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Kanya Pujan: नवरात्रि के अलावा इन 4 मौकों पर भी होता है कन्या पूजन, घर में ठहर जाती हैं मां लक्ष्मी!

Kanya Pujan: यज्ञ, सत्यनारायण कथा के अलावा कन्या पूजन भी ऐसा धार्मिक अनुष्ठान है जो कई विशेष कार्यों के संपन्न होने के बाद किया जाता है. जानें नवरात्रि के अलावा कन्या पूजन कब कर सकते हैं.

Kanya Pujan: हिंदू धर्म में कन्या की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है. पुराणों के अनुसार कन्या को मां दुर्गा का स्वरूप माना जाता है, कन्या की पूजा करने वालों पर न सिर्फ मां लक्ष्मी मेहरबान होती हैं बल्कि उनके समस्त दुख, रोग, शोक दूर होते हैं. साथ ही विशेष मनोकामना की पूर्ति होती है.

नवरात्रि में तो अष्टमी और नवमी पर कन्या पूजन जरुर किया जाता है. इस साल चैत्र नवरात्रि की अष्टमी 26 मार्च और नवमी 27 मार्च को है लेकिन नवरात्रि के अलावा कन्या पूजन कब-कब किया जा सकता है और इसका महत्व क्या है आइए जानते हैं.

नवरात्रि के अलावा कन्या पूजन कब करें

  • विशेष मांगलिक कार्य-  घर में जब कोई मांगलिक कार्य संपन्न होता है जैसे विवाह, गृह प्रवेश या फिर संतान के जन्म के बाद भी कन्या पूजन किया जाता है. कन्याओं को मां दुर्गा का साक्षात स्वरूप माना जाता है, जो घर में सुख, शांति और समृद्धि लाते हैं.
  • धार्मिक तीर्थ यात्रा के बाद - तीर्थ यात्रा के बाद जब व्यक्ति सकुशल अपने घर लौट आता है तब भी देवी-देवता के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए घर में कन्या पूजन किया जाता है. खासकर वैष्णो देवी, नैना देवी या ज्वाला देवी जैसे सिद्ध शक्तिपीठों के दर्शन से लौटने के बाद ये परंपरा निभाई जाती है.
  • मासिक दुर्गा अष्टमी – देवी दुर्गा की कई भक्त ऐसे हैं जो हर महीने की शुक्ल पक्ष की अष्टमी और नवमी को कन्या को भोजन कराते हैं. अगर किसी कारणवश घर न बुला सके तो उन्हें प्रसाद रूप में खीर बांटते हैं.
  • खास मनोकामना पूर्ति पर - जब किसी भक्त की कोई विशेष मनोकामना पूरी होती है, तो वे आभार स्वरूप कन्याओं को भोजन कराते हैं और उनका आशीर्वाद लेते हैं.

कन्या पूजन क्यों किया जाता है

यह पूजा अहंकार को मिटाकर सेवा, करुणा और विनम्रता का भाव जगाती है, जिससे जीवन में सकारात्मकता आती है. देवी पुराण के अनुसार जिस घर में कन्या पूजन होता है वहां मां लक्ष्मी वास करती हैं और परिवार में खुशहाली आती है.

कैसे करें कन्या पूजन

  • 2-10 साल तक की कन्या को घर पर भोजन का निमंत्रण दें. कन्याओं को स्वच्छ जगह बिठाकर सभी के पैरों को दूध से भरे थाल या थाली में रखकर अपने हाथों से उनके पैर धोने चाहिए और पैर छूकर आशीष लेना चाहिए.
  • उसके बाद माथे पर अक्षत, फूल और कुमकुम लगाना चाहिए. फिर भोजन कराएं.
  • भोजन के बाद कन्याओं को अपने सामर्थ्‍य के अनुसार दक्षिणा, उपहार दें और उनके पुनः पैर छूकर आशीष लें.

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Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

जागृति सोनी बरसले (Jagriti Soni Bursle)

धर्म, ज्योतिष और भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं पर शोध आधारित लेखन करने वाली डिजिटल पत्रकार

जागृति सोनी बर्सले धर्म, ज्योतिष, वास्तु और भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं से जुड़े विषयों की अनुभवी डिजिटल पत्रकार और लेखिका हैं. उन्हें डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग 10 वर्षों का अनुभव है. वर्तमान में वह ABP Live (Abplive.com) में बतौर कंसल्टेंट कार्यरत हैं, जहां वह व्रत-त्योहार जैसे नवरात्रि, करवा चौथ, दिवाली, होली, एकादशी, प्रदोष व्रत, हरियाली तीज आदि, धार्मिक मान्यताओं, ज्योतिषीय घटनाओं, शुभ मुहूर्त, वास्तु और फेंगशुई, पंचांग जैसे विषयों पर शोध आधारित और प्रमाणिक लेख लिखती हैं.

विशेषज्ञता (Expertise)

जागृति सोनी बर्सले विशेष रूप से इन विषयों पर लेखन करती हैं:

  • व्रत-त्योहार और भारतीय धार्मिक परंपराएं
  • वैदिक ज्योतिष और ग्रह-नक्षत्र आधारित घटनाएं
  • शुभ मुहूर्त और धार्मिक विधि-विधान
  • वास्तु शास्त्र और फेंगशुई
  • आध्यात्मिक मान्यताएं और सांस्कृतिक परंपराएं

उनके लेखों में धार्मिक विषयों को केवल आस्था के दृष्टिकोण से नहीं बल्कि शास्त्रीय स्रोतों और प्रमाणिक ग्रंथों के आधार पर प्रस्तुत किया जाता है.

शिक्षा और पृष्ठभूमि

जागृति सोनी बर्सले ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से की है.

उन्होंने अपने करियर की शुरुआत दैनिक भास्कर डॉट कॉम से की, जहां डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने धर्म, समाज और संस्कृति से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर लेख लिखे.

डिजिटल मीडिया में काम करते हुए उन्होंने टेक्स्ट और वीडियो दोनों फॉर्मेट में काम किया है और वीडियो सेक्शन में सीनियर प्रोड्यूसर के रूप में भी लंबे समय तक योगदान दिया है. इस अनुभव ने उन्हें आधुनिक डिजिटल पत्रकारिता के विभिन्न फॉर्मेट को समझने और प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करने की क्षमता दी है.

शास्त्रीय अध्ययन और शोध

जागृति सोनी बर्सले की विशेष रुचि धर्म और ज्योतिष के शास्त्रीय अध्ययन में है.

उन्हें प्राचीन धार्मिक ग्रंथों जैसे:

  • धर्म सिंधु
  • मुहूर्त चिंतामणि

का अच्छा ज्ञान है. इन ग्रंथों के आधार पर वह व्रत-त्योहार, पूजा-विधि, ज्योतिषीय घटनाओं और मुहूर्त से जुड़े विषयों को सरल, प्रमाणिक और शोधपरक तरीके से पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास करती हैं.

योगदान

जागृति सोनी बर्सले एक फ्रीलांस लेखक के रूप में भी कई मंचों पर आध्यात्म, भारतीय संस्कृति और ज्योतिष से जुड़े विषयों पर लेख लिख चुकी हैं.

उनका उद्देश्य धार्मिक और आध्यात्मिक विषयों को सरल भाषा में विश्वसनीय जानकारी के साथ प्रस्तुत करना है, ताकि पाठक इन विषयों को समझ सकें और सही जानकारी प्राप्त कर सकें.

व्यक्तिगत रुचियां

अध्यात्म और भारतीय परंपराओं के अध्ययन के प्रति उनकी गहरी रुचि है. खाली समय में उन्हें आध्यात्मिक और ज्ञानवर्धक पुस्तकें पढ़ना पसंद है. यह अध्ययन उनके लेखन को और अधिक गहन, तथ्यपूर्ण और संदर्भ आधारित बनाता है.

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