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Ganesh Utsav 2023: प्रकृति की शक्ति कहलाते हैं भगवान गणेश के ये 32 रूप, जानें इनके नाम और महत्व

Ganesh Utsav 2023: कर्नाटक के नंजनगुड शिव मंदिर में भगवान गणेश के 32 रूप मौजूद हैं. गणेश जी के इन 32 रूपों में प्रकृति की शक्ति समाहित है. जानते हैं भगवान के इन रूपों की विशेष महत्ता के बारे में.

Ganesh Utsav 2023: देशभर में धूमधाम के साथ गणेशोत्सव मनाया जा रहा है, जिसकी शुरुआत मंगलवार 19 सितंबर 2023 से हो चुकी है और आज गणेश उत्सव का दूसरा दिन है. बता दें कि गणेश चतुर्थी से शुरू होकर पूरे 10 दिनों तक गणेश उत्सव मनाया जाता है और अनंत चतुर्दशी पर गणेश विसर्जन किया जाता है.

भगवान गणेश प्रथम पूज्य देवता, मंगलकारी, बुद्धिदाता और विग्घहर्ता कहलाते हैं. भगवान गणेश को हम बप्पा, गणेशा, गणपति, एकदंत, लंबोदर आदि जैसे कई नामों से जानते हैं. अनेक नामों के साथ ही भगवान के कई रूप भी हैं. मुग्दल और गणेश पुराण में भगवान गणेश के 32 मंगलकारी रूपों का वर्णन मिलता है.

बता दें कि, कर्नाटक में मैसूर के पास नंजनगुड शिव मंदिर में गणेश जी के 32 रूप मौजूद हैं. भगवान गणेश के इन रूपों की अपनी विशेषता है और इनसे महत्वपूर्ण प्रेरणा भी मिलती है. जानते हैं गणेश जी के इन 32 रूपों के नाम और इसके महत्व के बारे में.


Ganesh Utsav 2023: प्रकृति की शक्ति कहलाते हैं भगवान गणेश के ये 32 रूप, जानें इनके नाम और महत्व

  • श्री बाल गणपति: यह गणेशजी का बाल रूप है, जिसे धरती पर बड़ी मात्रा में उपलब्ध संसाधनों का व भूमि की उर्वरता का प्रतीक माना गया है. इस रूप में भगवान के चार हाथ हैं और चारों हाथों में आम, केला, गन्ना और कटहल फल है.
  • तरुण गणपति: भगवान गणेश का यह रूप युवावस्था की ऊर्जा का प्रतीक है. इसमें भगवान की प्रतिमा किशोर रूप में है और उनका शरीर लाल रंग में चमकता हुआ है. इसमें भगवान की 8 भुजाएं हैं. सभी भुजाओं में फल, मोदक और अस्त्र-शस्त्र हैं.
  • भक्त गणपति. भगवान गणेश का यह रूप पूर्णिमा की चांद की तरह चमकीला और श्वेतवर्ण है. इस रूप में भगवान के चार हाथ हैं, जिनमें फूल-फल हैं.
  • वीर गणपति: नाम की तरह यह गणेशजी का योद्धा रूप है, जिसमें भगवान के 16 हाथ हैं. अपने हाथों में भगवान गदा, चक्र, तलवार, अंकुश जैसे कई अस्त्र लिए हुए हैं. इस रूप में भगवान गणेश युद्ध कला को दर्शाते हैं और विजय प्राप्त करने की प्रेरणा देते हैं.
  • शक्ति गणपति: इस रूप में भगवान भक्तों को शक्तिशाली बनने का आशीष देते हैं. इस रूप में भगवान अभय मुद्रा में हैं और उनके चार हाथों में अस्त्र-शस्त्र और माला हैं.
  • द्विज गणपति: भगवान का यह रूप ज्ञान और संपत्ति के गुण को दर्शाता है. इसमें भगवान के दो मुख और चार हाथ हैं, जिसमें वे कमंडल, रुद्राक्ष, छड़ी और ताड़पत्र लिए हुए हैं.
  • सिद्धि गणपति: गणेशजी का यह रूप पीतवर्ण है और यह रूप बुद्धि और सफलता के प्रतीक माना जाता है. इसमें भगवान के चार हाथ हैं और वे आराम की मुद्रा में बैठे हुए हैं. भगवान के सूंड में मोदक भी है.
  • उच्छिष्ट गणपति: गणेश इस रूप में नीलवर्ण है और धान्य के देवता हैं, जो मोक्ष और ऐश्वर्य प्रदान करते हैं. भगवान अपने हाथ में वाद्य यंत्र भी लिए हुए हैं.
  • विघ्न गणपति: गणेशजी का यह रूप स्वर्ण रंग की तरह है और उनके आठ हाथ हैं. इस रूप में भगवान गणेश विष्णु जी की तरह दिखाई देते हैं. क्योंकि वे अपने हाथों में शंख और चक्र लिए हुए और आभूषण धारण किए हुए रूप में हैं.
  • क्षिप्र गणपति: भगवान गणेश का यह रूप रक्तवर्ण हैं. मान्यता है कि, इस रूप में भगवान की पूजा करने से वे शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामना पूरी करते हैं. भगवान के चार हाथ हैं. एक हाथ में कल्पवृक्ष की शाखा लिए हुए हैं और अपनी सूंड में वे रत्नों से भरा कलश लिए हुए हैं.
  • हेरम्ब गणपति: इस रूप में भगवान के पांच सिर हैं. भगवान के इस विलक्षण हेरम्ब रूप को दुर्बलों का रक्षक कहा जाता है. इस रूप में भगवान की सवारी मूषक नहीं बल्कि शेर है और उनके दस हाथ भी हैं, जिसमें भगवान फरसा, फंदा, मनका, माला, फल, छड़ी और मोदक लिए हुए हैं.
  • लक्ष्मी गणपति: भगवान गणेश के इस रूप में बुद्धि और सिद्धि भी साथ है. भगवान अभय मुद्रा में हैं. उनके आठ हाथों में एक हाथ में तोता है.
  • महागणपति : इस रूप में शिवजी की तरह भगवान गणेश के तीन नेत्र हैं. साथ ही दस हाथ भी है जो दसों दिशाओं का प्रतिनिधित्व करते हैं. इस रूप में भगवान का एक मंदिर द्वारका में भी है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, यहां श्रीकृष्ण ने भी गणेशजी की पूजा की थी.
  • विजय गणपति: गणेश जी इस रूप में बड़े आकार के मूषक पर सवार हैं. मान्यता है कि, इस रूप में भगवान की पूजा करने के तुरंत कष्टों से राहत मिलती है.
  • नृत्य गणपति: इस रूप में भगवान गणेश प्रसन्न होकर एक कल्पवृक्ष के नीचे नृत्य करते हए हैं. ललित कलाओं मे सफलता के लिए इस रूप में भगवान की पूजा करना लाभकारी माना जाता है.
  • उर्ध्व गणपति: इस रूप में भगवान के साथ शक्ति भी हैं, जो उनके गोद में विराजित हैं और भगवान ने उन्हें अपने बाएं हाथ से थाम रखा है. भगवान के आठ हैं. एक हाथ में गणपति अपना टूटा हुआ दांत लिए हुए हैं, बाकी हाथों में कमल फूल और प्राकृतिक सम्पदाएं हैं.
  • एकाक्षर गणपति: भगवान गणेश का यह रूप पिता शिव के समान है. गणेश जी के तीन नेत्र हैं और मस्तक पर चंद्रमा विराजित है. माना जाता है कि, इस रूप भगवान की पूजा करने से मन और मस्तिष्क पर नियंत्रण में करने में मदद मिलती है.
  • वर गणपति: भगवान गणेश का यह रूप वरदान देने के वाला माना जाता है. इस रूप में वे अपनी सूंड में रत्न कुंभ थामे हुए हैं. इस रूप में भगवान के साथ एक देवी भी विराजित हैं, जिसके हाथ में विजय पताका है.
  • त्र्यक्षर गणपति: भगवान गणेश का यह ‘ओम’ रूप है. इसमें ब्रह्मा, विष्णु, महेश भी हैं. इस रूप में भगवान की पूजा करने से आध्यात्मिक ज्ञान की प्राप्ति होती है.
  • क्षिप्रप्रसाद गणपति: भगवान का यह रूप शांति और समृद्धि प्रदान करने के लिए जाना जाता है.  इस रूप में भगवान घास से बने सिंहासन पर बैठे हुए हैं.
  • हरिद्रा गणपति: भगवान गणेश का यह रूप हल्दी से निर्मित है और वे राजसिंहासन पर बैठे हुए हैं. मान्यता है कि इच्छा पूर्ति के लिए इस रूर में भगवान की पूजा करना फलदायी होता है.
  • एकदंत गणपति: इस रूप में भगवान गणेश का पेट अधिक बड़ा दर्शाया गया है. मान्यता है कि इस रूप में भगवान अपने भीतर ब्रह्मांड समाए हुए हैं.
  • सृष्टि गणपति: गणेश भगवान का यह रूप ब्रह्मा के समान है और प्रकृति की कई शक्तियों का प्रतिनिधित्व करते हैं.
  • उद्दंड गणपति: भगवान का यह रूप उग्र है. उनके 12 हाथ हैं और साथ ही देवी शक्ति भी विराजित हैं. यह रूप सांसारिक मोह-माया के बंधन से मुक्त होने की प्रेरणा देता है.
  • ऋणमोचन गणपति: गणेश जी इस रूप में भक्तों को मोक्ष प्रदान करते हैं. उनके चार हाथ और श्वेतवर्ण हैं. इस रूप में भगनवान जिम्मेदारियों का वहन करने की प्रेरणा देते हैं.
  • ढुण्ढि गणपति:  गणेश जी इस रूप में रक्तवर्ण है और उनके हाथ में रुद्राक्ष की माला है. इस रूप में गणेश पिता शिव के संस्कारों यानी रुद्राक्ष को लिए विराजित हैं.
  • द्विमुख गणपति: गवान गणेश के इस रूप में उनके दो मुख है और चार हाथ हैं. दोनों मुखों में सूंड ऊपर उठी हुई हैं. उनके शरीर का रंग नीले और हरा है.
  • त्रिमुख गणपति: नाम की तरह इस रूप में गणेश जी के तीन मुख हैं और छह हाथ भी हैं. एक हाथ रक्षा की मुद्रा और दूसरा वरदान की मुद्रा में है. दाएं और बाएं तरफ के मुख की सूंड ऊपर उठी है और भगवान स्वर्ण कमल पर विराजित हैं.
  • सिंह गणपति: भगवान गणेश इसमें शेर के रूप में दर्शाएं गए हैं. उनका मुख शेर की तरह है और सूंड भी है. उनके आठ हाथ हैं, जिसमें एक हाथ वरद मुद्रा में है और दूसरा अभय मुद्रा में.
  • योग गणपति: भगवान गणेश इस रूप में एक योगी के समान हैं. वे मंत्रों जाप कर रहे हैं और पैर योगिक मुद्रा में है.
  • दुर्गा गणपति:  भगवान गणेश का यह अजेय रूप विजय मार्ग में आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए प्रेरित करता है. इसमें वे अदृश्य देवी दुर्गा के रूप में हैं और लाल वस्त्र धारण किए हुए हैं, जोकि ऊर्जा का प्रतीक है. भगवान के हाथ में धनुष भी है.
  • संकष्टहरण गणपति:  भगवान गणेश का यह रूप भय और दुख को दूर करने की प्रेरणा देता है. गणपति के साथ उनकी शक्ति भी विराजित हैं, जिसे उन्होंने एक हाथ से थामा है और दूसरा हाथ वरद मुद्रा में है. देवी शक्ति के हाथ में कमल पुष्प है.

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पल्लवी कुमारी (Pallawi Kumari)

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