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Motivational Quotes: दुनिया और अपनों का साथ छूटे तो क्या करें? देवी चित्रलेखा का गहरा संदेश

Motivational Quotes: देवी चित्रलेखा देश की प्रसिद्ध कथावाचिका है, जिनकी सकारात्मक सोच जीवन में नई दिशा दिखाती है. ऐसे में अगर दुनिया और अपनों का साथ छूटे तो पढ़ें देवी चित्रलेखा के मोटिवेशनल कोट्स.

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Motivational Quotes By Devi Chitralekha Ji: वर्तमान समय में इंसान सबसे ज्यादा व्यस्त है, लेकिन उतना ही ज्यादा खाली भी है. मोबाइल, सोशल मीडिया, पैसा, पद और दिखावे की दौड़ ने जीवन को तेज तो बना दिया है, लेकिन भीतर से खोखला भी कर दिया है.

कथावाचिका देवी चित्रलेखा कहती हैं कि इसी भागदौड़ में इंसान सबसे पहले भगवान को भूल जाता है. संसार इतना सच्चा लगने लगता है कि ईश्वर की जरूरत ही महसूस नहीं होती.

लेकिन जब जीवन में संकट आता है, रिश्ते टूटते हैं या मन अशांत होता है, तब समझ आता है कि संसार साथ नहीं देता. ईश्वर ही वह शक्ति है, जो हर परिस्थिति में इंसान का हाथ थामे रहते है. अगर उन्हें ही भुला दिया जाए, तो जीवन का अस्तित्व और उद्देश्य दोनों खो जाते हैं.

इंसान को बस एक सहारे की जरूरत

चित्रलेखा आज के जीवन को भवसागर की संज्ञा देती हैं. वे कहती हैं कि नौकरी की चिंता, कारोबार का दबाव, परिवार की जिम्मेदारियां और मानसिक तनाव यह सब मिलकर जीवन को समुद्र जैसा बना देते हैं. बाहर से सब ठीक दिखता है, लेकिन भीतर इंसान डूब रहा होता है.

वे गोस्वामी जी के उदाहरण से समझाती हैं कि संसार समुद्र के समान है, जिसे पार करना आसान नहीं. लेकिन जब भगवान सहाय बन जाते हैं, तब वही कठिन जीवन बहुत छोटा लगने लगता है.

जैसे गाय के खुर का छोटा सा गड्ढा जिसे बिना सोचे समझे पार कर लिया जाता है. आज भी अगर इंसान भगवान के चरणों को पकड़ ले, तो बड़ी से बड़ी समस्या भी छोटी हो जाती है. चित्रलेखा जी कहती हैं कि ऐसे समय में इंसान को बस एक सच्चे सहारे की जरूरत होती है.

जैसे पानी में बहते हुए व्यक्ति को केवल एक नाव या एक हाथ चाहिए. संसार के लोग अक्सर सलाह तो देते हैं, लेकिन साथ नहीं निभाते. जरूरत पड़ने पर वही लोग पीछे हट जाते हैं. इसलिए भक्त कहता है कि हे प्रभु, इस दुनिया में मेरे लिए आपके अलावा कोई सहारा नहीं है. जब इंसान यह स्वीकार कर लेता है, तभी उसका उद्धार शुरू होता है.

ईश्वर से धन नहीं, प्रेम मांगो

चित्रलेखा के अनुसार आज की सबसे बड़ी समस्या अधीरता है. इंसान तुरंत परिणाम चाहता है, चाहे वह सफलता हो या भगवान की कृपा. लेकिन ईश्वर का मार्ग धैर्य और निरंतरता का है.

वे समझाती हैं कि हर दिन भगवान के सामने बैठकर प्रार्थना करनी चाहिए. उनसे यह कहना चाहिए कि हे प्रभु, आप ही मेरे जीवन के नाविक बनिए और मुझे इस भवसागर से पार उतारिए.

अगर इंसान ऐसा नहीं करता, तो जन्म-जन्मांतर तक यही नाटक चलता रहता है. काम, क्रोध, लोभ और मोह के नाच में इंसान थक जाता है, लेकिन रुकता नहीं. केवल भगवान की कृपा ही इस चक्र को तोड़ सकती है.

वे कहती हैं कि आज का समाज सफलता को केवल धन और पद से मापता है. चित्रलेखा स्पष्ट कहती हैं कि धन मांगने से मन को कभी संतोष नहीं मिलता. जितना मिलता है, उससे ज्यादा की इच्छा पैदा हो जाती है. बड़ी गाड़ी, बड़ा घर और बड़ा बैंक बैलेंस भी मन को शांति नहीं दे पाते. मन हमेशा और चाहता है.

इसलिए वे सिखाती हैं कि भगवान से धन नहीं, प्रेम मांगो. प्रेम मिलने के बाद मन की भूख खत्म हो जाती है. अगर भगवान का प्रेम मिल जाए, तो सारी दुनिया मिल जाती है. और अगर वह प्रेम न मिले, तो सारी संपत्ति भी मिट्टी के समान है.

ईश्वर से बच्चों जैसा करें जिद

देवी चित्रलेखा कहती हैं कि आज का इंसान सबसे ज्यादा थका हुआ है, शरीर से नहीं, मन से थका महसूस करता है. यह थकान तब तक दूर नहीं होती, जब तक इंसान भगवान के चरणों में बैठकर यह न कह दे कि अब मुझे परम विश्राम मिल गया है. जब मन स्वीकार कर लेता है कि मुझे अब कुछ और नहीं चाहिए, केवल आपका प्रेम चाहिए, तभी सच्ची शांति मिलती है.

यही जीवन की असली उपलब्धि है. वे एक उदाहरण देती हैं कि जैसे बच्चा अपने माता-पिता से खिलौना मांगता है. एक दिन नहीं, कई दिन मांगता है. माता-पिता टालते रहते हैं, लेकिन बच्चा जिद नहीं छोड़ता. अंत में माता-पिता को देना ही पड़ता है. वैसे ही भक्त को भी भगवान से प्रेम की जिद करनी चाहिए. एक दिन भगवान भी कृपा करके हृदय को प्रेम से भर देते हैं.

ईश्वर के लिए भगवान को छोड़ना कठिन

चित्रलेखा सिखाती हैं कि दुनिया के लिए भगवान को छोड़ना आसान है, लेकिन भगवान के लिए दुनिया छोड़ना कठिन. फिर भी यही साधना का मार्ग है.

जब इंसान अपने जीवन के केंद्र में ईश्वर को रख लेता है, तो तनाव, भय और असुरक्षा अपने आप कम हो जाते हैं. वर्तमान समय में शांति, संतुलन और सच्चे सुख का यही एकमात्र रास्ता है. भगवान का प्रेम ही जीवन का सबसे बड़ा धन है.

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

 

बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में छोटा-सा गांव है तिलबिहता, जहां 22 साल की कहकशां परवीन रहती हैं. पढ़ाई की शौक कहकशां अपने सपने पूरे करने के लिए लगातार मेहनत कर रही हैं. 25 मार्च 2003 के दिन तिलबिहता गांव में अपनी जिंदगी का सफर शुरू करने वाली कहकशां के पिता मोहम्मद जिकरुल्लाह बिजनेसमैन हैं तो मां नजदा खातून हाउसवाइफ हैं. भाई आमिर आजम, बहन उजमा परवीन, जेबा परवीन, सदफ परवीन और दरख्शां परवीन को वह अपनी ताकत मानती हैं. वहीं, उनकी सबसे अच्छी दोस्त सान्या कुमारी हैं. 

तिलबिहता के ओरेकल पब्लिश स्कूल से स्कूलिंग करने के बाद कहकशां ने हरदी के आरकेएसपी अकैडमी हाई स्कूल से मैट्रिक किया तो जैतपुर स्थित एसआरपीएस कॉलेज से इंटर पास किया. मुजफ्फरपुर के लंगट सिंह कॉलेज से बैचलर ऑफ मास कम्यूनिकेशन (BMC) करने वाली कहकशां को अब अपने फाइनल रिजल्ट का इंतजार है. 

कहकशां की जिंदगी में पढ़ाई के साथ-साथ कई शौक हैं, जो उनकी दिनचर्या को रोचक बनाते हैं. अपने आसपास की खूबसूरत चीजों को कैमरे में कैद करने में माहिर कहकशां को खबरें पढ़ना और पेंटिंग बनाना बेहद पसंद है. इसके अलावा वह खाना बनाना, नमाज पढ़ना, रील्स देखना, गाना सुनना और कॉमेडी वीडियो देखना भी पसंद करती हैं. 

फिल्म संजू का 'कर हर मैदान फतेह' गाना हर मुश्किल वक्त में उन्हें हिम्मत देता है तो आमिर खान, शाहरुख खान और ऐश्वर्या राय बच्चन उनके पसंदीदा सेलेब्स हैं. वहीं, फिल्म चक दे इंडिया से उन्हें कुछ कर दिखाने की प्रेरणा मिलती है. एमएस धोनी, विराट कोहली और सचिन तेंदुलकर उनके फेवरेट क्रिकेटर्स हैं. वहीं, सुबह का वक्त और सर्दी का मौसम उन्हें बेहद पसंद है. कहकशां फोटोग्राफी के जरिए लोगों की कहानियां बयां करना चाहती हैं, जिसके लिए वह लगातार मेहनत कर रही हैं.

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