Exclusive: PM मोदी के किन कामों के कायल हैं अभिषेक मनु सिंघवी? खुद बताया
कांग्रेस राज्यसभा सांसद अभिषेक मनु सिंघवी ने एबीपी न्यूज से एक इंटरव्यू में चर्चा के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी के कामों को लेकर तारीफ की है. साथ ही उन्होंने कई मुद्दों पर अपनी राय भी रखी है.

कांग्रेस के राज्यसभा सांसद और देश के मशहूर वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने एबीपी न्यूज पर चर्चा विथ चित्रा (Charcha With Chitra) पर चर्चा करते हुए देश के तमाम मुद्दों पर बात की. इस दौरान उन्होंने एसआईआर, चुनाव आयोग और ईवीएम, सीबीआई को लेकर अपनी बात रखी, साथ ही उन्होंने पीएम मोदी को लेकर भी अपनी राय रखी.
उन्होंने पीएम मोदी के कामों को लेकर कहा, 'उन्होंने बहुत अच्छे काम किए हैं. बहुत सशक्त वक्ता हैं. रोड पर अच्छा काम हुआ है. लेकिन साथ- साथ यह भी है कि उन्होंने देश में एक भय का वातावरण भी पैदा किया है. किस प्रकार से हर संस्थान को नष्ट किया. ब्यूरोक्रेसी, चुनाव आयोग कहां स्वतंत्र है. न्यायपालिका में भी भय डालने की कोशिश की गई है.'
#WATCH | 'मोदी सरकार में रोड पर बहुत अच्छा काम हुआ है'- अभिषेक मनु सिंघवी@chitraaum | @DrAMSinghvi https://t.co/SMm0dUypVm#CharchaWithChitra #ChitraTripathiOnABP #AbhishekSinghvi #Congress #ABPNews pic.twitter.com/iUbe68hWr9
— ABP News (@ABPNews) September 5, 2026
EVM, चुनाव आयोग और वोटर लिस्ट पर क्या बोले ?
इसके अलावा सिंघवी ने चुनाव आयोग और ईवीएम पर अपनी राय रखते हुए कहा कि ईवीएम को लेकर जो चुनाव प्रक्रिया में गिरावट हुई, और जो उच्चतम संस्थान में गिरावट हुई है, वो पिछले पंद्रह सालों में कभी नहीं हुई. मैं बहुत स्पष्ट कहना चाहता हूं. निश्चित रूप से जो अनेकों अनेकों उदाहरण देखें, कर्नाटक से लेकर महाराष्ट्र तक, दाल में कुछ काला नहीं है, दाल ही असल में काली हो रही है, कई बार. अब यह बात कि चुनाव क्यों जीत जाते हो, तो चुनाव तब जीततें हैं, जब चुनाव आयोग में हमें जीतने की अनुमति देता है.
उन्होंने कहा, 'जहां पूरी तरह से निर्णित हो जाता है, तो कई बार शंका और प्रश्नचिन्ह उठाने वाली चीजें हुई हैं. बार बार हुई हैं. आप यह सोचिए कि अगर 13 करोड़ लोगों के नाम हट गए हैं, तो जो वोटिंग आबादी कितनी होती होगी, तो जो आपने 13 करोड़ लोग हटा दिए, क्या वो चुनाव को प्रभावित करने का एक तरीका नहीं है? जो महाराष्ट्र में हुआ डिलिशन या एडिशन में, वो गलत नहीं है? मैं यह नहीं कह रहा कि हर चुनाव में होता है, लेकिन जहां फैसला कर लिया जाता है कि यहां जीतना है, वहां बहुत बड़ा संदेह होता है. यह कह रहा हूं.'
सिंघवी ने कहा कि चुनाव के दौरान सत्तारुढ़ पार्टी जहां किसी भी रूप से जीतने का मन बना लेती है, तो वहां साम दाम दंड भेद का प्रयोग किया जाता है. और उसका परिणाम और विश्वसनीय उत्तर नहीं मिला है. कि क्यों ऐसे परिणाम हुए. जो हमने देखे, असेंबली, संसद और अन्य राज्यों में. प्रमाण देने का अवसर भी नहीं दिया जाता है.






















