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Vindhyavasini Puja 2026: विन्ध्यवासिनी षष्ठी 2026 कब है? मां की कृपा पाने के लिए जानें पूजा विधि और महत्व

Vindhyavasini Puja 2026: विन्ध्यवासिनी षष्ठी 2026 का पर्व 20 जून को मनाया जाएगा. जानें मां विंध्यवासिनी की पौराणिक कथा, पूजा का महत्व, पूजा विधि, आरती और इस दिन मिलने वाले शुभ फलों के बारे में.

Vindhyavasini Puja 2026: इस वर्ष विन्ध्यवासिनी षष्ठी का पर्व 20 जून 2026, शनिवार को मनाया जाएगा. यह दिन मां विंध्यवासिनी की विशेष आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है. उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर में स्थित विंध्याचल धाम में इस अवसर पर हजारों श्रद्धालु मां के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं. धार्मिक मान्यता है कि इस दिन देवी की उपासना करने से जीवन में सुख, समृद्धि और मन मुतबिक फल की प्राप्त होते है.

मां विंध्यवासिनी को आदिशक्ति का स्वरूप माना जाता है. नवरात्रि की तरह भले ही यह पर्व उतना प्रसिद्ध न हो, लेकिन शक्ति उपासकों के लिए विन्ध्यवासिनी षष्ठी का विशेष महत्व है.

कौन हैं मां विंध्यवासिनी?

मां विंध्यवासिनी देवी दुर्गा का एक दिव्य रूप हैं. पौराणिक कथाओं (जैसे श्रीमद् देवी भागवत पुराण) के अनुसार, जब भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था, तब कंस ने जिस कन्या को मारने का प्रयास किया था, वह वास्तव में योगमाया थीं. जब कंस ने उस कन्या को पत्थर पर पटककर मारना चाहा, तब देवी कंस के हाथों से छूटकर आकाश में प्रकट हुईं. उन्होंने कंस के विनाश की भविष्यवाणी की और फिर विंध्य पर्वत क्षेत्र में जाकर विराजमान हो गईं. इसी कारण उन्हें "विंध्यवासिनी" कहा गया, जिसका मतलब है विंध्य पर्वत में निवास करने वाली देवी.

मिर्जापुर का विंध्याचल धाम भारत के प्रमुख शक्तिपीठों में गिना जाता है, जहां मां विंध्यवासिनी का भव्य मंदिर स्थित है.

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विन्ध्यवासिनी षष्ठी क्यों मनाई जाती है?

विन्ध्यवासिनी षष्ठी का पर्व देवी शक्ति की आराधना और उनकी कृपा प्राप्त करने के लिए मनाया जाता है. इस दिन मां की पूजा करने से बुरी शक्तियों का प्रभाव कम होता है और भक्तों को साहस, आत्मविश्वास और मानसिक शांति की प्राप्ति होती है.

यह पर्व खास रूप से उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है जो जीवन में किसी बड़ी बाधा, आर्थिक समस्या या पारिवारिक तनाव का सामना कर रहे हों. देवी की कृपा से कष्टों में कमी आने और शुभ फल मिलने की मान्यता है.

विन्ध्यवासिनी षष्ठी की पूजा विधि:

  • सुबह नहाकर करके साफ कपड़े पहने.
  • पूजा की जगह को साफ करके लाल या पीला कपड़ा बिछाएं.
  • मां विंध्यवासिनी की मूर्ति या फोटो स्थापित करें.
  • लाल फूल, चुनरी, सिंदूर, नारियल और फल अर्पित करें.
  • धूप-दीप जलाकर दुर्गा सप्तशती या देवी मंत्रों का पाठ करें.
  • खीर, मिठाई या फल का भोग लगाएं.
  • मां की आरती करें और सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें.

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माँ विन्ध्यवासिनी जी की आरती:

सुनो सुनो माँ विन्ध्यवासिनी, महिमा अमित तुम्हारी।
कष्ट हरो माँ ज्ञान प्रदायिनी, शरण तकी हम थारी ॥

ब्रह्मा विष्णु महेश शीश धर, ध्यान धरत नित तेरो।
ऋषि मुनि सुर नर आरती गावें, काटहु संकट मेरो ॥॥ 
सुनो सुनो माँ विन्ध्यवासिनी... ॥

विन्ध्याचल पर राजत नीके, सिंह वाहिनी माता।
जो जन सुमिरे कष्ट मिटत है, तुम हो भाग्य विधाता ॥॥ 
सुनो सुनो माँ विन्ध्यवासिनी... ॥

हाथ चक्र त्रिशूल विराजे, गदा पद्म धनु धारी।
दुष्ट दलन जग पालन करती, जय जय जय जगदम्ब विहारी ॥॥ 
सुनो सुनो माँ विन्ध्यवासिनी... ॥

अगम अगोचर रूप तुम्हारा, कोई न पार पावे।
'दास’ विनीत करे माँ विनती, भवसागर तर जावे ॥॥ 
सुनो सुनो माँ विन्ध्यवासिनी... ॥

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Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

अणिमा शुक्ला | डिजिटल पत्रकार (इंटर्न), ABP Live धर्म-एस्ट्रो सेक्शन

अणिमा शुक्ला एक उभरती हुई डिजिटल पत्रकार और वीडियो स्टोरीटेलर हैं, जो वर्तमान में ABP Live के धर्म और एस्ट्रो सेक्शन में इंटर्न के रूप में कार्यरत हैं. उन्होंने AAFT, नोएडा से BAJMC और AIMC, दिल्ली से TV & Radio Journalism (TVRJ) में पत्रकारिता की शिक्षा प्राप्त की है, जिसने उनके कंटेंट को व्यावहारिक, तकनीकी रूप से मजबूत और ऑडियंस-फोकस्ड बनाया है.

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