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Shradh 2025: श्राद्ध में कौओं को भोजन क्यों कराते हैं? पितरों से है गहरा नाता!

Shradh Rituals: श्राद्ध में लोग अपने पितरों का पिंडदान करते हैं तो वे कौए को भी भोजन देते हैं. आखिर क्यों श्रद्धा कर्म के दौरान कौआ को भोजन दिया जाता है? क्या है इसके पीछे का धार्मिक महत्व जानें.

Feeding crows during Shradh: हिंदू धर्म में कई तरह के धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं. इन्हीं में से एक श्राद्ध कर्म भी है. श्राद्ध कर्म को पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए किया जाता है.

श्राद्ध कर्म में पिंडदान और भोजन का दान अहम माना जाता है. श्राद्ध कर्म में विशेष रूप से कौए को भोजन कराया जाता है. इसका संबंध पितृ लोक और पूर्वजों से होता है.

हिंदू शास्त्रों के मुताबिक श्राद्ध में कौए को भोजन कराना इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इन्हें पितरों का दूत कहा जाता है.

श्राद्ध कर्म को लेकर गरुड़ पुराण में कहा गया है कि, जब कोई व्यक्ति अपने पितरों का पिंडदान करता है तो, कौए के रूप में उसके पूर्वज धरती लोक पर आते हैं.

अगर कौए ने परोसा हुआ भोजन स्वीकार कर लिया तो यह सकेंत शुभ माना जाता है. ये अनुष्ठान आत्मा की तृप्ति और मोक्ष को और सरल बनाता है.

श्राद्ध कर्म का जिक्र तमाम धार्मिक ग्रंथों में भी
श्राद्ध कर्म का उल्लेख तमाम धार्मिक शास्त्रों और पुराणों में भी है. गरुड़ पुराण के प्रेत खंड में बताया गया है कि, कौआ पितरों का प्रतिनिधि होता है. और यदि श्राद्ध कर्म में कौआ ने भोजन स्वीकार कर लिया तो ये पितरों की तृप्ति का संकेत होता है.

हिंदू धार्मिक शास्त्र मनुस्मृति के अध्याय 3 और श्लोक 210 में श्राद्ध कर्म को लेकर कहा गया है कि, "पिण्डोदकक्रियाभिस्तु त्रिप्तिं यान्ति पितामहाः।
न च त्रिप्तिं विना तेषां गमनं विद्यते क्वचित्॥"

अर्थात, पिंड और जल की क्रियाओं से ही पितरों को तृप्ति मिलती है. पितरों को तृप्त किए बिना उन्हें किसी भी प्रकार का मोक्ष नहीं मिलता है.

इसके साथ ही महाभारत के अनुशासन पर्व के अध्याय 92 के श्लोक में कहा गया है कि, "पिण्डं पित्रे प्रयच्छेत तिलोदकसमन्वितम्।
यदा काकः पिबेत्तोयं तदा तृप्तो भवेद्धि सः॥"

जिसका अर्थ है कि, जब श्राद्ध कर्म में पितरों का पिंडदान किया जाता है और कौआ उस जल को ग्रहण कर ले तो इसका मतलब है कि पितृ तृप्त हो गए हैं.

पिंडदान का महत्व
श्रद्धा कर्म का उल्लेख मनुस्मृति और महाभारत जैसे पौराणिक ग्रथों में भी देखने को मिलता है. मनुस्मृति के मुताबिक, 'पितरों का पिंड और तर्पण करने से उन्हें तृप्ति मिलती है. जब पितर संतोष होते हैं तो वे आशीर्वाद देते हैं.'

श्राद्ध कर्म में पिंडदान करने के लिए आटा,तिल, चावल और जल का इस्तेमाल होता है, जिसे आत्मा को भोजन के रूप में अर्पित किया जाता है. श्राद्ध कर्म को करने से मरने के बाद पितरों की यात्रा सरल हो जाती है.

वही जो लोग अपने पितरों का तर्पण या पिंडदान नहीं करते हैं, उनके पितृ प्रेत योनि में ही भटकते रहते हैं. कौए को भोजन देने से इस बात का पता चलता है कि पितरों ने भोजन स्वीकार किया या नहीं.

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

अंकुर अग्निहोत्री (Ankur Agnihotri)

Astrology & Religion Content Writer

अंकुर अग्निहोत्री ABP Live के Astro & Religion सेक्शन से जुड़े डिजिटल पत्रकार हैं, जो दैनिक राशिफल, व्रत-त्योहार, ग्रह-गोचर और ज्योतिषीय विषयों पर सरल, तथ्य-आधारित और उपयोगी लेखन करते हैं. उनका कंटेंट विशेष रूप से उन पाठकों के लिए तैयार होता है जो ज्योतिष और धर्म को आसान भाषा में समझना चाहते हैं.

अंकुर पिछले 2+ वर्षों से ABP Live (abplive.com) में सक्रिय रूप से कार्यरत हैं और ज्योतिष, अंक शास्त्र, वास्तु शास्त्र, शकुन अपशकुन शास्त्र, हस्तरेखा, स्वप्न शास्त्र, चाइनीच ज्योतिष आदि पर आर्टिकल्स प्रकाशित करते हैं.

उनका काम हाई-फ्रीक्वेंसी कंटेंट प्रोडक्शन, ट्रेंड-आधारित स्टोरी चयन और यूजर-इंटेंट आधारित लेखन पर केंद्रित है, जिससे उनके लेख लगातार अच्छा डिजिटल एंगेजमेंट प्राप्त करते हैं. इसके अतिरिक्त अंकुर अग्निहोत्री निम्नलिखित विषयों पर भी लेखन करते हैं:

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अंकुर का फोकस ज्योतिष और धर्म को सरल, व्यावहारिक और समझने योग्य रूप में प्रस्तुत करना है, ताकि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर यह जानकारी हर वर्ग के पाठकों तक पहुंच सके.

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