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Mithun Sankranti 2026: सिलबट्टा...पीरियड्स और मिथुन संक्रांति, क्या है इन तीनों का संबंध, वजह जानकर चौंक जाएंगे

Mithun Sankranti 2026: 15 जून को मिथुन संक्रांति है. इस दिन सूर्य के अलावा सिलबट्टे की पूजा होती है. क्या है वजह, इसका धरती माता से क्या संबंध, पीरियड्स का इससे कनेक्शन भी जान लें

Mithun Sankranti 2026: मिथुन संक्रंति 15 जून 2026 को है. इस दिन सूर्य बुध की राशि मिथुन में प्रवेश करेंगे. मीन संक्रान्ति, कन्या संक्रान्ति, मिथुन संक्रान्ति तथा धनु संक्रान्ति , यह चार षडशीतिमुखी संक्रान्ति हैं. इन सभी संक्रान्ति के पश्चात की सोलह घटी क्षणों को शुभ कार्यों के लिए उपयुक्त माना जाता है.

संक्रांति का त्योहार वैसे तो सूर्य देव को समर्पित है लेकिन मिथुन संक्रांति के दिन विशेषतौर पर सिलबट्टे की पूजा का विधान है, आखिर क्यों होती है मसाला पीसने वाले सिलबट्टे की पूजा आइए जानते हैं.

क्यों की जाती है सिलबट्टे की पूजा?

मिथुन संक्रांति पर सिलबट्टे को भूमि देवी का रूप मानकर पूजा की जाती है. धार्मिक मान्यता के अनुसार साल में कुछ विशेष दिनों को धरती माता के विश्राम और सृजन शक्ति से जोड़ा जाता है. जैसे महिलाओं के शरीर में मासिक चक्र प्रकृति के विकास और सृजन का संकेत माना जाता है.

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उसी प्रकार इन दिनों को भू देवी यानी धरती माता के प्रतीकात्मक विश्राम काल के रूप में देखा जाता है. इसके बाद आने वाला चौथा दिन शुद्धि और नवऊर्जा का प्रतीक माना जाता है, जिसे कई स्थानों पर वसुमती गढ़ुआ कहते हैं

मासिक धर्म और सिलबट्टे का संबंध

मान्यता के कारण सिलबट्टे को भी धरती माता का स्वरूप मानकर इन तीन दिनों तक उसका उपयोग नहीं किया जाता. चौथे दिन सिलबट्टे को जल और दूध से स्नान कराया जाता है, फिर चंदन, सिंदूर और पुष्प अर्पित कर श्रद्धा के साथ पूजा की जाती है.

धार्मिक मान्यताओं में इस दिन दान-पुण्य का भी विशेष महत्व बताया गया है. लोग अपनी श्रद्धा अनुसार गेहूं, गुड़, घी, अनाज और अन्य आवश्यक वस्तुओं का दान करते हैं और समृद्धि व कल्याण की कामना करते हैं.

ओडिशा में रज पर्व का महत्व

मिथुन संक्रांति के अवसर पर मनाया जाने वाला रज पर्व ओडिशा की सांस्कृतिक पहचान और नारी शक्ति के सम्मान का प्रतीक माना जाता है. यह तीन दिनों तक चलने वाला विशेष पर्व है, जिसका दूसरा दिन मिथुन सौर मास की शुरुआत को दर्शाता है.

रज शब्द संस्कृत के रजस्वला से जुड़ा माना जाता है, जिसका संबंध स्त्री के मासिक चक्र से माना जाता है. इसी आधार पर यह मान्यता प्रचलित है कि इस अवधि में धरती माता स्वयं सृजन शक्ति के विश्राम काल से गुजरती हैं. सी कारण रज पर्व के दौरान खेत जोतना, जमीन खोदना या धरती को किसी तरह से कुरेदना शुभ नहीं माना जाता.

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Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. 

जागृति सोनी बरसले (Jagriti Soni Bursle)

धर्म, ज्योतिष और भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं पर शोध आधारित लेखन करने वाली डिजिटल पत्रकार

जागृति सोनी बर्सले धर्म, ज्योतिष, वास्तु और भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं से जुड़े विषयों की अनुभवी डिजिटल पत्रकार और लेखिका हैं. उन्हें डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग 10 वर्षों का अनुभव है. वर्तमान में वह ABP Live (Abplive.com) में बतौर कंसल्टेंट कार्यरत हैं, जहां वह व्रत-त्योहार जैसे नवरात्रि, करवा चौथ, दिवाली, होली, एकादशी, प्रदोष व्रत, हरियाली तीज आदि, धार्मिक मान्यताओं, ज्योतिषीय घटनाओं, शुभ मुहूर्त, वास्तु और फेंगशुई, पंचांग जैसे विषयों पर शोध आधारित और प्रमाणिक लेख लिखती हैं.

विशेषज्ञता (Expertise)

जागृति सोनी बर्सले विशेष रूप से इन विषयों पर लेखन करती हैं:

  • व्रत-त्योहार और भारतीय धार्मिक परंपराएं
  • वैदिक ज्योतिष और ग्रह-नक्षत्र आधारित घटनाएं
  • शुभ मुहूर्त और धार्मिक विधि-विधान
  • वास्तु शास्त्र और फेंगशुई
  • आध्यात्मिक मान्यताएं और सांस्कृतिक परंपराएं

उनके लेखों में धार्मिक विषयों को केवल आस्था के दृष्टिकोण से नहीं बल्कि शास्त्रीय स्रोतों और प्रमाणिक ग्रंथों के आधार पर प्रस्तुत किया जाता है.

शिक्षा और पृष्ठभूमि

जागृति सोनी बर्सले ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से की है.

उन्होंने अपने करियर की शुरुआत दैनिक भास्कर डॉट कॉम से की, जहां डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने धर्म, समाज और संस्कृति से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर लेख लिखे.

डिजिटल मीडिया में काम करते हुए उन्होंने टेक्स्ट और वीडियो दोनों फॉर्मेट में काम किया है और वीडियो सेक्शन में सीनियर प्रोड्यूसर के रूप में भी लंबे समय तक योगदान दिया है. इस अनुभव ने उन्हें आधुनिक डिजिटल पत्रकारिता के विभिन्न फॉर्मेट को समझने और प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करने की क्षमता दी है.

शास्त्रीय अध्ययन और शोध

जागृति सोनी बर्सले की विशेष रुचि धर्म और ज्योतिष के शास्त्रीय अध्ययन में है.

उन्हें प्राचीन धार्मिक ग्रंथों जैसे:

  • धर्म सिंधु
  • मुहूर्त चिंतामणि

का अच्छा ज्ञान है. इन ग्रंथों के आधार पर वह व्रत-त्योहार, पूजा-विधि, ज्योतिषीय घटनाओं और मुहूर्त से जुड़े विषयों को सरल, प्रमाणिक और शोधपरक तरीके से पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास करती हैं.

योगदान

जागृति सोनी बर्सले एक फ्रीलांस लेखक के रूप में भी कई मंचों पर आध्यात्म, भारतीय संस्कृति और ज्योतिष से जुड़े विषयों पर लेख लिख चुकी हैं.

उनका उद्देश्य धार्मिक और आध्यात्मिक विषयों को सरल भाषा में विश्वसनीय जानकारी के साथ प्रस्तुत करना है, ताकि पाठक इन विषयों को समझ सकें और सही जानकारी प्राप्त कर सकें.

व्यक्तिगत रुचियां

अध्यात्म और भारतीय परंपराओं के अध्ययन के प्रति उनकी गहरी रुचि है. खाली समय में उन्हें आध्यात्मिक और ज्ञानवर्धक पुस्तकें पढ़ना पसंद है. यह अध्ययन उनके लेखन को और अधिक गहन, तथ्यपूर्ण और संदर्भ आधारित बनाता है.

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