महिलाओं की जिन फुटवियर में पीछे फीता नहीं वे सैंडल हैं, चप्पल नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट
नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट ने व्यवस्था दी है कि महिलाओं के ऐसे फुटवियर जिनमें ‘बैक-स्ट्रैप’ यानी पीछे बांधने का फीता नहीं है, वह चप्पल नहीं सैंडल है. सरकार की दलील थी कि ऐसे फुटवियर चप्पल की श्रेणी में आते हैं. यह फैसला इस दृष्टि से महत्वपूर्ण है कि सैंडल के निर्यात पर 10 प्रतिशत शुल्क वापसी होती है वहीं चप्पल के मामले में पांच प्रतिशत शुल्क वापसी होती है.
सरकार ने एक फुटवियर विनिर्माता कंपनी को लौटाई गई 10 प्रतिशत शुल्क वापसी को यह कहते हुए वापस ले लिया कि उसके द्वारा निर्यात किया गया फुटवियर सैंडल नहीं बल्कि चप्पल है क्योंकि उसमें पीछे से बांधने का फीता नहीं है.
दिल्ली होईकोर्ट ने सरकार के फैसले को निरस्त करते हुए व्यवस्था दी कि महिलाओं द्वारा पहनी जाने वाली यह फुटवियर सैंडल हैं. सरकार के विचार से असहमति जताते हुए न्यायमूर्ति एस रविंद्र भट और नाजमी वजीरी की पीठ ने यह व्यवस्था दी.
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