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रक्षाबंधन के बाद राखी कब उतारें? इसे कूड़े में फेंकने से पहले जान लें सही नियम

Raksha Bandhan 2026: रक्षाबंधन का त्योहार 28 अगस्त 2026 को मनाया जाएगा. राखी बांधने के बाद कब उतारना चाहिए, क्या है नियम जान लें.

Raksha Bandhan 2026: आज रक्षाबंधन मनाया जा रहा है. राखी भाई की कलाई पर बांधा जाने वाला ऐसा सूत्र है जिसमें प्रेम, जिम्मेदारी, मंगलकामना और पारिवारिक संबंधों को मजबूत करने का भाव जुड़ा है, इसलिए रक्षाबंधन पर बहन भाई के लिए पूजा करती है, तिलक लगाती है और रक्षा सूत्र बांधती है. राखी बांधने के बाद कब उतारना चाहिए, उतारने के बाद कहां रखें ये जानना बहुत जरुरी है. 

राखी कितने दिन बाद उतारें?

  • धार्मिक मान्यता के अनुसार रक्षाबंधन के दिन बांधी गई राखी को कम से कम कुछ दिन कलाई पर रखना शुभ माना जाता है.
  • कई परिवारों में इसे 3 से 7 दिन तक रखने की परंपरा है.
  • वहीं कुछ लोग जन्माष्टमी तक राखी बांधे रखते और उस दिन पूजा के बाद उतारते हैं.

राखी उतारते समय क्या करें?

  • राखी उतारने से पहले भगवान का स्मरण करें. सुबह या किसी शुभ समय में इसे कलाई से निकालें.
  • इधर-उधर फेंकने के बजाय सम्मानपूर्वक किसी साफ स्थान पर रखें.
  • हिंदू धर्म में रक्षा सूत्र को शुभ वस्तु माना जाता है इसे कचरे में न फेंके. 
  • राखी उतारने के बाद आप इसे जलाशय में प्रवाहित कर सकते हैं. धातु से बनी रखी को विसर्जित न करें.
  • घर के बगीचे में किसी साफ जगह जमीन में गाड़ दें. 
  • निर्माल्य में रख दें. निर्माल्य अर्थात भगवान को चढ़ी हुई पूजा सामग्री.

राखी अपने आप टूट जाए तो?

राखी का अपने आप टूट जाए या किसी कारणवश खुल जाए तो घबराने या इसे अपशकुन मानने की जरूरत नहीं है. राखी को सम्मानपूर्वक उतारकर किसी स्वच्छ स्थान पर रख दें. रक्षा सूत्र का उद्देश्य भाई की मंगलकामना और रक्षा की भावना से जुड़ा है, ऐसे में नकारात्मक भाव मन में न लाएं.

FAQ

  1. राखी कितने दिन तक कलाई पर बांधे रखनी चाहिए?
    धार्मिक मान्यता के अनुसार राखी को तुरंत उतारने के बजाय कुछ दिन तक कलाई पर रखना शुभ माना जाता है. कई परिवारों में इसे 3 से 7 दिन तक रखने की परंपरा है, जबकि कुछ लोग जन्माष्टमी तक राखी बांधे रखते हैं.
  2. राखी उतारने के बाद उसका क्या करना चाहिए?
    राखी उतारने से पहले भगवान का स्मरण करें और इसे सम्मानपूर्वक कलाई से निकालें. इसके बाद राखी को किसी साफ स्थान पर रखें. इसे इधर-उधर या कूड़े में फेंकने से बचना चाहिए.
  3. उतारी हुई राखी को कहां रख सकते हैं?
    राखी को निर्माल्य में रखने, घर के बगीचे में किसी साफ जगह जमीन में दबाने या प्राकृतिक धागे की राखी को जल में प्रवाहित करने की परंपरा मिलती है. धातु या प्लास्टिक वाली राखी को जल में विसर्जित नहीं करना चाहिए.
  4. राखी अपने आप टूट जाए या खुल जाए तो क्या करें?
    राखी के अपने आप टूटने या खुल जाने को अपशकुन मानने की जरूरत नहीं है. ऐसी स्थिति में उसे सम्मानपूर्वक उतारकर किसी स्वच्छ स्थान पर रख दें और बाद में उचित तरीके से उसका निस्तारण करें.

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Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

जागृति सोनी बरसले (Jagriti Soni Barsaley)

धर्म, ज्योतिष और भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं पर शोध आधारित लेखन करने वाली डिजिटल पत्रकार

जागृति सोनी बर्सले धर्म, ज्योतिष, वास्तु और भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं से जुड़े विषयों की अनुभवी डिजिटल पत्रकार और लेखिका हैं. उन्हें डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग 10 वर्षों का अनुभव है. वर्तमान में वह ABP Live (Abplive.com) में बतौर कंसल्टेंट कार्यरत हैं, जहां वह व्रत-त्योहार जैसे नवरात्रि, करवा चौथ, दिवाली, होली, एकादशी, प्रदोष व्रत, हरियाली तीज आदि, रमजान, धार्मिक मान्यताओं, ज्योतिषीय घटनाओं, शुभ मुहूर्त, वास्तु और फेंगशुई, पंचांग जैसे विषयों पर शोध आधारित और प्रमाणिक लेख लिखती हैं.

विशेषज्ञता (Expertise)

जागृति सोनी बर्सले विशेष रूप से इन विषयों पर लेखन करती हैं:

  • व्रत-त्योहार और भारतीय धार्मिक परंपराएं
  • वैदिक ज्योतिष और ग्रह-नक्षत्र आधारित घटनाएं
  • शुभ मुहूर्त और धार्मिक विधि-विधान
  • वास्तु शास्त्र और फेंगशुई
  • आध्यात्मिक मान्यताएं और सांस्कृतिक परंपराएं

उनके लेखों में धार्मिक विषयों को केवल आस्था के दृष्टिकोण से नहीं बल्कि शास्त्रीय स्रोतों और प्रमाणिक ग्रंथों के आधार पर प्रस्तुत किया जाता है.

शिक्षा और पृष्ठभूमि

जागृति सोनी बर्सले ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से की है.

उन्होंने अपने करियर की शुरुआत दैनिक भास्कर डॉट कॉम से की, जहां डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने धर्म, समाज और संस्कृति से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर लेख लिखे.

डिजिटल मीडिया में काम करते हुए उन्होंने टेक्स्ट और वीडियो दोनों फॉर्मेट में काम किया है और वीडियो सेक्शन में सीनियर प्रोड्यूसर के रूप में भी लंबे समय तक योगदान दिया है. इस अनुभव ने उन्हें आधुनिक डिजिटल पत्रकारिता के विभिन्न फॉर्मेट को समझने और प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करने की क्षमता दी है.

शास्त्रीय अध्ययन और शोध

जागृति सोनी बर्सले की विशेष रुचि धर्म और ज्योतिष के शास्त्रीय अध्ययन में है.

उन्हें प्राचीन धार्मिक ग्रंथों जैसे:

  • धर्म सिंधु
  • मुहूर्त चिंतामणि
  • शकुन शास्त्र
  • वास्तु

का अच्छा ज्ञान है. इन ग्रंथों के आधार पर वह व्रत-त्योहार, पूजा-विधि, ज्योतिषीय घटनाओं और मुहूर्त से जुड़े विषयों को सरल, प्रमाणिक और शोधपरक तरीके से पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास करती हैं.

योगदान

जागृति सोनी बर्सले एक फ्रीलांस लेखक के रूप में भी कई मंचों पर आध्यात्म, भारतीय संस्कृति और ज्योतिष से जुड़े विषयों पर लेख लिख चुकी हैं.

उनका उद्देश्य धार्मिक और आध्यात्मिक विषयों को सरल भाषा में विश्वसनीय जानकारी के साथ प्रस्तुत करना है, ताकि पाठक इन विषयों को समझ सकें और सही जानकारी प्राप्त कर सकें.

व्यक्तिगत रुचियां

अध्यात्म और भारतीय परंपराओं के अध्ययन के प्रति उनकी गहरी रुचि है. खाली समय में उन्हें आध्यात्मिक और ज्ञानवर्धक पुस्तकें पढ़ना पसंद है. यह अध्ययन उनके लेखन को और अधिक गहन, तथ्यपूर्ण और संदर्भ आधारित बनाता है.

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