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Sawan Shivratri 2026: सावन शिवरात्रि पर 4 प्रहर, 4 खास वस्तु, 4 मंत्र...आज रात इस तरह करें पूजा, महादेव होंगे प्रसन्न

Sawan Shivratri 2026: शिव पुराण में सावन शिवरात्रि की रात को शिव पूजा का महत्व अधिक बताया गया है. इस रात 4 प्रहर में 4 खास वस्तु और 4 शक्तिशाली मंत्रों के साथ अभिषेक करें.

Sawan Shivratri 2026: स्कंद पुराण के शिवरात्रि माहात्म्य में कहा गया है कि कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी की रात शिवरात्रि कहलाती है. महाशिवरात्रि के बाद सावन की शिवरात्रि बहुत खास मानी जाती है. कहते हैं कि इस रात शिवजी समस्त शिविलंग में उपस्थित होती है. इसी कारण इस रात शिवपूजन और जागरण को विशेष महत्व दिया जाता है. शिवरात्रि की रात को चार प्रहर में बांटकर पूजा करने की परंपरा का उल्लेख शिव पुराण में मिलता है. 

चार प्रहर शिवरात्रि की शाम से शुरू होकर अगले दिन सुबह तक का समय होता है. इन्हें अलग-अलग समय में बांटा गया है. इस दौरान 4 खास वस्तु और 4 विशेष मंत्रों से शिव पूजा करना मनोकामना सिद्ध करने वाला माना गया है. 

सावन शिवरात्रि 2026 चार प्रहर

  • प्रथम प्रहर - शाम 7.06 - 9.45
  • दूसरा प्रहर - रात 9.45 -12.45 ​
  • तीसरा प्रहर- रात 12.45 - सुबह 3.7 मिनट 
  • चौथा प्रहर - सुबह 3.7 - सुबह 5.49 

पहला प्रहर: दूध से अभिषेक

शिवरात्रि के पहले प्रहर में भगवान शिव का दूध से अभिषेक करें. इस दौरान ॐ ह्रीं ईशानाय नमः मंत्र का जाप करते रहें. मान्यता है कि प्रथम प्रहर की यह पूजा जीवन में मौजूद विभिन्न दोषों और नकारात्मक प्रभावों को शांत करने में सहायक होती है. पहले प्रहर की पूजा में बाबा भोलेनाथ को चंदन, वस्त्र, यज्ञोपवीत, आभूषण, सुगन्धित द्रव्य के साथ बेलपत्र, कनेर, धतूरा, मदार, ऋतुपुष्प, नैवेद्य आदि अर्पित करें. धूप-दीप लगाएं.

दूसरा प्रहर: दही से अभिषेक

दूसरे प्रहर में शिवलिंग पर दही अर्पित करते हुए ॐ ह्रीं अघोराय नमः मंत्र का जाप करें. इसके बाद महादेव का ध्यान कर शिव स्तुति करें. धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस प्रहर की पूजा आर्थिक परेशानियों को दूर करने और समृद्धि की कामना के लिए फलदायी मानी जाती है.

तीसरा प्रहर: घी से अभिषेक

तीसरे प्रहर में भगवान शिव का गाय के घी से अभिषेक करें और ॐ ह्रीं वामदेवाय नमः मंत्र का जाप करें. मान्यता है कि इस प्रहर में की गई शिव आराधना विशेष कार्यों में सफलता और मनोकामना पूर्ति के लिए शुभ फल देती है.

चौथा प्रहर: शहद अर्पित करें

रात्रि के चौथे और अंतिम प्रहर में शिवलिंग पर शहद अर्पित करें. साथ ही ॐ ह्रीं सद्योजाताय नमः मंत्र का जाप करते हुए भगवान शिव का ध्यान करें. धार्मिक मान्यता के अनुसार, चौथे प्रहर की पूजा आध्यात्मिक उन्नति और मोक्ष की कामना से जुड़ी मानी जाती है. हर प्रहर की पूजा के बाद आरती करें. सुबह शिव जी आखिरी पूजा के बाद पार्थिव शिवलिंग का विसरजन कर दें. 

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Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. 

जागृति सोनी बरसले (Jagriti Soni Barsaley)

धर्म, ज्योतिष और भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं पर शोध आधारित लेखन करने वाली डिजिटल पत्रकार

जागृति सोनी बर्सले धर्म, ज्योतिष, वास्तु और भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं से जुड़े विषयों की अनुभवी डिजिटल पत्रकार और लेखिका हैं. उन्हें डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग 10 वर्षों का अनुभव है. वर्तमान में वह ABP Live (Abplive.com) में बतौर कंसल्टेंट कार्यरत हैं, जहां वह व्रत-त्योहार जैसे नवरात्रि, करवा चौथ, दिवाली, होली, एकादशी, प्रदोष व्रत, हरियाली तीज आदि, रमजान, धार्मिक मान्यताओं, ज्योतिषीय घटनाओं, शुभ मुहूर्त, वास्तु और फेंगशुई, पंचांग जैसे विषयों पर शोध आधारित और प्रमाणिक लेख लिखती हैं.

विशेषज्ञता (Expertise)

जागृति सोनी बर्सले विशेष रूप से इन विषयों पर लेखन करती हैं:

  • व्रत-त्योहार और भारतीय धार्मिक परंपराएं
  • वैदिक ज्योतिष और ग्रह-नक्षत्र आधारित घटनाएं
  • शुभ मुहूर्त और धार्मिक विधि-विधान
  • वास्तु शास्त्र और फेंगशुई
  • आध्यात्मिक मान्यताएं और सांस्कृतिक परंपराएं

उनके लेखों में धार्मिक विषयों को केवल आस्था के दृष्टिकोण से नहीं बल्कि शास्त्रीय स्रोतों और प्रमाणिक ग्रंथों के आधार पर प्रस्तुत किया जाता है.

शिक्षा और पृष्ठभूमि

जागृति सोनी बर्सले ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से की है.

उन्होंने अपने करियर की शुरुआत दैनिक भास्कर डॉट कॉम से की, जहां डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने धर्म, समाज और संस्कृति से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर लेख लिखे.

डिजिटल मीडिया में काम करते हुए उन्होंने टेक्स्ट और वीडियो दोनों फॉर्मेट में काम किया है और वीडियो सेक्शन में सीनियर प्रोड्यूसर के रूप में भी लंबे समय तक योगदान दिया है. इस अनुभव ने उन्हें आधुनिक डिजिटल पत्रकारिता के विभिन्न फॉर्मेट को समझने और प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करने की क्षमता दी है.

शास्त्रीय अध्ययन और शोध

जागृति सोनी बर्सले की विशेष रुचि धर्म और ज्योतिष के शास्त्रीय अध्ययन में है.

उन्हें प्राचीन धार्मिक ग्रंथों जैसे:

  • धर्म सिंधु
  • मुहूर्त चिंतामणि
  • शकुन शास्त्र
  • वास्तु

का अच्छा ज्ञान है. इन ग्रंथों के आधार पर वह व्रत-त्योहार, पूजा-विधि, ज्योतिषीय घटनाओं और मुहूर्त से जुड़े विषयों को सरल, प्रमाणिक और शोधपरक तरीके से पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास करती हैं.

योगदान

जागृति सोनी बर्सले एक फ्रीलांस लेखक के रूप में भी कई मंचों पर आध्यात्म, भारतीय संस्कृति और ज्योतिष से जुड़े विषयों पर लेख लिख चुकी हैं.

उनका उद्देश्य धार्मिक और आध्यात्मिक विषयों को सरल भाषा में विश्वसनीय जानकारी के साथ प्रस्तुत करना है, ताकि पाठक इन विषयों को समझ सकें और सही जानकारी प्राप्त कर सकें.

व्यक्तिगत रुचियां

अध्यात्म और भारतीय परंपराओं के अध्ययन के प्रति उनकी गहरी रुचि है. खाली समय में उन्हें आध्यात्मिक और ज्ञानवर्धक पुस्तकें पढ़ना पसंद है. यह अध्ययन उनके लेखन को और अधिक गहन, तथ्यपूर्ण और संदर्भ आधारित बनाता है.

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