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अयोध्या पर आज सुप्रीम फैसला: जानें 10 ऐसे नाम जो ना पक्ष में ना विपक्ष में लेकिन फिर भी अहम

अयोध्या पर फैसले से पहले उत्तर प्रदेश को पूरी तरह छावनी में तब्दील कर दिया गया है. हर जिले में भारी पुलिस फोर्स तैनात है. केंद्र ने उत्तर प्रदेश की मदद के लिए चार हजार अर्धसैनिक बल भेजे हैं. उत्तर प्रदेश में तत्काल प्रभाव से धारा 144 लागू कर दी गई है.

नई दिल्ली: अयोध्या पर आज सुबह साढ़े दस बजे आने वाले फैसले के चलते देशभर में अलर्ट है. 40 दिन चली सुनवाई के बाद चीफ जस्टिस समेत पांच जजों ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से शांति बनाए रखने की अपील की है. गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार के अपने सारे कार्यक्रम रद्द कर दिए हैं. यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने भी आज अपने सभी कार्यक्रम रद्द कर दिए हैं.

अयोध्या पर आने वाले फैसले पर पूरी दुनिया की नजरें लगी हुई हैं, फैसला ना सिर्फ दक्षिण एशिया बल्कि वैश्विक स्तर पर भी असर डालेगा. अयोध्या के पूरे मामले पर नजर डालें तो इसमें कई किरदार शामिल हैं लेकिन इसके इतिहास पर नजर डालें तो 10 नाम ऐसे हैं जिनकी इस पूरे मामले में विशेष भूमिका रही है.

इममें देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू से लेकर मुलायम सिंह यादव और लाल कृष्ण आडवाणी का नाम शामिल है. हम आपको ऐसे ही 10 नाम और अयोध्या मामले में उनकी भूमिका बता रहे हैं.

1. पंडित जवाहर लाल नेहरू: मस्जिद में 23 दिसंबर 1949 को भगवान राम की मूर्तियां मिलने से तनाव फैल गया. देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने उस वक्त के मुख्यमंत्री जीबी पंत से मामले को सख्ती से देखने के लिए कहा. सरकार से मूर्तियों को हटाने का आदेश दिया गया लेकिन अयोध्या के उस वक्त के जिलाधिकारी ने आदेश का पालन करने से मना कर दिया. जिलाधिकारी को अंदेशा था कि ऐसा करने से दंगा भड़क सकता है. प्रधानमंत्री नेहरू अयोध्या का दौरा करना चाहते थे लेकिन डीएम ने सुरक्षा कारणों के चलते उन्हें अनुमति नहीं दी.

2. रामचंद्र परमहंस: रामचंद्र परमहंस वही शख्स हैं जो अयोध्या मामले को कोर्ट की दहलीज पर लेकर गए. 5 दिसंबर 1950 को रामचंद्र परमहंस ने विवादित स्थल पर पूजा करने के लिए जिला अदालत में मुकदमा किया. बाद में परमहंस रामजन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष भी बने. रामचंद्र परमहंस मामले को कोर्ट में ले जाने से काफी पहले ही आंदोलन से जुड़ गए थे. परमहंस का महत्व इस बात से ही समझा जा सकता है कि 31 जुलाई 2003 को अयोध्या में जब इनका निधन हुआ तो तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी उनके अंतिम संस्कार में पहुंचे थे.

3. हाशिम अंसारी: हाशिम अंसारी अयोध्या मामले के पहले गवाह हैं, जनवरी 1949 में जब मूर्तियां रखे जाने की घटना अयोध्या कोतवाली में दर्ज करवाई गई तब सबसे पहले गवाह हाशिम अंसारी ही सामने आए थे. अंसारी और हाजी फेंकू समेत 9 मुसलमानों ने मालिकाना हक के लिए दिसंबर 1961 में दूसरा केस फैजाबाद के सिविल कोर्ट में दायर किया. 20 जुलाई 2016 को हाशिम अंसारी का निधन हो गया, उनके निधन के बाद से इस मामले में उनके बेटे इकबाल अंसारी मुख्य पक्षकार हैं.

4. अशोक सिंघल: विश्व हिंदू परिषद ने अप्रैल 1984 में अयोध्या में धर्म संसद का आयोजन किया, इसके मुख्य अगुआ अशोक सिंघल रहे. इस धर्म संसद से ही अयोध्या में राम मंदिर के लिए आंदोलन की नींव पड़ी. अशोक सिंघल का नाम 6 दिसंबर 1992 के बाबरी विध्वंस मामले में भी मुख्य रूप से लिया जाता है. इस मामले में सीबीआई ने जो आरोपपत्र दायर किया उसमें लिखा कि अशोक सिंघल मंच से कारसेवकों को भड़का रहे थे. अशोक सिंघल का निधन 17 नवंबर 2015 को हुआ.

5. राजीव गांधी: अयोध्या मामले में राजीव गांधी का नाम ऐसा है जिसे लेकर अक्सर कई तरह के सवाल उठते रहे हैं. पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने साल 1985 में विवादित बाबरी मस्जिद परिसर का ताला खोलने के आदेश दिए. शाहबानो केस पर फैसले के बाद राजीव गांधी अपनी छवि को लेकर बेहद चिंतित थे. वह नहीं चाहते थे कि समाज में संदेश जाए कि वे हिंदू विरोधी हैं. बोफोर्स घोटाला भी सरकार की मुश्किलें बढ़ा रहा था. चुनावी साल को देखते हुए राजीव गांधी ने ताला खोलने का आदेश दिया.

6. मुलायम सिंह यादव: समाजवादी पार्टी के मुखिया रहे मुलायम सिंह यादव का भी अयोध्या मामले में बेहद अहम किरदार है. दरअसल, साल 1990 में राम जन्मभूमि आंदोलन तेज हुआ. अयोध्या में सुरक्षा की दृष्टि से कर्फ्यू लगाया गया था. 30 अक्टूबर 1990 को कारसेवकों पर गोली चली, इसमें पांच लोग मारे गए. इस गोलीबारी से कारसेवक बेहद नाराज थे. नाराज कारसेवक 2 नवंबर 1990 को हनुमान गढ़ी के पास पहुंच गए. यहां पुलिस ने कारसेवकों पर गोली चलाई.

7. लाल कृष्ण आडवाणी: रामजन्मभूमि आंदोलन में पूर्व उप प्रधानमंत्री और दिग्गज बीजेपी नेता लाल कृष्ण आडवाणी का नाम किरदार भी बेहद अहम है. उनकी चर्चा के बिना इस कहानी को कहा ही नहीं जा सकता. साल 1990 में लाल कृष्ण आडवाणी ने गुजरात के सोमनाथ मंदिर से अयोध्या के लिए रथयात्रा की शुरुआत की. इसी रथयात्रा का असर 6 दिसंबर 1992 को भी नजर आया. अशोक सिंघल के साथ ही लाल कृष्ण आडवाणी को भी केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई ने मुख्य सूत्रधार माना.

8. कल्याण सिंह: 6 दिसंबर, 1992 को जब अयोध्या में विवादित ढांचा गिराने की घटना हुई उस वक्त प्रदेश की कमान कल्याण सिंह के हाथों में ही थी. सीबीआई ने अपनी चार्जशीट में कुल 13 आरोपियों को शामिल किया, जिसमें कल्याण सिंह भी थे. कल्याण सिंह पर आरोप लगा कि उन्होंने मुख्यमंत्री रहते हुए अन्य नेताओं के साथ अयोध्या पहुंचकर राम मंदिर बनाने की शपथ ली. विवादित ढांचा गिरने के साथ ही कल्याण सिंह ने इस्तीफा दे दिया, सात दिसंबर 1992 को प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव ने सरकार को बर्खास्त कर दिया. सरकार गिरने के बाद कल्याण सिंह ने कहा कि बाबरी का विध्वंस भगवान की मर्जी थी. मुझे इसका कोई मलाल नहीं है.

9. नरसिम्हा राव: अयोध्या विवाद में पूर्व प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव की भी अहम भूमिका है. दरअसल 6 दिसंबर, 1992 को जब बाबरी का ढांचा गिराया गया तब नरसिम्हा राव ही देश के प्रधानमंत्री थे. जिस वक्त अयोध्या में ये घटना हो रही थी राव अपने निवास पर पूजा में बैठे थे. तत्कालीन केंद्रीय गृह सचिव रहे माधव गोडबोले ने हाल ही में कहा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिंह राव ने इस घटना से पहले गृह मंत्रालय द्वारा तैयार योजना खारिज नहीं की होती, तो मस्जिद को ढहने से बचाया जा सकता था.

10. महंत नृत्य गोपाल दास: महंत नृत्य गोपाल दास को रामचंद्र दास परमहंस के निधन के बाद रामजन्मभूमि न्यास की कमान सौंपी गई. नृत्य गोपाल दास को राम मंदिर की सबसे बुलंद आवाज में गिना जाता है. उनकी गिनती मंदिर आन्दोलन के प्रमुख संतों में होती है. फैसले से पहले महंत नृत्य गोपाल दास ने कहा कि अयोध्या से पूरी दुनिया में प्रेम और सौहृार्द का संदेश जाना चाहिए.

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