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Explained: आज एग फ्रीज करें, प्रेग्नेंसी 5 साल बाद! महिलाओं में क्यों बढ़ रहा एग्ज फ्रीजिंग का ट्रेंड; जानें सबकुछ

ABP Explainer: प्रेग्नेंसी के तरीके तेजी से बदल रहे हैं. अब महिलाएं अपने अंडे निकलवा कर फ्रीज करवाती हैं. फिर कई सालों बाद प्रेग्नेंट होती हैं. लेकिन एग फ्रीजिंग बला क्या है, प्रोसेस और खर्च क्या है?

'मैंने प्यार और पार्टनर के साथ के लिए 27 साल की उम्र में शादी की. ये चुनाव अपनी शर्तों पर था. 29 साल में मैंने एग फ्रीज करवाने का फैसला लिया जो पर्सनल और हेल्थ रीजन्स की वजह से था.'

19 नवंबर को साउथ सुपरस्टार राम चरण की पत्नी उपासना कोनिडेला ने X पर यह ट्वीट किया, जिसके बाद सोशल मीडिया डिबेट शुरू हो गई. दरअसल, मां बनने के लिए कई महिलाओं को अपना प्रोफेशन छोड़ना पड़ता है. वे अपने करियर को दांव पर लगाकर अपनी फैमिली को प्राथमिकता देती हैं. ऐसे में सबसे बड़ी चॉइस बनती है एग फ्रीजिंग. ABP एक्सप्लेनर में समझते हैं कि एग फ्रीज होता क्या है, महिलाएं अपने एग निकलवाती क्यों हैं और यह ट्रेंड कैसे बन रहा है...

सवाल 1- एग फ्रीजिंग क्या होती है और इसकी शुरुआत कब हुई थी?
जवाब- 1986 में पहली बार इस तकनीक का प्रयोग किया गया, जब एक महिला अपने फ्रीज किए हुए एग से प्रेग्नेंट हुई. इसका श्रेय सिंगापुर के डॉक्टर क्रिस्टोफर चेन को जाता है.

1997 में मिस वर्ल्ड बनीं डायना हेडन भी एग फ्रीजिंग प्रोसेस से ही दो बार मां बनीं हैं. 2016 में इन्हें बेटी हुई और 2018 में उन्होंने जुड़वा बच्चों, एक लड़के और लड़की को जन्म दिया.

एग  फ्रीजिंग, जिसे मेडिकल की भाषा में ‘उसाइट क्रायोप्रिजर्वेशन’ (Oocyte cryopreservation) कहते हैं.

  • असल में, ओवरी के अंदर छोटे-छोटे अविकसित एग होते हैं. उन्हें इंजेक्शन देकर विकसित किया जाता है. एग फ्रीजिंग के लिए 12-13 इंजेक्शन दिए जाते हैं.
  • जब एग पूरी तरह विकसित हो जाते हैं तो सर्जरी के जरिए उस एग को निकाला जाता है और उसे फ्रीज करके रख दिया जाता है.
  • बाद में जब भी महिला प्रेग्नेंट होना चाहती है तो उन एग्स को लैब में स्पर्म के साथ फर्टिलाइज करके भ्रूण बनाकर महिला के गर्भाशय (यूटेरस) में इंप्लांट कर दिया जाता है.
  • हर महिला की ओवरीज एक सीमा तक ही एग बनाती है. एक सामान्य महिला अपने पूरे जीवन काल में 400 से 500 एग्स प्रोड्यूज करती है.

इस प्रोसेस को इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (IVF) भी कहा जाता है. इसकी प्रोसेस में-

  • एग फ्रीजिंग के लिए महिला को शुरुआत में करीब 6 से 7 दिन तक इंजेक्शन लगाए जाते हैं. इसके बाद उसके हेल्दी एग को लैब में तब तक सेफ रखा जाता है, जब तक उसे इंप्लांट न किया जाए.
  • अगर महिला हेल्दी होती है तो बच्चे को अपने गर्भ में रखती है. या फिर सरोगेसी का भी सहारा ले सकती है. कई महिलाएं सरोगेसी या टेस्ट ट्यूब बेबी का सहारा लेती हैं. इसमें सरोगेट मदर बच्चे को जन्म देती है.
  • केनेडियन फर्टिलिटी और एंड्रोलॉजी सोसायटी ने 2014 में एग फ्रीजिंग को अधिक उम्र में मां बनने का सपना पूरा करने का कारगर तरीका बताया है.

एग फ्रीजिंग की प्रोसेस 14 दिन की होती है...

  • पहला दिन: शुरुआती कंसल्टेशन होता है.
  • दूसरा दिन: ब्लड टेस्ट और कंप्लीट हेल्थ स्क्रीनिंग होती है.
  • तीसरा दिन: सेकेंड कंसल्टेशन के लिए बुलाया जाता है.
  • 4-10 दिन: ओवेरियन स्टिमुलेशन और मॉनिटरिंग की जाती है.
  • 11-13 दिन: एग रिलीज करने के लिए कई इंजेक्शन्स लगाए जाते हैं.
  • 14 दिन: एग रिट्रीवल की प्रोसेस होती है.

इसके बाद सिलेक्टेड एग को फ्रीज किया जाता है और फ्रोजन एग की मॉनिटरिंग होती है.

इस प्रक्रिया में एनेस्थीसिया का इस्तेमाल किया जाता है. ये दर्दनाक तो नहीं, लेकिन अनकम्फर्टेबल जरूर हो सकती है. हालांकि, प्रक्रिया के तुरंत बाद कुछ ऐंठन, खराश या दर्द महसूस होना आम बात है.

सवाल 2- एग फ्रीज करने की सही उम्र क्या होती है?
जवाब- गायनेकोलॉजिस्ट कंसल्टेंट एक्सपर्ट के मुताबिक, आमतौर पर महिलाओं में एग फ्रीजिंग के लिए अपर लिमिट 36-37 साल की उम्र है. महिलाओं को 32-36 के बीच एग फ्रीज करवा लेने चाहिए. अगर आप ऐसा नहीं कर पातीं तो 40 की उम्र तक भी अपने एग फ्रीज करवा सकती हैं. एक IVF लैब में ये अंडे कम से कम 5 साल तक महफूज रह सकते हैं. कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया जाता है कि एग्स हजारों सालों तक भी सुरक्षित रह सकते हैं.

सवाल 3- किन स्थितियों में महिलाएं एग्स फ्रीज करवा सकती हैं?
जवाब- एक्सपर्ट्स के मुताबिक,

  • कैंसर पेशेंट: जिन महिलाओं को किसी भी ऑर्गन में कैंसर हुआ है और वे कीमोथेरेपी करा रही हैं तो इसका असर उनके रिप्रोडक्टिव ऑर्गन पर भी पड़ता है. इसलिए डॉक्टर ऐसी महिलाओं को एग फ्रीज करने की सलाह देते हैं.
  • पुरुष में स्पर्म काउंट कम होना: अगर पुरुषों में स्पर्म काउंट कम है, आगे और कम होने की संभावना है, उम्र बढ़ रही है या स्पर्म क्वालिटी खराब हो रही है, तो एग फ्रीज किए जाते हैं. ताकि पुरुषों के इलाज के बाद स्वस्थ अंडे उपलब्ध रहें.
  • सिंगल वुमन: इसे इलेक्टिव एग फ्रीजिंग या सोशल एग फ्रीजिंग भी कहते हैं. जब महिला को शादी नहीं करना होती और वो सिंगल मदर बनना चाहती है, तो एग फ्रीज करवा सकती हैं.
  • पॉलिसिस्टिक ओवेरियन डिसीज (PCOD): जिन महिलाओं को पीसीओडी की दिक्कत है, उनके लिए भी ये एक बेहतर विकल्प हो सकता है.
  • एंडोमेट्रियोसिस: जिन महिलाओं को एंडोमेट्रियोसिस है और उनकी ओवरी में एग नहीं बनते, उनके लिए भी अपने बचे हुए हेल्दी एग को सेफ करने का सबसे सही तरीका एग फ्रीजिंग है.
  • ओवेरियन सर्जरी: इसके बाद अंडों की संख्या और क्वालिटी तेजी से कम हो जाती है. इसलिए डॉक्टर हमेशा सर्जरी से पहले एग फ्रीजिंग की सलाह देते हैं.
  • लेट फैमिली प्लानिंग: जो शादीशुदा कपल शादी के फौरन बाद बच्चे पैदा नहीं करने चाहते, उनके लिए एग फ्रीजिंग सबसे अच्छा और सुरक्षित इंश्योरेंस बन गया है. सेलिब्रिटीज में एग फ्रीजिंग की पॉपुलैरिटी बढ़ने की सबसे बड़ी वजह भी यही है.

सवाल 4- क्या एग फ्रीजिंग के रिस्क और नुकसान भी हो सकते हैं?
जवाब- एक्सपर्ट्स के मुताबिक-

  • कुछ महिलाओं को इस प्रोसेस के दौरान पेट में हल्का दर्द या गड़बड़ी की शिकायत हो सकती है.
  • ओवरी का साइज बढ़ सकता है.
  • ओवेरियन हाइपर स्टिमुलेशन सिंड्रोम की समस्या हो सकती है.
  • पेट में इन्फेक्शन, मतली, पेट में ऐंठन या हार्मोनल इम्बैलेंस भी हो सकते हैं.

सवाल 5- एग फ्रीजिंग प्रोसेस करवाने में कितना खर्च आता है?
जवाब- एग फ्रीजिंग प्रोसेस में 1.5 लाख तक खर्चा आ सकता है या उससे भी ज्यादा हो सकता है. यह क्लिनिक और लोकेशन पर निर्भर करता है. भारत में कई MNC कंपनियां इसे मेडिकल कवर में भी शामिल करती हैं. देशभर में करीब 11 फीसदी कंपनियां हैं, जो एग फ्रीजिंग को मेडिकल कवर में शामिल कर रही हैं.

सवाल 6- क्या IVF से पैदा हुआ बच्चे को आगे चलकर कोई समस्या आ सकती है?
जवाब- एक्सपर्ट्स के मुताबिक, IVF से पैदा हुए बच्चे को ऐसी कोई समस्या नहीं आती है. हालांकि, एक बार जब आप भ्रूण बनाने के लिए एग्स और स्पर्म को फर्टिलाइजेशन के लिए रखते हैं तो आप संभावित क्रोमोसोमल समस्याओं की जांच के लिए अपने भ्रूण का प्रीइंप्लांटेशन जेनेटिक परीक्षण या PGT करवा सकते हैं.

ज़ाहिद अहमद इस वक्त ABP न्यूज़ में बतौर सीनियर कॉपी एडिटर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. टेलीविजन और डिजिटल जर्नलिज्म की दुनिया में उन्हें करीब 9 साल का तजुर्बा है. इससे पहले वे 3 बड़े मीडिया संस्थानों में भी अहम जिम्मेदारियां निभा चुके हैं. वे ओरिजिनल सेक्शन की एक्सप्लेनर टीम में सीनियर सब एडिटर रहे. ज़ाहिद आउटपुट डेस्क, बुलेटिन प्रोड्यूसिंग और बॉलीवुड सेक्शन को बतौर असिस्टेंट प्रोड्यूसर लीड भी कर चुके हैं. देश-विदेश, सियासत, कारोबार, एजुकेशन, एंटरटेनमेंट, चुनाव और समाजी मुद्दों पर उनकी गहरी पकड़ है. आसान लहजे में असरदार और भरोसेमंद एक्सप्लेनर पेश करना उनकी पहचान है.

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