Ganesh Durva Katha: आखिर गणेश जी को क्यों चढ़ाते हैं दूर्वा? जानें इससे जुड़ी पौराणिक कथा
Ganesh Durva Katha: क्या आप जानते हैं कि गणेश जी को दूर्वा सबसे प्रिय क्यों है? जानिए अनलासूर की पौराणिक कथा, दूर्वा चढ़ाने के नियम और धन-सुख से जुड़े विशेष उपायों के बारे में.

Ganesh Durva Katha: भगवान गणेश को प्रथम पूज्य और विघ्नहर्ता देवता कहा जाता है. किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत उनकी पूजा से की जाती है. गणेश जी को मोदक, लड्डू, सिंदूर और लाल पुष्प अर्पित करने की परंपरा तो प्रचलित है, लेकिन दूर्वा घास का महत्व इन सभी में विशेष माना गया है. गणेश जी को दूर्वा अर्पित करने से वे शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं. यही कारण है कि गणेश पूजा में दूर्वा का विशेष स्थान है, इसके पीछे एक रोचक पौराणिक कथा है.
पौराणिक कथाओं के अनुसार अनलासूर नाम का एक अत्यंत शक्तिशाली दैत्य था. वह अपने बल और सामर्थ्य के अहंकार में इतना डूब चुका था कि ऋषि-मुनियों, देवताओं और सामान्य लोगों को परेशान करने लगा था. कहा जाता है कि वह लोगों को जिंदा ही निगल जाता था. उसके अत्याचारों से पूरा संसार भयभीत हो गया था और देवताओं को भी उससे मुक्ति का कोई उपाय दिखाई नहीं दे रहा था.
जब अनलासूर का आतंक बढ़ गया, तब सभी देवता और ऋषि भगवान शिव की शरण में पहुंचे. उन्होंने भगवान शिव से संसार की रक्षा करने की प्रार्थना की. तब भगवान शिव ने अपने पुत्र गणेश जी को दैत्य का अंत करने का आदेश दिया.
भगवान गणेश अनलासूर के सामने पहुंचे और दोनों के बीच भीषण युद्ध हुआ. अंत में गणेश जी ने उस दैत्य को ही निगल लिया. दैत्य का अंत तो हो गया, लेकिन उसके शरीर में मौजूद अग्नि और तेज के कारण गणेश जी के पेट में असहनीय जलन होने लगी. देवता और ऋषि इस समस्या का समाधान खोजने लगे, लेकिन कोई उपाय सफल नहीं हुआ.
तभी महर्षि कश्यप ने गणेश जी को 21 दूर्वा घास अर्पित की. दूर्वा की शीतलता से गणेश जी के पेट की जलन शांत हो गई. इस घटना के बाद गणेश जी ने दूर्वा को अपना प्रिय अर्पण स्वीकार किया. तभी से उन्हें दूर्वा चढ़ाने की परंपरा चली आ रही है और इसे अत्यंत शुभ माना जाता है.
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भगवान गणेश को दूर्वा चढ़ाने के नियम:
- गणेश जी के लिए 21 दूर्वा को एक साथ जोड़कर 11 जोड़े तैयार किए जाते हैं.
- इन 11 जोड़ों को भगवान गणेश के चरणों में अर्पित किया जाता है.
- दूर्वा किसी स्वच्छ और पवित्र स्थान, जैसे मंदिर के बगीचे या साफ भूमि पर उगी हुई होनी चाहिए.
- भगवान को अर्पित करने से पहले दूर्वा को स्वच्छ जल से धो लेना चाहिए.
- दूर्वा चढ़ाते समय गणेश जी के विशेष मंत्रों का जाप करना शुभ माना जाता है.
यह है कुछ विशेष मंत्र:
ऊँ गं गणपतेय नमः, ऊँ गणाधिपाय नमः, ऊँ उमापुत्राय नमः, ऊँ विघ्ननाशनाय नमः, ऊँ विनायकाय नमः, ऊँ ईशपुत्राय नमः, ऊँ सर्वसिद्धिप्रदाय नमः, ऊँ एकदन्ताय नमः, ऊँ इभवक्ताय नमः, ऊँ मूषकवाहनाय नमः, ऊँ कुमारगुरवे नमः
दूर्वा के विशेष उपाय:-
उपाय 1: धन और मनोकामना पूर्ति के लिए
गणेश चतुर्थी के दिन मूर्ति स्थापना के बाद 21 दूर्वा जड़ सहित लेकर भगवान गणेश की मूर्ति के नीचे रखें. इसके बाद "ऊँ श्री गणेशाय नमः" मंत्र की एक माला का जाप करें. दस दिनों तक प्रतिदिन इस मंत्र का जाप करें. दसवें दिन गणेश विसर्जन के बाद दूर्वा को लाल वस्त्र में बांधकर तिजोरी में रख दें, इससे धन की कमी दूर होती है और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं.
उपाय 2: धन लाभ और ऋण मुक्ति के लिए
किसी भी बुधवार या शुभ मुहूर्त में 5 दूर्वा लेकर उनमें 11 गांठें लगाएं और भगवान गणेश तथा माता लक्ष्मी को अर्पित करें. दूर्वा चढ़ाते समय "श्री गणेशाय नमः दूर्वांकुरण समर्पयामि" मंत्र का जाप करें. इसके बाद ऋणहर्ता गणेश स्तोत्र का पाठ करें. यह उपाय आर्थिक परेशानियों को दूर करने और धन लाभ के मार्ग खोलने में सहायक माना जाता है.
उपाय 3: घर में सुख-समृद्धि के लिए
घर की पूर्व दिशा में मिट्टी के गमले में दूर्वा लगाएं. प्रतिदिन भगवान गणेश का ध्यान करते हुए उस पर जल अर्पित करें. यह उपाय घर में सकारात्मक ऊर्जा, सुख-शांति और समृद्धि बनाए रखने में सहायक माना जाता है.
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