की इतने सालों की सेवा के बाद भी मुझे इस मंत्रिमंडल में सरकार की सेवा करने का मौका नहीं दिया गया. मुझे इस बात से निराशा है कि मुझे बाहर रखा गया और कोई कारण भी नहीं बताया गया.'
ನನ್ನ ರಾಜಕೀಯ ಜೀವನದುದ್ದಕ್ಕೂ ಕರ್ನಾಟಕದ ಜನರ ಸೇವೆ ಮಾಡುವ ಅವಕಾಶ ದೊರೆತಿರುವುದಕ್ಕೆ ನಾನು ಅತ್ಯಂತ ಕೃತಜ್ಞನಾಗಿದ್ದೇನೆ. ಶಾಸಕನಾಗಿ ಹಾಗೂ ಸಚಿವನಾಗಿ ಕಾರ್ಯನಿರ್ವಹಿಸುತ್ತಾ, ಜನರಜೀವನದಲ್ಲಿ ಬದಲಾವಣೆ ತರಬಹುದಾದ ಹಲವಾರು ಯೋಜನೆಗಳನ್ನು ಜಾರಿಗೆ ತಂದಿದ್ದೇನೆ.
— Dinesh Gundu Rao/ದಿನೇಶ್ ಗುಂಡೂರಾವ್ (@dineshgrao) August 3, 2026
ಆರು ಬಾರಿ ಶಾಸಕನಾಗಿ ಆಯ್ಕೆಯಾಗಿರುವುದು ಜನರು ನನ್ನ ಮೇಲೆ ನಿರಂತರವಾಗಿ ತೋರಿದ…
कर्नाटक में मुख्यमंत्री सहित केवल 34 मंत्री पद है. सोमवार को हुए विस्तार के बाद, मंत्रिमंडल में एक और मंत्री को शामिल किया जा सकता है.
दिनेश की पत्नी का फूटा गुस्सा
सोशल मीडिया पोस्ट में दिनेश गुंडू राव की पत्नी ने लिखा- 'हमारे कुछ मित्र, अधिकारी, डॉक्टर और सबसे महत्वपूर्ण हमारे निर्वाचन क्षेत्र के लोग पूछ रहे हैं कि दिनेश गुंडू राव को मंत्रिमंडल में क्यों नहीं शामिल किया गया. वे एक कर्मठ मंत्री रहे हैं, जिन्होंने स्वास्थ्य विभाग में बड़े स्तर पर बदलाव किए, पार्टी के सबसे बुरे दौर में भी वफादार रहे और छह बार विधायक रह चुके हैं. वे उन गिने-चुने लोगों में से एक हैं, जिन्होंने पार्टी के काम को निष्ठापूर्वक निभाया! तो फिर उन्हें क्यों दरकिनार कर दिया गया? मेरा संक्षिप्त उत्तर है, मैं भी उतना ही हैरान हूं जितना आप. मनमर्जी से लोगों की बलि दी जाती है! आखिरकार बात जाति पर आकर रुक जाती है, काम पर नहीं! अफसोस!'
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