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कोर्ट में गीता की कसम क्यों खिलाई जाती है, रामायण की क्यों नहीं? जानिए इसके पीछे का चौंकाने वाला सच!

Gita oath in court: भारतीय अदालतों में गवाहों के बयान लेने से पहले उन्हें गीता पर हाथ रखकर शपथ दिलाई जाती है? आखिर गीता ही क्यों रामायण महाकाव्य की कसम क्यों नहीं दिलाई जाती है? जानिए कारण.

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  • गीता में सच्चाई व आचरण के मार्गदर्शन के कारण महत्व।

Gita oath in court: हम सभी ने अक्सर फिल्मों में देखा है कि कोर्ट रूम में जज साहब किसी गवाह का बयान लेने से पहले उसे गीता की कसम खिलाते हैं. आपने कभी सोचा है कि आखिर गवाहों को गीता की ही कसम क्यों खिलाई जाती है, रामायण की क्यों नहीं? आइए जानते हैं इसके पीछे का कारण?

इंटरनेट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, भारत में जब मुगल शासकों का दौर था, तब उन्होंने ने ही धार्मिक किताबों पर हाथ रखकर कसम दिलाने की प्रथा शुरू की थी. दरअसल उस दौर में मुगल शासक अपने फायदे के लिए झूठ बोलते थे, जिस वजह से उन्हें भारतीय नागरिकों की बातों पर विश्वास नहीं होता था.

इसी को ध्यान में रखते हुए उन्होंने भारत के नागरिकों को अपने धर्म ग्रंथ पर हाथ रखकर शपथ दिलाने की प्रथा शुरू की थी.

दरबापी प्रथा को अंग्रेजों ने दिया कानून का रूप

मुगल शासन काल तक गीता पर हाथ रखकर कसम खिलाने की प्रथा एक दरबारी प्रथा थी, तब इसके लिए किसी भी तरह का कानून नहीं था, लेकिन अंग्रेजों ने इस प्रथा को कानूनी जामा पहना दिया और इसे 'इंडियन ओथ्स एक्ट, 1873' में पास करने के साथ सभी अदालतों में लागू कर दिया.

इस एक्ट के अंतर्गत हिंदू संप्रदाय के लोग गीता और मुस्लिम संप्रदाय के लोग कुरान पर हाथ रखकर कसम खाते थे. वहीं ईसाइयों को बाइबल की शपथ दिलाई जाती थी. हालांकि स्वतंत्र भारत 1957 आते आते इस प्रथा को देश की कुछ शाही अदालतों, जैसे बॉम्बे हाईकोर्ट में यह प्रथा चालू थी.

1969 में ओथ्स एक्ट लागू

भारतीय अदालतों में धार्मिक ग्रंथ पर हाथ रखकर कसम खिलाने की प्रथा 1969 में खत्म कर दी गई. जब लॉ कमीशन ने अपनी तरफ से 28वीं रिपोर्ट सौंपी और देश में भारतीय 'ओथ अधिनियम, 1873' में कुछ बदलाव के सुझाव दिए गए.

इसके स्थान पर ओथ्स एक्ट 1969 लागू हुआ, इस तरह देश में एक समान शपथ कानून लागू किया गया.

कोर्ट में शपथ के लिए गीता ही क्यों?

अपने कभी सोचा है कि, कोर्ट में आखिर गीता पर हाथ रखकर ही क्यों कसम खिलाई जाती है, जबकि रामायण महाकाव्य उससे ज्यादा लोकप्रिय धार्मिक पुस्तक है. इसके पीछे का कारण है कि, रामायण में भगवान श्रीराम के जीवन का उल्लेख देखने को मिलता है. रामायण की किताब पढ़कर लोग आदर्श जीवन का मार्गदर्शन प्राप्त करते हैं.

लेकिन गीता एक ऐसा महाकाव्य जो लोगों को आदर्श जीवन उपलब्ध कराती है. इसमें केवल महाभारत युद्ध का ही उल्लेख नहीं, बल्कि सच्चाई की स्थापना के लिए मनुष्य को किस तरह का आचरण करना चाहिए इसका भी वर्णन किया गया है.

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

अंकुर अग्निहोत्री (Ankur Agnihotri)

Astrology & Religion Content Writer

अंकुर अग्निहोत्री ABP Live के Astro & Religion सेक्शन से जुड़े डिजिटल पत्रकार हैं, जो दैनिक राशिफल, व्रत-त्योहार, ग्रह-गोचर और ज्योतिषीय विषयों पर सरल, तथ्य-आधारित और उपयोगी लेखन करते हैं. उनका कंटेंट विशेष रूप से उन पाठकों के लिए तैयार होता है जो ज्योतिष और धर्म को आसान भाषा में समझना चाहते हैं.

अंकुर पिछले 2+ वर्षों से ABP Live (abplive.com) में सक्रिय रूप से कार्यरत हैं और ज्योतिष, अंक शास्त्र, वास्तु शास्त्र, शकुन अपशकुन शास्त्र, हस्तरेखा, स्वप्न शास्त्र, चाइनीच ज्योतिष आदि पर आर्टिकल्स प्रकाशित करते हैं.

उनका काम हाई-फ्रीक्वेंसी कंटेंट प्रोडक्शन, ट्रेंड-आधारित स्टोरी चयन और यूजर-इंटेंट आधारित लेखन पर केंद्रित है, जिससे उनके लेख लगातार अच्छा डिजिटल एंगेजमेंट प्राप्त करते हैं. इसके अतिरिक्त अंकुर अग्निहोत्री निम्नलिखित विषयों पर भी लेखन करते हैं:

  • दैनिक और साप्ताहिक राशिफल
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वे अपने लेखों में जानकारी प्रस्तुत करते समय, पंचांग आधारित तिथि, नक्षत्र और योग का संदर्भ लेते हैं. सामान्य ज्योतिषीय सिद्धांतों (ग्रह-स्थिति, गोचर प्रभाव) का उपयोग करते हैं और पारंपरिक धार्मिक मान्यताओं और प्रचलित स्रोतों के आधार पर जानकारी देते हैं. अंकुर ABP Live जैसे प्रतिष्ठित डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म के साथ जुड़े हैं और Astro सेक्शन में नियमित रूप से कंटेंट प्रकाशित करते हैं.

उनके लेख धार्मिक मान्यताओं, पारंपरिक ज्योतिषीय सिद्धांतों और सामान्य स्रोतों पर आधारित होते हैं. वे किसी भी प्रकार के निश्चित या गारंटीड परिणाम का दावा नहीं करते और पाठकों को जानकारी को मार्गदर्शन के रूप में लेने की सलाह देते हैं. इन्होने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से पत्रकारिता की पढ़ाई की है.

अंकुर का फोकस ज्योतिष और धर्म को सरल, व्यावहारिक और समझने योग्य रूप में प्रस्तुत करना है, ताकि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर यह जानकारी हर वर्ग के पाठकों तक पहुंच सके.

Personal Interests की बात करें तो अंकुर को अंक शास्त्र, वैदिक ज्योतिष, वास्तु और स्वप्न शास्त्र में रुचि. साथ ही साहित्य और फिल्में देखने का शौक है.

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Frequently Asked Questions

रामायण की जगह गीता को शपथ के लिए क्यों चुना गया?

गीता में न केवल महाभारत युद्ध का वर्णन है, बल्कि सच्चाई की स्थापना के लिए मनुष्य के आचरण पर भी मार्गदर्शन मिलता है, जो रामायण में केवल आदर्श जीवन का उल्लेख होने से अलग है।

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