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PM Modi Kashi Vishwanath: क्या है षोडोपचार पूजा ? पीएम मोदी ने आज काशी में किया ये अनुष्ठान, जानें महत्व

PM Modi Kashi Puja: वाराणसी दौरे के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी ने काशी विश्वनाथ मंदिर में षोडपोचार विधि से पूजा की. हिंदू धर्म में इस पूजा पद्धति का क्या महत्व है, इसमें कैसे किया जाता है पूजन जान लें.

PM Modi Kashi Puja: पीएम नरेंद्र मोदी 29 अप्रैल 2026 वाराणसी दौरे के दौरान काशी विश्वनाथ मंदिर बाबा विश्वनाथ की विशेष पूजा-अर्चना की. इस दौरान उन्होंने षोडशोपचार विधि से पूजन किया, जिसे भारतीय आध्यात्मिक परंपरा में अत्यंत विस्तृत और पूर्ण पूजा पद्धति माना जाता है.

काशी विश्वनाथ मंदिर हिंदू धर्म के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है और मान्यता है कि यहां सच्चे मन से की गई पूजा विशेष फलदायी होती है. आइए जानते हैं क्या है षोडोपचार पूजा विधि और हिंदू धर्म में इसे सबसे श्रेष्ठ क्यों माना जाता है.

क्या है षोडोपचार पूजा

षोडोपचार पूजा का अर्थ है, भगवान की 16 विधियों (उपचारों) से सेवा और आराधना करना.

संस्कृत में “षोडश” = 16 और “उपचार” = सेवा. यह पूजा विधि वैदिक और पुराणिक परंपराओं में सबसे पूर्ण और शास्त्रीय मानी जाती है.

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हिंदू धर्म में देवी-देवताओं की आराधना एक ही तरीके से नहीं, बल्कि अलग-अलग विधियों से की जाती है. इन विधियों का अंतर मुख्य रूप से पूजा में शामिल उपचारों (सेवाओं) की संख्या और विस्तार पर आधारित होता है.

  1. पंचोपचार पूजा - यह पूजा का सबसे सरल रूप है, जिसमें पांच मुख्य अर्पण गंध, पुष्प, धूप, दीप और नैवेद्य के माध्यम से भगवान की उपासना की जाती है. दैनिक पूजा में यह विधि अधिक प्रचलित है.
  2. दशोपचार पूजा - इसमें पूजा के दस चरण होते हैं, जो पंचोपचार से थोड़ा अधिक विस्तृत माने जाते हैं. विशेष अवसरों या व्रत-त्योहारों पर इस विधि का पालन किया जाता है.
  3. षोडशोपचार पूजा - षोडशोपचार सबसे पूर्ण और विस्तृत पूजा पद्धति है, जिसमें भगवान की सेवा 16 अलग-अलग चरणों में की जाती है इसमें आवाहन से लेकर विसर्जन तक हर प्रक्रिया को विस्तार से निभाया जाता है, जिससे पूजा अधिक प्रभावशाली और शास्त्रीय बनती है.

इस विधि का मूल भाव यह है कि उपासक अपने आराध्य को अतिथि स्वरूप मानकर उनकी सेवा 16 क्रमबद्ध चरणों में करता है, जिससे भक्ति और समर्पण का सर्वोच्च रूप प्रकट होता है.

षोडोपचार पूजा विधि

यह पूजा विधि प्रमुख धार्मिक अनुष्ठानों, उत्सवों और विशेष पूजन के लिए उपयोग की जाती है.  षोडशोपचार पूजा सबसे विस्तृत और गहन पूजा विधि है.

  1. आवाहन: भगवान का आह्वान करना.
  2. आसन: भगवान को आसन प्रदान करना.
  3. पाद्य: भगवान के चरण धोने के लिए जल अर्पित करना.
  4. अर्घ्य: भगवान को अभिषेक के लिए जल चढ़ाना.
  5. आचमन: भगवान को मुख शुद्धि के लिए जल प्रदान करना.
  6. स्नान: भगवान को स्नान कराना.
  7. वस्त्र: भगवान को वस्त्र अर्पित करना.
  8. अलंकार: भगवान को आभूषण पहनाना.
  9. गंध: चंदन और सुगंधित पदार्थ अर्पित करना.
  10. पुष्प: फूलों से भगवान का पूजन करना.
  11. धूप: धूप जलाकर भगवान को अर्पित करना.
  12. दीप: दीपक जलाकर भगवान को प्रकाश अर्पित करना.
  13. नैवेद्य: भगवान को भोजन या मिठाई का भोग लगाना.
  14. ताम्बूल: भगवान को पान या सुपारी अर्पित करना.
  15. नीराजन: आरती करना.
  16. प्रदक्षिणा और नमस्कार: भगवान की परिक्रमा और नमस्कार करना.

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Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

जागृति सोनी बरसले (Jagriti Soni Bursle)

धर्म, ज्योतिष और भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं पर शोध आधारित लेखन करने वाली डिजिटल पत्रकार

जागृति सोनी बर्सले धर्म, ज्योतिष, वास्तु और भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं से जुड़े विषयों की अनुभवी डिजिटल पत्रकार और लेखिका हैं. उन्हें डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग 10 वर्षों का अनुभव है. वर्तमान में वह ABP Live (Abplive.com) में बतौर कंसल्टेंट कार्यरत हैं, जहां वह व्रत-त्योहार जैसे नवरात्रि, करवा चौथ, दिवाली, होली, एकादशी, प्रदोष व्रत, हरियाली तीज आदि, धार्मिक मान्यताओं, ज्योतिषीय घटनाओं, शुभ मुहूर्त, वास्तु और फेंगशुई, पंचांग जैसे विषयों पर शोध आधारित और प्रमाणिक लेख लिखती हैं.

विशेषज्ञता (Expertise)

जागृति सोनी बर्सले विशेष रूप से इन विषयों पर लेखन करती हैं:

  • व्रत-त्योहार और भारतीय धार्मिक परंपराएं
  • वैदिक ज्योतिष और ग्रह-नक्षत्र आधारित घटनाएं
  • शुभ मुहूर्त और धार्मिक विधि-विधान
  • वास्तु शास्त्र और फेंगशुई
  • आध्यात्मिक मान्यताएं और सांस्कृतिक परंपराएं

उनके लेखों में धार्मिक विषयों को केवल आस्था के दृष्टिकोण से नहीं बल्कि शास्त्रीय स्रोतों और प्रमाणिक ग्रंथों के आधार पर प्रस्तुत किया जाता है.

शिक्षा और पृष्ठभूमि

जागृति सोनी बर्सले ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से की है.

उन्होंने अपने करियर की शुरुआत दैनिक भास्कर डॉट कॉम से की, जहां डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने धर्म, समाज और संस्कृति से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर लेख लिखे.

डिजिटल मीडिया में काम करते हुए उन्होंने टेक्स्ट और वीडियो दोनों फॉर्मेट में काम किया है और वीडियो सेक्शन में सीनियर प्रोड्यूसर के रूप में भी लंबे समय तक योगदान दिया है. इस अनुभव ने उन्हें आधुनिक डिजिटल पत्रकारिता के विभिन्न फॉर्मेट को समझने और प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करने की क्षमता दी है.

शास्त्रीय अध्ययन और शोध

जागृति सोनी बर्सले की विशेष रुचि धर्म और ज्योतिष के शास्त्रीय अध्ययन में है.

उन्हें प्राचीन धार्मिक ग्रंथों जैसे:

  • धर्म सिंधु
  • मुहूर्त चिंतामणि

का अच्छा ज्ञान है. इन ग्रंथों के आधार पर वह व्रत-त्योहार, पूजा-विधि, ज्योतिषीय घटनाओं और मुहूर्त से जुड़े विषयों को सरल, प्रमाणिक और शोधपरक तरीके से पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास करती हैं.

योगदान

जागृति सोनी बर्सले एक फ्रीलांस लेखक के रूप में भी कई मंचों पर आध्यात्म, भारतीय संस्कृति और ज्योतिष से जुड़े विषयों पर लेख लिख चुकी हैं.

उनका उद्देश्य धार्मिक और आध्यात्मिक विषयों को सरल भाषा में विश्वसनीय जानकारी के साथ प्रस्तुत करना है, ताकि पाठक इन विषयों को समझ सकें और सही जानकारी प्राप्त कर सकें.

व्यक्तिगत रुचियां

अध्यात्म और भारतीय परंपराओं के अध्ययन के प्रति उनकी गहरी रुचि है. खाली समय में उन्हें आध्यात्मिक और ज्ञानवर्धक पुस्तकें पढ़ना पसंद है. यह अध्ययन उनके लेखन को और अधिक गहन, तथ्यपूर्ण और संदर्भ आधारित बनाता है.

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