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Explained: 53वें चीफ जस्टिस बने सूर्यकांत, SPG प्रोटेक्शन, 40 लोगों का स्टाफ, 10 एकड़ का बंगला, कैसी होती है CJI की लाइफस्टाइल?

ABP Explainer: 35-40 स्टाफ, माली, नौकर 10 एकड़ का आलीशान बंगला, स्विमिंग पूल, बगीचा और 24 घंटे SPG सिक्योरिटी. यह हर दूसरे भारतीयों का ख्वाब होगा. यह सब भारत के CJI को मिलता है, लेकिन किस कीमत पर?

आज यानी 24 नवंबर को भारत को 53वें मुख्य न्यायाधीश (CJI) मिले. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने जस्टिस सूर्यकांत को CJI के पद की शपथ दिलाई. राष्ट्रपति भवन में हुए समारोह में 7 देशों के चीफ जस्टिस और सुप्रीम कोर्ट के जजों ने शिरकत की, क्योंकि CJI का पद और इसपर बैठने वाला शख्स कोई आम इंसान नहीं रहता है. इसका एक उदाहरण 51वें CJI संजीव खन्ना थे, जो रोजाना कई किलोमीटर मॉर्निंग वॉक करते थे, लेकिन उन्हें इसे छोड़ना पड़ा, वजह- भारत का CJI होना. ABP एक्सप्लेनर में समझते हैं कि CJI बनते कैसे हैं, तनख्वाह कितनी मिलती है और जस्टिस सूर्यकांत कौन हैं...

सवाल 1- भारत के 53वें CJI सूर्यकांत कौन हैं?
जवाब- 10 फरवरी 1962 को हरियाणा के हिसार में जन्में जस्टिस सूर्यकांत ने 1984 में हिसार की जिला अदालत से अपने कानूनी करियर की शुरुआत की थी. 1985 में चंडीगढ़ में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट से प्रैक्टिस पूरी की.

  • 2000 में हरियाणा के सबसे युवा एडवोकेट जनरल बने.
  • 2001 में सीनियर एडवोकेट बन गए.
  • 2004 में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के जज बने.
  • 2018 में हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस चुने गए.
  • 2019 में सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया के जज बन गए.
  • 2024 में सुप्रीम कोर्ट लीगल सर्विसेज कमेटी के चेयरमैन बने.

CJI सूर्यकांत का पूरा परिवार हिसार के पेटवाड़ गांव में रहता है. उनके बड़े भाई मास्टर ऋषिकांत गांव में परिवार के साथ रहते हैं, जबकि एक भाई हिसार शहर में और तीसरा भाई दिल्ली में रहता है. CJI सूर्यकांत की पत्नि सविता सूर्यकांत हैं और वह कॉलेज में प्रिंसिपल के पद से रिटायर हुई हैं. उनकी 2 बेटियां मुग्धा और कनुप्रिया हैं, जो पढ़ाई कर रही हैं.

CJI सूर्यकांत अपने कार्यकाल में संवैधानिक, मानवाधिकार और प्रशासनिक कानून से जुड़े मामलों को कवर करने वाले 1000 से ज्यादा फैसलों में शामिल रहे...

  • पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट की फुल बेंच का हिस्सा थे जिसने 2017 में बलात्कार के मामलों में डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को लेकर जेल में हुई हिंसा के बाद डेरा सच्चा सौदा को पूरी तरह से साफ करने का आदेश दिया था.
  • जस्टिस सूर्यकांत उस बेंच का हिस्सा थे जिसने कॉलोनियल एरा के राजद्रोह कानून को स्थगित रखा था. साथ ही निर्देश दिया था कि सरकार की समीक्षा तक इसके तहत कोई नई FIR दर्ज न की जाए.
  • सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन समेत समस्त बार एसोसिएशनों में एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित किए जाने का निर्देश देने का श्रेय भी जस्टिस सूर्यकांत को दिया जाता है.
  • जस्टिस सूर्यकांत सात जजों की बेंच में शामिल थे जिसने 1967 के अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के फैसले को खारिज कर दिया था. यूनिवर्सिटी के संस्थान के अल्पसंख्यक दर्जे पर पुनर्विचार का रास्ता खुल गया था.
  • वह पेगासस स्पाइवेयर मामले की सुनवाई करने वाली बेंच का हिस्सा थे, जिसने गैरकानूनी निगरानी के आरोपों की जांच के लिए साइबर एक्सपर्ट का एक पैनल बनाया था. उन्होंने यह भी कहा था कि राष्ट्रीय सुरक्षा की आड़ में खुली छूट नहीं मिल सकती है.
  • CJI सूर्यकांत ने बिहार में SIR से जुड़े मामले की सुनवाई भी की थी. चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता को रेखांकित करने वाले एक आदेश में उन्होंने चुनाव आयोग को निर्देश दिया था कि बिहार में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन के बाद ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से बाहर किए गए 65 लाख नामों की डीटेल सार्वजनिक की जाए.

CJI सूर्यकांत का कार्यकाल 14 महीने का होगा और वह 9 फरवरी 2027 को रिटायर होंगे.

सवाल 2- CJI चुने कैसे जाते हैं और इसकी प्रोसेस क्या है?
जवाब- हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के जजों को चुनने के लिए एक तय प्रक्रिया है, जिसे सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम कहते हैं...

  • इसमें सुप्रीम कोर्ट के सबसे सीनियर जज शामिल होते हैं. केंद्र इसकी सिफारिशों को स्वीकार करते हुए नए CJI और अन्य जजों की नियुक्ति करता है.
  • परंपरा के तहत सुप्रीम कोर्ट में अनुभव के आधार पर सबसे सीनियर जज ही चीफ जस्टिस बनते हैं.
  • यह प्रक्रिया एक ज्ञापन के तहत होती है, जिसे MoP यानी 'मेमोरेंडम ऑफ प्रोसीजर फॉर द अपॉइंटमेंट ऑफ सुप्रीम कोर्ट जजेज' कहते हैं.
  • 1999 में पहली बार MoP तैयार हुआ. यही डॉक्यूमेंट, जजों के अपॉइंटमेंट की प्रक्रिया में केंद्र, सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के दायित्व तय करता है.
  • MoP और कॉलेजियम के सिस्टम को लेकर संविधान में कोई अनिवार्यता या कानून नहीं बनाया गया है, लेकिन इसी के तहत जजों की नियुक्ति होती आ रही है.
  • 1999 में MoP तैयार होने के पहले से ही CJI के बाद सबसे सीनियर जज को पदोन्नत कर CJI बनाने की परंपरा है.
  • 2015 में संविधान में एक संशोधन करके राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (NJAC) बनाया गया था, यह जजों की नियुक्ति में केंद्र की भूमिका बढ़ाने वाला काम था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसे असंवैधानिक करार दे दिया. इसके बाद MoP पर बातचीत जारी रही.

सवाल 3- क्या कभी परंपरा से हटकर भी CJI चुने गए हैं?
जवाब- सबसे सीनियर जज को CJI बनाने की परंपरा 2 बार टूटी है. तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 2 मौकों पर परंपरा के खिलाफ जाकर बतौर CJI, सबसे सीनियर जज के बजाय दूसरे जजों की नियुक्ति की...

  • जस्टिस ए एन रे: 1973 में इंदिरा ने जस्टिस ए एन रे को CJI बनाया, जबकि उनसे भी सीनियर तीन जज- जेएम शेलत, केएस हेगड़े और एएन ग्रोवर को दरकिनार किया गया. जस्टिस रे को इंदिरा सरकार की पसंद का जज माना जाता था. केशवानंद भारती मामले में आदेश आने के एक दिन बाद ही जस्टिस रे को CJI बना दिया गया था. 13 जजों की बेंच ने 7:6 के बहुमत से यह फैसला सुनाया था, जस्टिस रे अल्पमत वाले जजों में शामिल थे.
  • जस्टिस एमएच बेग: जनवरी 1977 में इंदिरा ने एक बार फिर परंपरा तोड़ी. उन्होंने सबसे सीनियर जज जस्टिस हंसराज खन्ना की जगह जस्टिस एमएच बेग को CJI बनाया था. इमरजेंसी के दौरान ADM जबलपुर केस (1976) में जस्टिस खन्ना ने अकेले असहमति जताते हुए कहा था कि इमरजेंसी में भी नागरिकों का मौलिक अधिकार निलंबित नहीं हो सकता है. इसके बदले में सरकार ने उन्हें 'सुपरसीड' कर दिया.

सवाल 4- CJI बनने के बाद एक जस्टिस की लाइफ कैसे बदल जाती है?
जवाब- CJI बनने के बाद सबसे पहले जो बदलता है, वह है उस इंसान का 'रुतबा'. एक सामान्य सुप्रीम कोर्ट जज भारत के प्रोटोकॉल चार्ट में 21वें नंबर पर होता है. CJI बनते ही वह सीधे नंबर-6 पर पहुंच जाता है यानी राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल और पूर्व राष्ट्रपति के ठीक बाद. पूरा देश यह मान लेता है कि यह व्यक्ति अब भारत का सबसे ताकतवर जज ही नहीं, बल्कि संवैधानिक व्यवस्था का दूसरा सबसे ऊंचा स्तंभ है...

  • सिक्योरिटी लेवल अचानक राष्ट्रपति-प्रधानमंत्री वाले स्तर का हो जाता है. Z+ से सीधे स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप (SPG) प्रोटेक्शन मिलता है. घर के बाहर हमेशा 8-10 गाड़ियों का काफिला, पुलिस पायलट और कमांडो तैनात होते हैं. अब आप अकेले बाजार भी नहीं जा सकते, कॉफी शॉप में दोस्तों से मिलना नामुमकिन होता है.
  • दिल्ली के साधारण बंगले से आप 5, कृष्ण मेनन मार्ग के उस आलीशान बंगले में चले जाते हैं जो करीब 10 एकड़ में फैला है. स्विमिंग पूल, टेनिस कोर्ट, बगीचा और गेस्ट हाउस सबकुछ है. घर में 35-40 स्टाफ हो जाते हैं, आर्मी का ADC, कई सेक्रेटरी, कुक, माली और ड्राइवर भी.
  • अब आपका हर शब्द हेडलाइन बनता है. एक बार पूर्व CJI डीवाई चंद्रचूड़ ने अपने भाषण में मजाक में कहा था, 'मेरी पत्नी मुझसे कहती हैं कि घर में भी जजमेंट की भाषा में बात मत करो.' लोग हंसे, लेकिन अगले दिन सारी अखबारों में सुर्खियां थीं. आपका बेटा-बेटी भी अब सामान्य जीवन नहीं जी सकता है. दोस्त दूरी बना लेते हैं, क्योंकि हर बात 'CJI साहब ने कहा' बन जाती है.

सवाल 5- भारत के CJI की सैलरी और कार्यकाल कितना होता है?
जवाब- CJI की सैलरी सुप्रीम कोर्ट जजेस (सैलरी एंड कंडीशंस ऑफ सर्विस) एक्ट, 1958 के तहत तय होती है, जिसे 2018 में संशोधित किया गया था. यह संशोधन 7वें वेतन आयोग की सिफारिशों पर आधारित था और 1 जनवरी 2016 से प्रभावी है. 2025 तक कोई बड़ा संशोधन नहीं हुआ है.

  • मंथली बेसिक पे 2.50 लाख रुपए.
  • टोटल मंथली सैलरी 2.80 लाख रुपए.

इसमें डियरनेस अलाउंस (DA), हाउस रेंट अलाउंस (HRA), वार्षिक पेंशन (रिटायरमेंट के बाद, ग्रेच्युटी और अन्य भत्ते शामिल हैं.

ये राशियां कंसोलिडेटेड फंड ऑफ इंडिया से सीधे भुगतान होती हैं, यानी संसद की मंजूरी के बिना नहीं रोकी जा सकती हैं. टैक्स के बाद नेट सैलरी करीब 2 लाख से 2.20 लाख रुपए तक हो सकती है. सैलजी जजों की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए बिना राजनीतिक हस्तक्षेप के तय की जाती है.

वहीं, CJI का कार्यकाल भारतीय संविधान के अनुच्छेद 124(2) के तहत तय होता है. सुप्रीम कोर्ट के जज, CJI के रूप में नियुक्ति के बाद 65 वर्ष की उम्र तक पद पर बने रहते हैं. सुप्रीम कोर्ट के जजों की रिटायरमेंट उम्र भी 65 साल है.

भारत के इतिहास में सबसे लंबा कार्यकाल जस्टिस वाई. वी. चंद्रचूड़ का रहा है, वह 7 सालों (1978 से 1985) CJI रहे थे. सबसे छोटा कार्यकाल जस्टिस के. एन. सिंह का है. वह 1991 में महज 17 दिन के लिए CJI बने थे.

ज़ाहिद अहमद इस वक्त ABP न्यूज़ में बतौर सीनियर कॉपी एडिटर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. टेलीविजन और डिजिटल जर्नलिज्म की दुनिया में उन्हें करीब 9 साल का तजुर्बा है. इससे पहले वे 3 बड़े मीडिया संस्थानों में भी अहम जिम्मेदारियां निभा चुके हैं. वे ओरिजिनल सेक्शन की एक्सप्लेनर टीम में सीनियर सब एडिटर रहे. ज़ाहिद आउटपुट डेस्क, बुलेटिन प्रोड्यूसिंग और बॉलीवुड सेक्शन को बतौर असिस्टेंट प्रोड्यूसर लीड भी कर चुके हैं. देश-विदेश, सियासत, कारोबार, एजुकेशन, एंटरटेनमेंट, चुनाव और समाजी मुद्दों पर उनकी गहरी पकड़ है. आसान लहजे में असरदार और भरोसेमंद एक्सप्लेनर पेश करना उनकी पहचान है.

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