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Kedarnath-Badrinath Dham: क्या 5,500 साल बाद लुप्त हो जाएंगे धाम? भविष्यवाणियां और रहस्य!

Kedarnath-Badrinath Dham: केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम यात्रा के लिए हर साल लाखों की संख्या मे श्रद्धालु उत्तराखंड पहुंचते हैं. लेकिन एक समय ऐसा आएगा जब ये धाम अदृश्य या लुप्त हो जाएंगे.फिर क्या होगा?

Kedarnath-Badrinath Dham Yatra 2025: चारधाम की पवित्र यात्रा में बद्रीनाथ और केदारनाथ धाम की यात्रा भी शामिल है. लेकिन पुराणों में ऐसी भविष्यवाणी की गई है कि एक समय ऐसा आएगा जब बद्रीनाथ और केदारनाथ धाम लुप्त हो जाएंगे. इतना ही नहीं गंगा भी शिव की जटाओं के रास्ते से वापस ब्रह्मा के कमंडल में लौट जाएगी. क्या सचमुच में ऐसा होगा, ऐसा कब होगा और अगर ऐसा होगा तो उसके बाद फिर क्या होगा? आइए जानते हैं.

केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम उत्तराखंड की ऊंची हिमालय चोटियों पर स्थित है. जो न केवल पौराणिक बल्कि धार्मिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण स्थान माने जाते हैं. यह लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है, जहां हर साल लाखों की संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं और आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त करते हैं. मान्यता है कि चार धाम में की गई यात्रा से व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है.

लेकिन पुराणों में तो केदारनाथ और बद्रीनाथ को लेकर आने वाले समय में बहुत ही हैरान कर देने वाली भविष्यवाणी की गई है जिसके अनुसार यह दोनों धाम एक समय लुप्त हो जाएंगे और सामान्य लोगों का इन तीर्थ तक पहुंचना असंभव सा हो जाएगा. पुराणों में कहा गया है कि ऐसा तब होगा जब नर नारायण पर्वत आपस में मिल जाएंगे.

स्कंद पुराण के श्लोक में वर्णन मिलता है कि-

बहुनि सन्ति तीर्थानी दिव्य भूमि रसातले।बद्री सदृश्य तीर्थं न भूतो न भविष्यतिः॥” 

अर्थ है- स्कंद पुराण के इस श्लोक के अनुसार- बद्रीनाथ जैसा पवित्र तीर्थ और कहीं नहीं है. इसके अनुसार कलयुग के प्रथम चरण में ऐसा समय आएगा जब यह तीर्थ अदृश्य हो जाएगा. हालांकि ऐसा करीब साढ़े पांच हजार वर्ष बाद होगा. भविष्यवाणी के बाद से यह अवधि अब पूरी हो चुकी है.

भविष्यवाणी में यह भी कहा गया है कि, इस तीर्थस्थल के अदृश्य होने से पहले कुछ संकेत भी नजर आने लगेंगे, जिसमें पहला संकेत होगा जोशीमठ में विराजमान भगवान नरसिंह देव के हाथ विग्रह से अलग हो जाएंगे. मंदिर के पुजारी भी बताते हैं कि पिछले कुछ सालों में भगवान की उंगलियां पतली होने लगी है. जब ऊंगलियां हाथ से अलग हो जाएगी तब ब्रदीनाथ यह स्थान छोड़ देंगे और भविष्य में केदारनाथ और बद्रीनाथ के रास्ते हमेशा के लिए बंद हो जाएंगे.

क्या होगा जब अदृश्य हो जाएंगे केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम

केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम के अदृश्य होने के बाद भविष्य केदार और भविष्य बद्री भक्तों का नया धाम धाम होगा. भविष्य बद्री जोशीमठ से करीब 25 किलोमीट की दूरी पर है. जब बद्रीनाथ धाम नहीं रहेगा, तब भविष्य बद्री में विष्णु को नरसिंह रूप में पूजा जाएगा.

वहीं भविष्य केदार भी जोशीमठ क्षेत्र में स्थित है. यहां एक शिवलिंग और माता पार्वती की प्रतिमा है. आने वाले समय में यह ऐसा स्थान होगा जहां भविष्य में शिव की पूजा की जाएगी. मान्यता है कि इसी क्षेत्र में आदि शंकराचार्य ने भी तपस्या की थी.

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Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

पल्लवी कुमारी (Pallawi Kumari)

धर्म-ज्योतिष विशेषज्ञ | डिजिटल मीडिया पत्रकार | कंटेंट स्ट्रैटेजिस्ट
पल्लवी कुमारी एक कुशल डिजिटल पत्रकार और कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें मीडिया उद्योग में 7 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC, नई दिल्ली) की पूर्व छात्रा पल्लवी, जटिल धार्मिक और ज्योतिषीय विषयों को शोध-आधारित, सरल और प्रभावी भाषा में प्रस्तुत करने में विशेषज्ञता रखती हैं.

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