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Guru Purnima 2020: माता पिता के सम्मान से प्रसन्न होते हैं गुरु

गुरु तत्त्व किसी भी रूप में हम लोगों के सामने आ सकता है. एक उदाहरण लेते हैं कि अगर हम लोग किसी अनजान शहर में यात्रा कर रहे हैं, साथ ही हमें मार्ग नहीं पता है तो मोबाईल में नेवीगेशन खोलते हैं और वह हमको रास्ता दिखाता है. यह नेवीगेशन उस समय गुरु की भूमिका निभाता है.

आषाढ़ मास की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है, इसी दिन महर्षि वेदव्यास जी का जन्म हुआ था. 5 जुलाई रविवार को गुरु पूर्णिमा का पर्व है. गुरु की वंदना है. गुरु का अभिवादन है! गुरु ज्ञान का साक्षात्कार कराने वाला है. जीवन में जो भी सुख, संपन्नता, ज्ञान, विवेक, सहिष्णुता यह सब गुरु की कृपा से ही प्राप्त होता है. आज हम गुरु तत्व के बारे में आपको कुछ बताना चाहते हैं. गुरु पूर्णिमा का संबंध गुरु तत्व से है. गुरु का अर्थ है कि जो हमें अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाए. यानी अज्ञान से ज्ञान की ओर. अब जो तत्व हमें ज्ञानवान बनाता है वह पूजनीय और वंदनीय होगा.

गुरु तत्त्व किसी भी रूप में हम लोगों के सामने आ सकता है. एक उदाहरण लेते हैं कि अगर हम लोग किसी अनजान शहर में यात्रा कर रहे हैं, साथ ही हमें मार्ग नहीं पता है तो मोबाईल में नेवीगेशन खोलते हैं और वह हमको रास्ता दिखाता है. यह नेवीगेशन उस समय गुरु की भूमिका निभाता है. यही गुरु तत्व है. एक और उदाहरण से समझते हैं- कहीं मार्ग में जाते समय एक बालक हमको इशारा करके बताता है कि आगे रास्ता बंद है तो उस समय वह बालक भी गुरु तत्व की भूमिका निभा रहा है.

क्या करें गुरु पूर्णिमा के दिन

गुरु पूर्णिमा के दिन सर्वप्रथम सभी को जल्दी उठना चाहिए और दैनिक क्रिया से निवृत होकर सबसे पहले माता-पिता के चरण वंदना करें, यानी शाष्टांग दण्डवत करें. यहीं तो हमारे प्रथम गुरु हैं. माता पिता के आशीर्वाद आपको अद्भुत और अलौकिक कवच प्रदान करता है. देव दर्शन करते हुए. प्रभु को भोग लगा कर उनका आशीर्वाद लें.

गुरु, अध्यापक और जिनसे आपको किसी न किसी रुप में ज्ञान की प्राप्ति हुई है उनसे अवश्य मिलने प्रणाम करें, और उपहार दें.

किसी गरीब को भरपेट भोजन अवश्य कराना चाहिए. कोई निर्धन जिसके तन पर वस्त्र नहीं हैं, उसको आप वस्त्र भी दे सकते हैं.

अपने गुरु को प्रणाम करें यदि वह साक्षात् आपके समक्ष न हों तो उनका ध्यान करके मानसिक प्रणाम करना चाहिए.

घर में रामचरितमानस, श्रीमद्भगवद्गीता हो या कोई भी धार्मिक पुस्तक हो उसको पूजा स्थान में रखकर उसमें पुष्प चढ़ाए उनको लाल कपड़े से लपेटें. उनको प्रणाम करिए और थोड़ा समय निकालकर उसका पाठ करिए, क्योंकि धर्मग्रंथ साक्षात् गुरु हैं.

गाय का आशीर्वाद लेना बहुत ही आवश्यक है गुरु को रिप्रेजेंट गाय करती है इसलिए गौ माता के समक्ष जाकर उनको भरपेट भोजन कराने की व्यवस्था करनी चाहिए उनको पश्चात प्रणाम करके जीवन में जो भी गलतियां की है उसकी क्षमा मांगते हुए उनका आशीर्वाद लेना चाहिए.

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