Mohini Ekadashi 2025: मोहिनी एकादशी मई 2025 में कब है, इस दिन क्या करने से सौभाग्य की प्राप्ति होती है?
Mohini Ekadashi 2025: वैशाख माह की मोहिनी एकादशी का व्रत बहुत पुण्य फलदायी माना जाता है, कहते हैं इससे मोह, लोभ, क्रोध, अहंकार जैसे विकार दूर होते हैं. जीवन में सुख की अनुभूति होती है.

Mohini Ekadashi 2025: धर्म और संसार के कल्याण के लिए श्रीहरि ने 24 अवतार लिए हैं, इसमें एक मात्र उनका स्त्री अवतार था मोहिनी. इसमें उन्हें ऐसे स्त्री रूप में दिखाया गया है जो सभी को मोहित कर ले. उसके मोह में वशीभूत होकर कोई भी सब भूल जाता है, इस अवतार का उल्लेख महाभारत में भी आता है.
वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी के दिन मोहिनी एकादशी मनाई जाती है. मोहिनी एकादशी का व्रत करने वालों के समस्त पाप मिट जाते हैं और उसे नर्क में नहीं जाना पड़ता. इस साल मोहिनी एकादशी कब है जानें.
मोहिनी एकादशी 2025 डेट
मोहिनी एकादशी 8 मई 2025 को है. संसार में इस व्रत से उत्तम दूसरा कोई व्रत नहीं है. इसके माहात्म्य के श्रवण एवं पठन से जो पुण्य प्राप्त होता है, वह पुण्य एक सहस्र गौदान के पुण्य के समान है.
मोहिनी एकादशी 2025 मुहूर्त
वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 7 मई 2025 को सुबह 10 बजकर 19 मिनट पर शुरू होगी और इसका समापन 8 मई 2025 को दोपहर 12 बजकर 29 मिनट पर होगा.
- पूजा मुहूर्त - सुबह 5.35 - सुबह 7.16
- चर (सामान्य) - सुबह 10.37 - दोपहर 1.59
मोहिनी एकादशी 2025 व्रत पारण समय
मोहिनी एकादशी का व्रत पारण 9 मई 2025 को सुबह 5.34 मिनट से सुबह 8.16 मिनट पर किया जाएगा. पारण तिथि के दिन द्वादशी समाप्त होने का समय 2 बजकर 56 मिनट.
क्यों लिया मोहिनी अवतार ?
देवताओं और दानवों में मिलकर समुद्र मंथन किया था. समुद्र मंथन से अलग-अलग कई रत्न निकले. अंत में भगवान धनवंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए. अमृत देवताओं के साथ ही असुर भी पाना चाहते थे. अगर असुर अमृत पी लेते तो वे अमर हो जाते और पूरी सृष्टि में उनका आतंक बढ़ जाता है. असुरों को अमृत न मिले, इसके लिए भगवान विष्णु ने मोहिनी अवतार लिया था.उस दिन वैशाख शुक्ल एकादशी थी. मोहिनी ने चतुराई से देवताओं को अमृत पान करा दिया था.
सौभाग्य प्राप्ति के लिए करें ये काम
मोहिनी एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से मुक्त होने के बाद साफ-सुथरे कपड़े पहनें. भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा के बाद तुलसी की पूजा आरंभ करें. सबसे पहले तुलसी के आस-पास अच्छे से सफाई कर लें. इसके बाद तुलसी के पास दीपक जलाएं और तुलसी जी को लाल चुनरी अर्पित करें. ऐसा करने से साधक को भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का आशीर्वाद मिलता है और घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है.
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