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Explained: क्या है व्हाइट कॉलर मॉड्यूल? अब फिदायीन डॉक्टरों से खौफ! दिल्ली धमाके की पूरी कहानी समझिए

ABP Explainer: दिल्ली ब्लास्ट में कार चालक का DNA डॉ. उमर की मां से मैच हो गया. इस हमले के 4 सिनेरियो सामने आ रहे हैं. लेकिन बड़ा खुलासा यह भी हुआ है कि व्हाइट कॉलर मॉड्यूल बड़े हमले की फिराक में था.

दिल्ली में लाल किला के पास जिस i20 कार में ब्लास्ट हुआ था, उसे डॉ. उमर नबी ही चला रहा था. उमर का DNA उसकी मां के DNA से मैच हो गया है. जांच टीमों को कार से उमर के दांत, हड्डियां, खून लगे कपड़े के टुकड़े और पैर का हिस्सा मिला था, जो स्टेयरिंग व्हील और एक्सीलेटर के बीच फंसा था. अब तक इस मामले में कुल 12 आतंकियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जिनमें से 6 आतंकी डॉक्टर हैं. यानी अब भारत में 'व्हाइट कॉलर टेरर' पैर पसार रहा है. इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि कोई सोच भी नहीं सकता कि जान बचाने वाले डॉक्टर ही आतंक के पनाहगार निकलेंगे.

तो आइए ABP एक्सप्लेनर में समझते हैं कि कौन है कार में खुद को उड़ाने वाला डॉ. उमर, दिल्ली धमाके के लिए डॉक्टरों को ही क्यों चुना गया और 'व्हाइट कॉलर टेरर' के पीछे किसका हाथ...

सवाल 1- दिल्ली कार ब्लास्ट में शामिल डॉ. उमर नबी कौन था?
जवाब- डॉ. उमर नबी का जन्म जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले के सम्बूरा गांव में हुआ था. वह एक मेडिकल प्रोफेशनल था. वह2017 में श्रीनगर के गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज (GMC) से MBBS की पढ़ाई पूरी कर के डॉक्टर बना था. उमर का परिवार उसे इंट्रोवर्ट यानी अकेले रहने वाला बताता है, जो ज्यादा दोस्त नहीं रखता था और हमेशा पढ़ाई पर फोकस करता था. उमर के चचेरे भाई वसीम अहंगार ने मीडिया से कहा, 'उमर के बारे में जो बातें हो रही हैं, वो बेहद चौंकाने वाली हैं.'

उमर की पैदाइश 1993 की है. एक बड़ा भाई प्लंबर है और छोटा भाई पढ़ाई कर रहा है. एक बहन भी है, जिसकी शादी हो चुकी है. उमर हरियाणा के फरीदाबाद स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल में सीनिय डॉक्टर या असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में काम कर रहा था. रिपोर्ट्स के मुताबिक, श्रीनगर की एक लड़की से उमर की सगाई हुई थी और कुछ समय बाद शादी होने वाली थी.

सवाल 2- क्या दिल्ली धमाका फिदायीन हमला था या हड़बड़ी में विस्फोट हुआ?
जवाब- 30 अक्टूबर से उमर ने अपने मोबाइल फोन बंद कर दिए और यूनिवर्सिटी में पढ़ाने भी नहीं गया. 8 नवंबर को फरीदाबाद से डॉ. मुजम्मिल और मौलवी के पास 2,900 किलोग्राम अमोनियम नाइट्रेट बरामद हुआ तो उमर डर गया. वहधौज गांव में ही छिप गया. 10 नवंबर को वहकार लेकर दिल्ली आ गया. इसके बाद 10 नवंबर को दिल्ली में कार ब्लास्ट हो गया.

लेकिन अब इसके 4 सिनेरियो हो सकते हैं...

  • सिनेरियो 1- हड़बड़ी में ब्लास्ट हुआ: रिपोर्ट्स के मुताबिक, उमर के बाकी साथी पकड़े गए थे और वहइस मॉड्यूल का लीडर था. एक के बाद एक छापों से वहघबराकर कार को दिल्ली ले आया. कार को छिपाते या ट्रांसपोर्ट करते हुए अनजाने में बम फट गया.
  • सिनेरियो 2- जानबूझकर ब्लास्ट किया: उमर ने साथियों की गिरफ्तार के बाद ब्लास्ट की प्लानिंग की. उसने जल्दबाजी में काम-चलाऊ डेटोनेटर बनाया और जानबूझकर ट्रिगर कर दिया. जैश-ए-मोहम्मद की कट्टरपंथी इसे सपोर्ट करते है.
  • सिनेरियो 3- मैकेनिकल या टेक्निकल फॉल्ट: वायरिंग या केमिकल रिएक्शन होने की वजह से ब्लास्ट हुआ. कार ट्रैफिक में चल रही थी और इसकी कंपन से डेटोनेटर दब गया है. फोरेंसिक टीम ने कहा कि यह हैस्टिली असेंबल्ड डिवाइस था. लेकिन पैनिक फैक्टर इस सिनेरियो को कमजोर करता है.
  • सिनेरियो 4- अन्य आदमी ने विस्फोट के लिए उकसाया: जब उमर दिल्ली पहुंचा, तो उसने लाल किला के पास सुनहरी मस्जिद की पार्किंग में कार लगा दी. यहां 3 घंटे तक कार खड़ी रही. ऐसे में हो सकता है कि उमर से मिलने कोई आया और उसने धमाके के लिए ट्रिगर कर दिया.

हालांकि, इनमें से कोई सिनेरियो सच हो भी सकता है और नहीं भी. इंडियन आर्मी के रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल सतीश दुआ कहते हैं, 'अभी इस बारे में कोई ऑफिशियल जानकारी सामने नहीं आई है और न ही किसी ग्रुप ने इसकी जिम्मेदारी ली है. जब भी फिदायीन हमला होता है, तो कोई संगठन इसकी जिम्मेदारी लेता है.'

पुलिस ने आशंका जताई थी कि दिल्ली धमाके में शामिल आतंकियों के पास एक नहीं, बल्कि दो कारें थीं. बुधवार को फरीदाबाद से दूसरी कार लाल इको स्पोर्ट भी जब्त कर ली गई. इसके अलावा दिल्ली ब्लास्ट में 3 बड़े खुलासे हुए...

  1. जनवरी 2025 में लाल किले की रेकी की थी: गिरफ्तार आरोपियों के मोबाइल डंप डेटा से पता चला कि फरीदाबाद की अल फलाह यूनिवर्सिटी से गिरफ्तार असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. मुजम्मिल गनी और धमाके में कथित रूप से मारे गए डॉ. उमर नबी ने जनवरी में कई बार लाल किले की रेकी की थी. दोनों ने वहां की सुरक्षा-और भीड़ का पैटर्न समझा था. पुलिस को शक है कि आतंकियों की प्लानिंग 26 जनवरी पर लाल किले पर हमले की थी, जो तब नाकाम हो गई.
  2. दिल्ली में 6 दिसंबर को हमले का प्लान था: उमर दिल्ली में 6 दिसंबर को हमला करना चाहता था, लेकिन मुजम्मिल की गिरफ्तारी से प्लान बिगड़ गया. यह बात 8 आरोपियों से पूछताछ में सामने आई. इस अंतरराज्यीय मॉड्यूल का केंद्र फरीदाबाद में था. गिरफ्तार आतंकियों में 6 डॉक्टर हैं. श्रीनगर का रहने वाला एक अन्य संदिग्ध डॉ. निसार फरार है. वह डॉक्टर्स एसोसिएशन ऑफ कश्मीर का अध्यक्ष भी है, जो अल-फलाह में पढ़ा रहा था. जम्मू-कश्मीर सरकार ने डॉ. निसार को बर्खास्त कर दिया है.
  3. खाद की बोरी बता विस्फोटक जुटा रहा था गनी: फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी में काम कर रहा कश्मीरी डॉ. मुजम्मिल गनी खाद की बोरियां बताकर किराए के कमरे में विस्फोटक सामग्री जमा कर रहा था. 20 दिन पहले मुजम्मिल कमरे में कुछ बोरियां रखने आया था, तब पड़ोसियों ने उससे पूछा था कि इसमें क्या है? जवाब में मुजम्मिल ने कहा था कि ये खाद के कट्टे हैं, जिन्हें कश्मीर ले जाना है.

सवाल 3- दिल्ली धमाके के लिए डॉक्टरों को ही क्यों चुना गया?
जवाब- व्हाइट कॉलर मॉड्यूल उच्च शिक्षित व्यक्तियों पर आधारित था, जो अपनी पेशेवर पहचान का फायदा उठाकर फंडिंग, लॉजिस्टिक्स और रेडिकलाइजेशन संभालते थे. मॉड्यूल का उद्देश्य दिल्ली, लखनऊ, अहमदाबाद और मुंबई जैसे बड़े शहरों में हमले करने का प्लान था. दरअसल, कश्मीरी लोगों में डॉक्टर बनना सबसे बड़ा ख्वाब होता है. ऐसे में अगर इन्हीं डॉक्टर्स को मोहरा बनाया जाता है, तो काम कम और आसान हो जाता है. एक्सपर्ट्स के मुताबिक,

  • डॉक्टरों की पेशेवर पहचान उन्हें सम्मानित और संदेह-मुक्त बनाती है. वहअस्पतालों और यूनिवर्सिटीज में काम करते हुए विस्फोटक, हथियार और केमिकल्स आसानी से छिपा सकते थे.
  • डॉक्टरों ने अल-फलाह यूनिवर्सिटी को बेस बनाया, जहां करीब 40% डॉक्टर कश्मीरी हैं.
  • पढ़े-लिखे युवाओं को रेडिकलाइझ करना आसान होता है. कैंपसों को भर्ती हब बनाया जाता है, जहां चैरिटी और राहत कार्य के नाम पर टेलीग्राम पर संपर्क होता है. महिलाओं की विंग 'जमात-उल-मोमिनात' को डॉक्टरों ने स्थापित किया.
  • व्हाइट कॉलर सदस्य बड़े हमलों की योजना बना सकते थे. वहचैरिटेबल फ्रंट्स से फंड रेज करते थे, जो जांच एजेंसियों का ध्यान भटकाता है. इन्हें 'स्लीपर सेल' के रूप में इस्तेमाल किया गया.
  • पहले इंजीनियर्स को टारगेट किया जाता था, लेकिन अब डॉक्टरों को टारगेट करते हैं, क्योंकि वह वैश्विक जिहाद के पैटर्न फॉलो करते हैं. ये बेरोजगार नहीं, बल्कि आइडियोलॉजिकल रूप से मोविवेटेड होते हैं.

इस ब्लास्ट में शामिल 12 आतंकियों में से 6 डॉक्टर हैं, जिनमें डॉ. मुजम्मिल शकील, डॉ. शाहीन शाहिद, डॉ. आदिल अहमद, डॉ. सज्जाद अहमद, डॉ. परवेज अंसारी और डॉ. तजामुल अहमद मलिक जैसे नाम शामिल हैं.

सवाल 4- क्या दिल्ली धमाके के तार जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े?
जवाब- जांच एजेंसियों ने डॉ. उमर और डॉ. मुजम्मिल की डायरियां बरामद की हैं. इनमें 8 से 12 नवंबर की तारीखें दर्ज हैं. इससे पता चला है कि ऐसी घटना की योजना बनाई जा रही थी. डायरी में लगभग 25 लोगों के नाम भी थे, जिनमें से ज्यादातर जम्मू-कश्मीर और फरीदाबाद के रहने वाले थे. ये डायरियां मंगलवार और बुधवार को डॉ. उमर के कमरा नंबर 4 और मुजम्मिल के कमरा नंबर 13 से बरामद की गईं. पुलिस ने मुजम्मिल के कमरे से एक डायरी बरामद की है.

उमर और मुजम्मिल की डायरियों में कोड वर्ड लिखे थे, इन्हें डिकोड किया जा रहा है. एजेंसियां यह भी जांच कर रही हैं कि क्या धमाकों के लिए अलग-अलग गाड़ियां तैयार की जा रही थीं. जांच एजेंसियों ने गुरुवार को बताया कि लगभग 8 संदिग्ध चार लोकेशन विस्फोट करने की तैयारी कर रहे थे. 2-2 लोगों के ग्रुप को एक-एक बड़े शहर में विस्फोट का टारगेट दिया गया था.

उमर और मुजम्मिल की डायरियों के जांचकर्ताओं ने खुलासा किया है कि जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े डॉक्टर टेरर मॉड्यूल के आतंकियों ने 6 दिसंबर को दिल्ली में 6 जगहों पर विस्फोट की प्लानिंग की थी. इन लोगों ने अगस्त में हमले करने की प्लानिंग की थी, लेकिन ऑपरेशन में देरी के बाद एक नई तारीख चुनी गई- 6 दिसंबर, जो बाबरी मस्जिद विध्वंस की बरसी होती है. डॉक्टर आतंकी मॉड्यूल के सदस्यों ने पूछताछ के दौरान बताया है कि उन्होंने सिलसिलेवार विस्फोट करने की अलग-अलग 5 फेज में प्लानिंग की थी.

  1. जैश-गजवत उल हिंद से जुड़ा आतंकी मॉड्यूल बनाना.
  2. विस्फोटक बनाने कच्चा माल खरीदना.
  3. IED बनाना और टारगेट की रेकी करना.
  4. मॉड्यूल के सदस्यों तक विस्फोटक पहुंचाना.
  5. 5 से 6 जगहों पर ब्लास्ट को अंजाम देना.

इससे जाहिर होता है कि यह हमला जैश से जुड़ा है. इसके अलावा 19 अक्टूबर को जम्मू-कश्मीर के नौगांव में डॉ. आदिल ने एक पोस्टर लगाया था, जिसमें जैश-ए-मोहम्मद का नाम था. इस पोस्टर में स्थानीय दुकानदारों को चेतावनी दी गई थी कि वह सेना या किसी सेंट्रल एजेंसी से कोई वास्ता न रखें, न ही कोई डील करें. इस पर सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े हो गए थे.

ज़ाहिद अहमद इस वक्त ABP न्यूज़ में बतौर सीनियर कॉपी एडिटर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. टेलीविजन और डिजिटल जर्नलिज्म की दुनिया में उन्हें 8 साल से ज्यादा का तजुर्बा है. इससे पहले वे 3 बड़े मीडिया संस्थानों में भी अहम जिम्मेदारियां निभा चुके हैं. वे ओरिजिनल सेक्शन की एक्सप्लेनर टीम में सीनियर सब एडिटर रहे. ज़ाहिद आउटपुट डेस्क, बुलेटिन प्रोड्यूसिंग और बॉलीवुड सेक्शन को बतौर असिस्टेंट प्रोड्यूसर लीड भी कर चुके हैं. देश-विदेश, सियासत, कारोबार, एजुकेशन, एंटरटेनमेंट, चुनाव और समाजी मुद्दों पर उनकी गहरी पकड़ है. आसान लहजे में असरदार और भरोसेमंद एक्सप्लेनर पेश करना उनकी पहचान है.

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