Shardiya Navratri 2025: त्रिपुरा सुंदरी मंदिर रहस्यमय शक्तिपीठ, जहां देवी सती के चरण गिरे! जानें नवरात्रि पूजा विधि और महत्व
Mata Tripura Sundari Temple: त्रिपुरा सुंदरी मंदिर, जिसे माताबाड़ी भी कहते हैं, यह 15 वीं सदी का शक्तिपीठ है. यह देवी सती के दाहिने पैर गिरने का स्थान माना जाता है और तंत्र साधना के लिए प्रसिद्ध है.

Mata Tripura Sundari Temple: माता त्रिपुर सुंदरी मंदिर पूर्वोत्तर भारत के त्रिपुरा राज्य में स्थित एक महत्वपूर्ण और प्राचीन शक्तिपीठ है, जिसे स्थानीय लोग "माताबाड़ी" भी कहते हैं. 15वीं शताब्दी में महाराजा धन माणिक्य द्वारा निर्मित इस मंदिर को देवी सती के दाहिने चरण गिरने के स्थान के रूप में मान्यता प्राप्त है और यह तंत्र साधना के लिए भी प्रसिद्ध है.
देवी त्रिपुर सुंदरी की काले ग्रेनाइट पत्थर की मूर्ति मंदिर का मुख्य आकर्षण है और यहां नवरात्रि व दीपावली पर विशेष पूजा-अर्चना होती है.
त्रिपुरा सुंदरी मंदिर का इतिहास क्या है?
त्रिपुर सुंदरी दस महाविद्याओं में से एक सौम्य कोटी की माता हैं. यहां उनके साथ विराजमान भैरव को त्रिपुरेश के नाम से जाना जाता है. माता की इस पीठ को कूर्मपीठ भी कहा जाता है.
त्रिपुर सुंदरी मंदिर का रहस्य क्या है?
त्रिपुरा के गोमती जिले में स्थित त्रिपुरा सुंदरी मंदिर न केवल 524 साल पुराना एक पवित्र धाम है, बल्कि यह देवी शक्ति का जीवंत प्रतीक भी माना जाता है.
मान्यता है कि, यहां माता सती का दाहिना पैर गिरा था, इसी कारण इसे शक्तिपीठ का दर्जा प्राप्त हुआ. यहां पहुंचने वाला हर भक्त एक अद्भुत दिव्य शांति और ऊर्जा का अनुभव करता है.
त्रिपुरा सुंदरी मंदिर क्यों प्रसिद्ध है?
यह देश के सबसे पवित्र हिंदू तीर्थस्थलों में से एक है और असम के कामाख्या मंदिर के बाद, पूर्वोत्तर भारत के इसी मंदिर में सबसे ज्यादा श्रद्धालु आते हैं. त्रिपुरा राज्य का नाम इसी मंदिर के नाम पर रखा गया है.
शारदीय नवरात्रि में त्रिपुरा सुंदरी में पूजा कैसे होती है?
त्रिपुरा सुंदरी मंदिर में शारदीय नवरात्र में मां दुर्गा के नौ अवतारों की पूजा बड़े उत्साह और भक्ति से होती है. मंदिर एक 'कूर्म पीठ' यानी कछुए के आकार की पहाड़ी पर स्थित है और पूर्वी भारत के 51 शक्तिपीठों में से एक है.
पूजा में विशेष रूप से देवी त्रिपुरसुंदरी का आह्वान किया जाता है और मंत्र 'ॐ ह्रीं श्रीं त्रिपुर सुंदरीयै नमः' का जाप किया जाता है. भक्त विभिन्न मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए अनार का भोग लगाते हैं.
त्रिपुरा सुंदरी मंदिर में शारदीय नवरात्र की पूजा विधि और सामग्री
पूजा का समय
नवरात्र के दौरान, खास तौर पर सुबह 9 बजे या रात्रि के 9 बजे से 11 बजे के बीच पूजा की जाती है.
मंत्र जाप
कमलगट्टे की माला से 'ॐ श्रीं ऊं' या 'ॐ ह्रीं श्रीं त्रिपुर सुंदरीयै नमः' मंत्र का जाप करें.
भोग
देवी त्रिपुरसुंदरी को अनार का भोग चढ़ाया जाता है.
अन्य सामग्री
पूजा में धूप, दीप, रोली, चंदन, नारियल, फूल और मिष्ठान आदि का उपयोग किया जाता है.
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.
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