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मोबाइल में चालीसा पढ़ना सही है या गलत? जानें धार्मिक नजरिया और जरूरी नियम

Chlaisa on Mobile: आज के दौर में समय के अभाव के चलते लोग पुस्तक की जगह मोबाइल पर ही पाठ, चालीसा पढ़ने लगे हैं. धार्मिक नजरिए से ऐसा करना सही है या गलत, क्या है नियम जान लें.

Mobile Astrology: आज के दौर में हर काम डिजिटल होता जा रहा है. डिजिटल जमाने में भगवान की पूजा का जरिया भी डिजिटल हो गया है. समय के अभाव में लोग फोन पर ही हवन, पूजन और यहां तक कि श्राद्ध पूजन भी कर लेते हैं.

पहले के जमाने में जहां पाठ के लिए अलग-अलग पुस्तकें घर में हुआ करती थीं, जहां आज मोबाइल में चालीसा, पाठ, स्तोत्र चुटकियों में खुल जाते हैं. डिजिटल दौर ने हमारी जिंदगी को भले ही आसान बना दिया है लेकिन क्या मोबाइल पर पाठ करना उचित है, क्या ऐसा करने पर फल प्राप्त होता है आइए जानते हैं.

मोबाइल पर पाठ करना सही या गलत ?

आज के समय में पूजा-पाठ करने के तरीके बदल रहे हैं लेकिन एस्ट्रोलॉजर अनीष व्यास के अनुसार भक्ति का मूल आधार श्रद्धा, विश्वास और मन की एकाग्रता है. भगवान तक पहुंचने का महत्व माध्यम से ज्यादा भाव है.

कोई व्यक्ति पूरे मन, सम्मान और ध्यान के साथ मोबाइल में देखकर पाठ करता है, तो उसकी प्रार्थना का महत्व कम नहीं माना जाता. क्योंकि बदलती जीवनशैली के कारण हर समय धार्मिक पुस्तक अपने साथ रखना सभी के लिए संभव नहीं होता. ऐसे में ऑफिस, घर से दूर रहते हुए भी मोबाइल में देखकर पाठ करना सुविधाजनक है. शास्त्रों में मानसपूजा को सबसे अधिक महत्व दिया गया है. नित्य कर्म पूजा पुस्तक के अनुसार अगर आप मन से एकाग्र होकर पाठ कर रहे हैं तो प्रार्थना स्वीकार होती है.

मोबाइल में चालीसा पढ़ना सही है या गलत? जानें धार्मिक नजरिया और जरूरी नियम

क्या है नुकसान

नोटिफिकेशन भटकाते ध्यान - मोबाइल पर पाठ करना कंफर्ट है लेकिन मोबाइल पर पाठ करते समय नोटिफिकेशन, कॉल या अन्य ऐप्स ध्यान भटका सकते हैं. ऐसे में पूजा में मन नहीं लगता. ये एकाग्रता को कम

जिस मोबाइल से चालीसा का पाठ उसका बाथरूम में भी इस्तेमाल - मोबाइल का इस्तेमाल सामान्य जीवन के हर काम में होता है और कई लोग उसे बाथरूम तक भी ले जाते हैं, ऐसे में उसी मोबाइल से पाठ करना शास्त्र सम्मत नहीं माना जाता है क्योंकि पारंपरिक पूजा-पद्धतियों में शुचिता (स्वच्छता) और पवित्र वातावरण को महत्व दिया गया है. नित्य कर्म पूजा पुस्तक के अनुसार पूजन में शौच आदि के नियमों का जिक्र किया है.


मोबाइल में चालीसा पढ़ना सही है या गलत? जानें धार्मिक नजरिया और जरूरी नियम

ध्यान रखें ये बातें

  • अगर आप मोबाइल देखकर पाठ करते हैं तो नोटिफिकेशन बंद कर दें.
  • फोन को एयरोप्लेन मोड पर डाल दें ताकि कॉल्स से आपका ध्यान न भटके.
  • जो चालीसा या स्त्रोत पढ़ते हैं उसकी फोटो या डॉक्यूमेंट डाउनलोड करके रख लें.
  • कई धार्मिक जानकार यह भी मानते हैं कि जहां संभव हो, धार्मिक ग्रंथ या पुस्तक से पाठ करना बेहतर माना जाता है. इसका एक कारण यह है कि पुस्तक के माध्यम से पाठ करते समय मन अपेक्षाकृत अधिक स्थिर रहता है और पूजा का वातावरण भी अधिक शांत महसूस होता है.

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Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. 

जागृति सोनी बरसले (Jagriti Soni Barsaley)

धर्म, ज्योतिष और भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं पर शोध आधारित लेखन करने वाली डिजिटल पत्रकार

जागृति सोनी बर्सले धर्म, ज्योतिष, वास्तु और भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं से जुड़े विषयों की अनुभवी डिजिटल पत्रकार और लेखिका हैं. उन्हें डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग 10 वर्षों का अनुभव है. वर्तमान में वह ABP Live (Abplive.com) में बतौर कंसल्टेंट कार्यरत हैं, जहां वह व्रत-त्योहार जैसे नवरात्रि, करवा चौथ, दिवाली, होली, एकादशी, प्रदोष व्रत, हरियाली तीज आदि, रमजान, धार्मिक मान्यताओं, ज्योतिषीय घटनाओं, शुभ मुहूर्त, वास्तु और फेंगशुई, पंचांग जैसे विषयों पर शोध आधारित और प्रमाणिक लेख लिखती हैं.

विशेषज्ञता (Expertise)

जागृति सोनी बर्सले विशेष रूप से इन विषयों पर लेखन करती हैं:

  • व्रत-त्योहार और भारतीय धार्मिक परंपराएं
  • वैदिक ज्योतिष और ग्रह-नक्षत्र आधारित घटनाएं
  • शुभ मुहूर्त और धार्मिक विधि-विधान
  • वास्तु शास्त्र और फेंगशुई
  • आध्यात्मिक मान्यताएं और सांस्कृतिक परंपराएं

उनके लेखों में धार्मिक विषयों को केवल आस्था के दृष्टिकोण से नहीं बल्कि शास्त्रीय स्रोतों और प्रमाणिक ग्रंथों के आधार पर प्रस्तुत किया जाता है.

शिक्षा और पृष्ठभूमि

जागृति सोनी बर्सले ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से की है.

उन्होंने अपने करियर की शुरुआत दैनिक भास्कर डॉट कॉम से की, जहां डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने धर्म, समाज और संस्कृति से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर लेख लिखे.

डिजिटल मीडिया में काम करते हुए उन्होंने टेक्स्ट और वीडियो दोनों फॉर्मेट में काम किया है और वीडियो सेक्शन में सीनियर प्रोड्यूसर के रूप में भी लंबे समय तक योगदान दिया है. इस अनुभव ने उन्हें आधुनिक डिजिटल पत्रकारिता के विभिन्न फॉर्मेट को समझने और प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करने की क्षमता दी है.

शास्त्रीय अध्ययन और शोध

जागृति सोनी बर्सले की विशेष रुचि धर्म और ज्योतिष के शास्त्रीय अध्ययन में है.

उन्हें प्राचीन धार्मिक ग्रंथों जैसे:

  • धर्म सिंधु
  • मुहूर्त चिंतामणि
  • शकुन शास्त्र
  • वास्तु

का अच्छा ज्ञान है. इन ग्रंथों के आधार पर वह व्रत-त्योहार, पूजा-विधि, ज्योतिषीय घटनाओं और मुहूर्त से जुड़े विषयों को सरल, प्रमाणिक और शोधपरक तरीके से पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास करती हैं.

योगदान

जागृति सोनी बर्सले एक फ्रीलांस लेखक के रूप में भी कई मंचों पर आध्यात्म, भारतीय संस्कृति और ज्योतिष से जुड़े विषयों पर लेख लिख चुकी हैं.

उनका उद्देश्य धार्मिक और आध्यात्मिक विषयों को सरल भाषा में विश्वसनीय जानकारी के साथ प्रस्तुत करना है, ताकि पाठक इन विषयों को समझ सकें और सही जानकारी प्राप्त कर सकें.

व्यक्तिगत रुचियां

अध्यात्म और भारतीय परंपराओं के अध्ययन के प्रति उनकी गहरी रुचि है. खाली समय में उन्हें आध्यात्मिक और ज्ञानवर्धक पुस्तकें पढ़ना पसंद है. यह अध्ययन उनके लेखन को और अधिक गहन, तथ्यपूर्ण और संदर्भ आधारित बनाता है.

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