Hariyali Teej 2026: NRI महिलाएं सावधान! 12 अगस्त ग्रहण, फिर कैसे मनाएं तीज?
Hariyali Teej 2026: 12 अगस्त 2026 के सूर्य ग्रहण के बीच NRI महिलाएं हरियाली तीज को लेकर रहें सावधान. जानें विदेश में सूतक कब मान्य होगा, पूजा कैसे करें और ग्रहण के बाद तीज की तैयारी कैसे करें.

Hariyali Teej 2026: विदेश में रहने वाली भारतीय महिलाओं के लिए हरियाली तीज सिर्फ एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि अपनी मिट्टी, परिवार और परंपराओं से जुड़े रहने का खूबसूरत अवसर है. सात समंदर पार रहने के बावजूद मेहंदी की खुशबू, हरी चूड़ियों की खनक, तीज के गीत और भगवान शिव-पार्वती की पूजा महिलाओं को भारत की यादों से जोड़ देती है.
लेकिन, इस साल 12 अगस्त 2026 को होने वाले पूर्ण सूर्य ग्रहण के कारण विदेशों में रहने वाली NRI महिलाओं के बीच सूर्य ग्रहण, सूतक और पूजा को लेकर कई सवाल हैं. सबसे पहले तारीख को लेकर एक जरूरी स्पष्टता जरूरी है 12 अगस्त को सूर्य ग्रहण और हरियाली अमावस्या है, जबकि हरियाली तीज 15 अगस्त 2026 को है.
इसलिए अगर आप विदेश में हैं, तो सूर्य ग्रहण के नियम और हरियाली तीज की पूजा को अलग-अलग समझना आपके लिए ज्यादा उपयोगी रहेगा.
12 अगस्त 2026 को कहां दिखाई देगा सूर्य ग्रहण?
NASA के अनुसार 12 अगस्त 2026 का सूर्य ग्रहण ग्रीनलैंड, आइसलैंड, उत्तरी रूस, अटलांटिक महासागर, स्पेन और पुर्तगाल के एक छोटे हिस्से में पूर्ण सूर्य ग्रहण के रूप में दिखाई देगा. इसके अलावा यूरोप के बड़े हिस्से, उत्तरी अमेरिका और उत्तर-पश्चिमी अफ्रीका के कई क्षेत्रों में आंशिक सूर्य ग्रहण देखा जा सकेगा.
उदाहरण के लिए लंदन में ग्रहण आंशिक होगा, जबकि रेक्याविक और स्पेन के कुछ हिस्सों में पूर्ण ग्रहण दिखाई देगा. NASA के मुताबिक लंदन में ग्रहण का अधिकतम चरण स्थानीय समय के अनुसार शाम के आसपास होगा.
भारत में यह सूर्य ग्रहण दिखाई नहीं देगा. इसलिए भारत में रहने वाले लोगों और ऐसे NRI परिवारों के लिए, जहां ग्रहण स्थानीय रूप से दिखाई नहीं देता, सूतक को लेकर वही नियम लागू करना जरूरी नहीं माना जाता जो दृश्य ग्रहण वाले स्थानों में परंपरागत रूप से माने जाते हैं.
विदेश में सूतक कब मानें?
धार्मिक परंपराओं में सूर्य ग्रहण से पहले सूतक की अवधि को लेकर मान्यता है कि दृश्य ग्रहण वाले स्थान पर ग्रहण से लगभग 12 घंटे पहले सूतक शुरू होता है. लेकिन, यह धार्मिक मान्यता है, वैज्ञानिक नियम नहीं, और अलग-अलग संप्रदायों व पंचांग परंपराओं में इसके पालन में अंतर हो सकता है.
इसलिए NRI महिलाओं को अपने शहर के स्थानीय ग्रहण समय और अपने परिवार की धार्मिक परंपरा के आधार पर निर्णय लेना चाहिए. केवल यह मान लेना कि पूरे देश में एक ही समय पर सूतक शुरू होगा, सही तरीका नहीं है.
सूतक और ग्रहण के दौरान घर के मंदिर में क्या करें?
जिन परिवारों में सूतक की परंपरा मानी जाती है, वे ग्रहण से पहले पूजा स्थल के कपाट बंद कर सकते हैं या मंदिर को पर्दे से ढक सकते हैं. परंपरागत मान्यता के अनुसार इस अवधि में देवी-देवताओं की प्रतिमाओं को स्पर्श करने के बजाय मानसिक रूप से भगवान का ध्यान और मंत्र जाप किया जाता है.
हरियाली तीज भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित पर्व है, इसलिए ग्रहण के समय भी NRI महिलाएं “ॐ नमः शिवाय” या “ॐ उमामहेश्वराभ्यां नमः” जैसे मंत्रों का मानसिक जाप कर सकती हैं.
क्या ग्रहण के दौरान खाना-पीना जरूरी रूप से बंद करना चाहिए?
यह एक महत्वपूर्ण विषय है. ग्रहण के दौरान भोजन न करने, भोजन में तुलसी डालने या कुश रखने जैसी बातें धार्मिक और पारंपरिक मान्यताओं से जुड़ी हैं, इन्हें वैज्ञानिक रूप से भोजन की सुरक्षा का प्रमाण नहीं माना जाना चाहिए.
बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं या किसी स्वास्थ्य समस्या वाले व्यक्ति को केवल धार्मिक परंपरा के कारण भोजन-पानी से वंचित नहीं करना चाहिए. स्वास्थ्य संबंधी जरूरत होने पर डॉक्टर की सलाह को प्राथमिकता दें.
इसी तरह ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाओं के चाकू, कैंची या सुई इस्तेमाल न करने जैसी मान्यताओं का कोई वैज्ञानिक आधार स्थापित नहीं है. ऐसी परंपराओं का पालन व्यक्तिगत आस्था के अनुसार किया जा सकता है, लेकिन इन्हें चिकित्सकीय सलाह का विकल्प नहीं समझना चाहिए.
ग्रहण खत्म होने के बाद क्या करें?
अगर आपका परिवार सूतक और ग्रहण से जुड़े पारंपरिक नियमों का पालन करता है, तो ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान करना, साफ कपड़े पहनना और पूजा स्थल की सफाई करना परंपरा का हिस्सा हो सकता है.
इसके बाद घर के मंदिर में दीपक जलाकर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जा सकती है. हरियाली तीज के लिए महिलाएं सिंदूर, बिंदी, चूड़ियां, मेहंदी और अन्य सुहाग सामग्री अर्पित कर सकती हैं.
दान भी इस पर्व की भावना को सुंदर बनाता है. विदेश में रहने वाली महिलाएं किसी स्थानीय मंदिर, भारतीय सामुदायिक संगठन या जरूरतमंद व्यक्ति की मदद कर सकती हैं.
विदेश में हरियाली तीज कैसे मनाएं?
हरियाली तीज के लिए भारत जैसी पूरी पूजा सामग्री विदेश में मिलना हमेशा आसान नहीं होता. लेकिन इससे त्योहार की खुशी कम नहीं होती.
अगर मिट्टी की शिव-पार्वती प्रतिमा उपलब्ध नहीं है, तो साफ स्थान पर भगवान शिव और माता पार्वती का चित्र रखकर पूजा की जा सकती है. पूजा में उपलब्ध फूल, फल, रोली, अक्षत और दीपक का इस्तेमाल किया जा सकता है.
घेवर न मिले तो घर पर हलवा, मालपुआ, खीर या कोई पारंपरिक मिठाई बनाकर भोग लगाया जा सकता है. हरी चूड़ियां और मेहंदी मिल जाए तो त्योहार का रंग और भी निखर जाएगा.
NRI महिलाएं ऐसे मनाएं तीज का सखी मिलन:
विदेश में रहने वाली महिलाओं के लिए सबसे खूबसूरत तरीका है वर्चुअल तीज मिलन.
भारत में मां, बहन या सहेलियों के साथ वीडियो कॉल पर जुड़ें. साथ में तीज के गीत गाएं, मेहंदी लगाएं, सोलह श्रृंगार करें और पूजा के बाद व्रत कथा सुनें. अगर शहर में भारतीय समुदाय मौजूद है तो कुछ परिवार मिलकर छोटा-सा तीज कार्यक्रम भी आयोजित कर सकते हैं.
इस तरह त्योहार सिर्फ पूजा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि अगली पीढ़ी के बच्चों को भी भारतीय संस्कृति और पारिवारिक परंपराओं से जोड़ने का माध्यम बनेगा.
सबसे जरूरी बात: स्थानीय समय जरूर देखें:
12 अगस्त 2026 के सूर्य ग्रहण के मामले में एक ही नियम सभी NRI महिलाओं पर लागू नहीं किया जा सकता, क्योंकि ग्रहण हर स्थान पर एक जैसा दिखाई नहीं देगा. NASA के अनुसार लंदन, न्यूयॉर्क, मैड्रिड और रेक्याविक जैसे शहरों में ग्रहण का समय और उसकी स्थिति अलग-अलग होगी.
इसलिए विदेश में रहने वाली महिलाओं को अपने स्थानीय शहर के eclipse timing, परिवार की धार्मिक परंपरा और स्थानीय पंचांग को ध्यान में रखकर पूजा का समय तय करना चाहिए.
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.
















