Premanand Ji Maharaj: प्रेमानंद जी महाराज ने पाप पुण्य को लेकर बता दी ये बात
Premanand Ji Maharaj Anmol Vachan: प्रेमानंद जी महाराज के सुविचार आपके जीवन को एक नई दिशा दे सकते हैं. यहां पढ़ें अनमोल वचन और जानें कलियुग में जीव का उद्धार कैसे हो सकता है?

Premanand Ji Maharaj Vachan: प्रेमानंद जी महाराज एक महान संत और विचारक हैं जो जीवन का सच्चा अर्थ समझाते और बताते हैं. प्रेमानंद जी के अनमोल विचार जीवन को सुधारने और संतुलन बनाएं रखने में मार्गदर्शन करते हैं.
नाम जप करो, भगवान की शरण में चले जाओ. अगर हम बात करें एक केस की तो आजीवन कारावास होता है, लेकिन मनुष्य अपने जीवन में कितने पाप करता है की युग-युग बित जाए हम पाप नहीं भोग पाएंगे. भगवान हैं अखिल भम्रांडों के स्वामी तो भगवान का नाम जप करना चाहिए. 'नाम संकीर्तनं यस्य सर्व पाप प्रणाशनम्' श्लोक, श्रीमद्भागवत महापुराण के अंतिम श्लोक में कहा गया है और इसका अर्थ है कि भगवान का नाम जप सभी पापों को नष्ट कर देता है.
अबलौं नसानी, अब न नसैहौं प्रेमानंद जी माहाराज का कहना है कि यह हमे नियम लेना होगा कि जो-जो हमने जो भी पाप किए उनको याद करो और जलो, और प्रण लो और आगे कभी मत करो और यदि हम भगवान का नाम जप करेंगे तो पवित्र हो जाएंगे. लेकिन अगर आप नाम जप भी कर रहे हैं और पाप भी कर रहे हैं तो आपके पापों की संख्या और बढ़ती जाएगी.
पाप नष्ट तभी होंगे जब नाम जप करेंगे और नियम बना लें की आज से पाप नहीं करेंगे. अबलौं नसानी, अबलौं नसानी, अब न नसैहौं, फिर भगवान क्षमा कर देंगे, और हमारा हद्वय निष्पाप हो जाएगा.
अंतःकरण को पवित्र करने का एक ही उपाय है पहला अब जो गलती हुई है उसे हम वापस नहीं करेंगे और नाम जप करें. अगर नाम जप करते हुए , पाप वर्तमान में होता रहा तो बात बनेगी नहीं. जब पाप छुटेगा तब नाम अपना प्रभाव दिखाएगा.'सद्गुरु वैद्य वचन विश्वासा' का मतलब है कि सद्गुरु के वचनों पर अचल विश्वास रखना चाहिए.
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