'रमेश बिधूड़ी में इतनी हिम्मत होती तो वो...', पंक्चर वाले बयान पर भड़के वारिस पठान
Waris Pathan on Ramesh Bidhuri: वारिस पठान ने रमेश बिधूड़ी के बयान पर भड़कते हुए कहा बीजेपी के नेता भारत के युवाओं के खिलाफ गलत बयानबाजी करते आए हैं. रमेश बिधूड़ी रेगुलर ऑफेंडर हैं.

जंतर-मंतर समेत देशभर में छात्रों के आंदोलन पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता रमेश बिधूड़ी ने विवादित बयान दिया था. बिधूड़ी ने आंदोलनकारी छात्रों को 'पंक्चर वालों की औलादें' बताया था, जिसके बाद से बवाल शुरू हो गया. उनके इस बयान पर अब AIMIM नेता वारिस पठान की प्रतिक्रिया आई है.
AIMIM नेता वारिस पठान ने रमेश बिधूड़ी के बयान पर नाराजगी जताते हुए कहा, "इन लोगों (बीजेपी नेताओं) को हमारे देश के युवा के बार में गलत-सलत बोलने की आदत है. बिधूड़ी जैसे लोग देश का माहौल खराब कर रहे हैं. ये लोग रेगुलर ऑफेंडर हैं."
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'रमेश बिधूड़ी में हिम्मत थी तो जंतर-मंतर जाकर बोलते'
वारिस पठान का कहना है कि रमेश बिधूड़ी हमेशा ही ऐसी बकवास बातें करते हैं. उनका मानसिक संतुलन खो चुका है. पहले भी उन्होंने सदन में खड़े होकर 'आतंकवादी', 'देशद्रोही' और पता नहीं क्या क्या अनाप-शनाप बातें बोली हैं. अगर आपके अंदर हिम्मत थी तो जंतर-मंतर पर पहुंच कर 'पंक्चर पुत्र' जैसे बयान देते.
VIDEO | Mumbai: Reacting to RSS leader Atul Limaye's remarks on the student protest at Jantar Mantar, AIMIM leader Waris Pathan (@warispathan) says, "What contribution did the RSS people make to the country's freedom? These were the RSS people who assassinated our Father of the… pic.twitter.com/GtfBgPEOEE
— Press Trust of India (@PTI_News) August 3, 2026
'पीएम मोदी कुछ और कहते हैं और बीजेपी नेता कुछ और'
इतना ही नहीं, वारिस पठान ने बड़ा बयान देते हुए कहा कि एक ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी युवाओं को फ्रेंड्स बताते हैं और दूसरी ओर उन्हीं के नेता ऐसे बयान देते हैं. वारिस पठान ने कहा, "पीएम मोदी कुछ बोलते हैं और उनके लोग कुछ और ही बोलते हैं." उन्होंने आगे कहा कि जनता सवाल कर रही है लेकिन ये लोग सदन में जवाब देने भी नहीं आ रहे.
वारिस पठान ने याद दिलाया रमेश बिधूड़ी को इतिहास
AIMIM नेता ने रमेश बिधूड़ी पर भड़कते हुए कहा कि ये जो 'पंक्चर वालों की औलादें' जैसे बयान दे रहे हैं, उनको इतिहास पता है? जिनके खिलाफ बीजेपी नेता ऐसा कह देते हैं, उनके बाप-दादाओं ने देश की आजादी के लिए अपनी जानें गंवाई थीं. आजादी के आंदोलन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था. तब RSS वाले कहां थे? ये तो माफीनामे पर माफीनामे लिख रहे थे. अंग्रेजों के तलवे चाट रहे थे. 52 साल तक नागपुर में तिरंगा नहीं लहराया गया था. आजादी की जंग में इनका क्या योगदान था?
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