ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की एकदंत संकष्टी चतुर्थी 5 मई 2026 को है. चतुर्थी का समापन अगले दिन 6 मई 2026 को सुबह 7.51 पर होगा.
Sankashti Chaturthi 2026: एकदंत संकष्टी चतुर्थी मई में कब ? नोट करें डेट, पूजा मुहूर्त, चंद्रमा निकलने का समय
Ekdant Sankashti Chaturthi 2026: ज्येष्ठ माह की एकदंत संकष्टी चतुर्थी 5 मई 2026 को है. ये व्रत संतान सुख, धन, नौकरी में तरक्की के योग बनते हैं. मई की संकष्टी चतुर्थी बहुत खास भी है जान लें क्यों.

Ekdant Sankashti Chaturthi 2026: 5 मई 2026 को ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की एकदंत संकष्टी चतुर्थी है. भगवान एकदंत को गणेश जी के अष्टविनायक रूपों में से एक माना जाता है। एकदन्त गणेश का शाब्दिक अर्थ है - एक दांत वाले गणेश जी.
पौराणिक कथाओं के अनुसार एक बार गणेश जी ने भगवान शिव से भेंट करने आए परशुराम जी को महादेव से मिलने के लिए रोक दिया था. क्रोध में आकर परशुराम जी ने अपने परशु से गणेश जी पर प्रहार किया था जिससे उनका एक दांत टूट गया और वे एकदन्त के रूप में प्रसिद्ध हुए. एकदंत संकष्टी चतुर्थी का व्रत किन लोगों के लिए लाभदायी है, इसका महत्व, मुहूर्त सब जान लें.
एकदंत संकष्टी चतुर्थी 2026 मुहूर्त
ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी 5 मई 2026 सुबह 5 बजकर 24 मिनट पर शुरू होगी और अगले दिन 6 मई 2026 को सुबह 7.51 पर इसका समापन होगा.
- गणेश जी पूजा समय - सुबह 8.58 - दोपहर 1.58, रात 8.18 - रात 9.13
शुभ योग
एकदंत संकष्टी चतुर्थी पर शिव योग का संयोग बन रहा है. साथ ही इस दिन मंगलवार भी है, इसलिए ये अंगारकी चतुर्थी कहलाएगी. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, यदि कुंडली में मंगल से संबंधित कोई दोष हो, तो इस दिन गणेश जी की पूजा करने से वह शांत हो जाता है. ज्योतिष शास्त्र में मंगलवार को पड़ने वाली चतुर्थी को 'अंगारकी संकष्टी चतुर्थी' कहा जाता है, जिसका फल अन्य चतुर्थी से कई गुना अधिक माना गया है.
एकदंत संकष्टी चतुर्थी 2026 चंद्रोदय समय
संकष्टी चतुर्थी का चांद 5 मई 2026 को रात 10.35 मिनट पर निकलेगा. गणपति जी की पूजा सुबह और शाम दोनों समय करने के बाद चंद्रमा को अर्घ्य दें. उसके बाद ही व्रत का पारण करें.
एकदंत संकष्टी चतुर्थी पूजा विधि
- संतान की दीर्घायु के लिए इस दिन गणपति के सामने घी का दीया जलाएं और संतान गणपति स्तोत्रम् का पाठ करिए. सभी विघ्न बाधाएं भी दूर होंगी.
- इस दिन आप गणपति को दूर्वा, सिंदूर, अर्पित करिए. इसके अलावा बप्पा को आंक का फूल अर्पित करिए और उन्हें मोदक का भोग लगाकर गरीबों को अन्न, जल, धन का दान करिए.
गणेश जी के एकदंत स्वरूप की कथा
मुद्गलपुराण में वर्णित अष्टविनायक उत्पत्ति कथा के अनुसार मदासुर नामक दैत्य के अत्याचार से देवताओं की रक्षा करने के लिए भगवान गणेश एकदंत स्वरूप में प्रकट हुए थे. भगवान एकदन्त के भय से मदासुर अपनी पराजय स्वीकार कर सदैव के लिये पाताललोक चला गया.
- लाभ - इस व्रत को करने से जीवन के संकट, रोग, कर्ज और मानसिक परेशानियों से मुक्ति मिलती है.
- बुद्धि, धन और सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है.
- कार्यों में सफलता और मनोकामनाओं की पूर्ति होती है.
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Frequently Asked Questions
एकदंत संकष्टी चतुर्थी 2026 कब है?
2026 में एकदंत संकष्टी चतुर्थी का मुहूर्त क्या है?
गणेश जी की पूजा का समय सुबह 8.58 से दोपहर 1.58 तक और रात 8.18 से रात 9.13 तक रहेगा. चंद्रोदय रात 10.35 मिनट पर होगा.
अंगारकी चतुर्थी क्या होती है?
जब संकष्टी चतुर्थी मंगलवार को पड़ती है, तो उसे अंगारकी संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है. इस दिन गणेश जी की पूजा का फल कई गुना अधिक माना गया है.
एकदंत संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखने से क्या लाभ होता है?
इस व्रत से जीवन के संकट, रोग, कर्ज और मानसिक परेशानियों से मुक्ति मिलती है. बुद्धि, धन और सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है.
भगवान एकदंत के प्रसिद्ध होने की कथा क्या है?
एक बार परशुराम जी ने महादेव से मिलने के लिए गणेश जी को रोका था. क्रोध में आकर परशुराम जी ने अपने परशु से गणेश जी पर प्रहार किया, जिससे उनका एक दांत टूट गया और वे एकदंत के रूप में प्रसिद्ध हुए.
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