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बड़ों के पैर छूना परंपरा नहीं, इसके पीछे छिपे हैं कई गहरे राज

हिंदू धर्म में पैर छूना एक परंपरा मात्र नहीं है, इसके पीछे कई गूढ़ रहस्य भी हैं. चरण स्पर्श से जुड़े शास्त्रीय रहस्य, ज्योतिषीय लाभ और जीवन में इसके चमत्कारी प्रभाव, जानते हैं.

पैरा छूना यह सिर्फ परंपरा नहीं है बल्कि एक ऊर्जा विज्ञान भी है. जिसे हमारे ऋषि मुनियों ने बहुत पहले ही समझ लिया था. भारतीय संस्कृति में बड़ों को चरण स्पर्श करना एक आम परंपरा है.

लेकिन ये एक रहस्यमय और ऊर्जा प्रदान करने वाली आध्यात्मिक प्रक्रिया भी है. कहने के लिए पैरे छूना विनम्रता का प्रतीक है, लेकिन यह जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, संस्कारों और आशीर्वाद को भी सुनिश्चित करती है. कैसे आइए जानते हैं.

पैरे छूने को लेकर क्या कहते हैं शास्त्र

  1. एनर्जी का स्थानांतरण (Transfer of Energy): बृहत्पाराशर होरा शास्त्र और गरुड़ पुराण में वर्णन मिलता है कि जब कोई श्रद्धापूर्वक किसी ज्ञानी या वृद्ध के चरण स्पर्श करता है, तो उसके भीतर सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. यह ऊर्जा उसके चित्त को शांत करती है और उसकी आत्मा को सात्विक बनाती है.
  2. कर्मशुद्धि और संस्कार परिपुष्टि: मनुस्मृति में कहा गया है कि गुरुजन या वृद्ध का आशीर्वाद व्यक्ति के पापों का नाश करता है और शुभ संस्कारों को मजबूत करता है. पैरों को स्पर्श करना विनम्रता की निशानी है जो अहंकार को नष्ट करता है.
  3. चेतना का जागरण: जब कोई व्यक्ति श्रद्धा से चरण स्पर्श करता है, तो उसकी मस्तिष्कीय तरंगें (Brain Waves) गुरू की ऊर्जा से टकराती हैं और जिससे चित्त की जागरूकता बढ़ती है. यह क्रिया आध्यात्मिक उन्नति का द्वार खोलती है.
  4. गुरुत्व का स्वीकार और आत्मिक समर्पण: उपनिषदों की मानें तो चरण स्पर्श वास्तव में आत्मा का आत्मा के समक्ष समर्पण है. यह क्रिया व्यक्ति को गुरु तत्व से जोड़ती है, जो मोक्ष मार्ग में प्रवेश की कुंजी है.

महाभारत: अर्जुन जब श्रीकृष्ण को चरण स्पर्श करते हैं 
महाभारत, भीष्मपर्व, अध्याय 11-12 जब भगवद्गीता का प्रारंभ होता है तो एक प्रसंग आता है जिसमे जब अर्जुन मोहवश युद्ध न करने की इच्छा व्यक्त करते हैं, तब श्रीकृष्ण उन्हें ज्ञान देते हैं. गीता के ज्ञान के बाद अर्जुन 'करिष्ये वचनं तव' कहकर पूरी श्रद्धा प्रकट करता है, जो चरणों में नमन का प्रतीत है.

नष्टो मोहः स्मृतिर्लब्धा त्वत्प्रसादान्मयाच्युत।
स्थितोऽस्मि गतसंदेहः करिष्ये वचनं तव॥

“हे अच्युत! आपकी कृपा से मेरा मोह नष्ट हो गया है, मुझे स्मृति (स्वधर्म और आत्मस्वरूप की पहचान) प्राप्त हो गई है। अब मैं स्थिर चित्त वाला और संदेह-रहित हूँ। मैं अब आपके आदेश का पालन करूंगा.

ज्योतिष क्या कहता है
ज्योतिषीय दृष्टिकोण से, चरण स्पर्श करने से शनि, गुरु और चंद्रमा की शुभता आती है. शनि अनुशासन और विनम्रता का ग्रह है, गुरु ज्ञान और चंद्रमा मानसिक शांति का.

इन तीनों की कृपा जीवन में संतुलन, बुद्धि और सौभाग्य लाती है. चांडोग्य उपनिषद और नारद संहिता में भी पैर छूने को सकारात्मक रहने की उत्तम प्रक्रिया से जोड़कर देखा गया है.

About the author Hirdesh Kumar Singh

हृदेश कुमार सिंह, Senior Vedic Astrologer | Astro Media Editor | Digital Strategy Leader

"ज्योतिष केवल भविष्य बताने की विद्या नहीं, बल्कि समय को समझने की कला है."

हृदेश कुमार सिंह लंबे समय से ज्योतिष, धर्म, अध्यात्म और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं. वे उन चुनिंदा लोगों में माने जाते हैं जिन्होंने पारंपरिक ज्योतिष को आज की बदलती दुनिया, डिजिटल संस्कृति और नई पीढ़ी की सोच से जोड़ने का प्रयास किया है. उनके लिए ज्योतिष केवल ग्रहों की गणना नहीं, बल्कि मानव व्यवहार, सही समय और जीवन के निर्णयों को समझने का माध्यम है.

वर्तमान में वे ABP Live में Astro, Religion और Dharma LIVE से जुड़े कंटेंट और डिजिटल रणनीति का नेतृत्व कर रहे हैं. यहां उनका फोकस ज्योतिष और धर्म को ऐसे रूप में प्रस्तुत करना है, जो आज के पाठकों और दर्शकों की जिंदगी से सीधे जुड़ सके. यही कारण है कि उनके लेखन और विश्लेषण में केवल पारंपरिक बातें नहीं, बल्कि करियर, रिश्ते, मानसिक तनाव, सामाजिक बदलाव, तकनीक और बदलती जीवनशैली जैसे विषय भी दिखाई देते हैं.

उन्होंने Indian Institute of Mass Communication (IIMC), New Delhi से पत्रकारिता और IIMT University Meerut से ज्योतिष शास्त्र व वास्तु शास्त्र की पढ़ाई की है और Astrosage व Astrotalk जैसे प्लेटफॉर्म्स के साथ भी काम किया है. मीडिया, ऑडियंस बिहेवियर, डिजिटल पब्लिशिंग और कंटेंट रणनीति की समझ ने उनके काम को अलग पहचान दी है.

हृदेश कुमार सिंह के कई ज्योतिषीय और सामाजिक विश्लेषण समय-समय पर चर्चा में रहे हैं. राजनीति, शेयर बाजार, मनोरंजन जगत, AI और बदलते सामाजिक माहौल जैसे विषयों पर उनके आकलनों ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया है. वर्तमान में CJP आंदोलन को लेकर उनकी भविष्यवाणियां सत्य साबित हुईं हैं, उनके विश्लेषण वैदिक गणना, गोचर, मेदिनी ज्योतिष और समाज की बदलती मानसिकता की समझ पर आधारित होते हैं.

वे वैदिक ज्योतिष, होरा शास्त्र, संहिता, मेदिनी ज्योतिष, अंक ज्योतिष, शकुन शास्त्र और वास्तु शास्त्र जैसे विषयों पर अध्ययन और लेखन करते रहे हैं. करियर, विवाह, व्यापार, शिक्षा और जीवन के महत्वपूर्ण फैसलों से जुड़े विषयों पर वे पारंपरिक ज्योतिष को आधुनिक जीवन की वास्तविक परिस्थितियों से जोड़कर देखने का प्रयास करते हैं.

डिजिटल दौर में ज्योतिष को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए उन्होंने 'Gen-Z Horoscope' जैसे कॉन्सेप्ट पर भी काम किया, जिसमें राशिफल को केवल भाग्य या डर से जोड़कर नहीं, बल्कि career pressure, relationship confusion, emotional wellbeing और real-life decision making जैसी बातों से जोड़ा गया.

उनका मानना है कि आज के समय में सबसे बड़ी चुनौती जानकारी की कमी नहीं, बल्कि सही समझ की कमी है. वे ज्योतिष को ऐसा माध्यम मानते हैं, जो व्यक्ति को डराने के बजाय उसे बेहतर निर्णय लेने और खुद को समझने में मदद कर सकता है.

श्रीमद्भगवद्गीता के कर्म सिद्धांत, भगवान बुद्ध के संतुलन के विचार, सूफी चिंतन और आधुनिक मनोविज्ञान से प्रभावित उनकी सोच उनके लेखन में भी दिखाई देती है. यही वजह है कि उनका काम केवल भविष्यवाणी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि लोगों को सोचने और अपने जीवन को नए नजरिए से देखने के लिए प्रेरित करता है.

ज्योतिष और मीडिया के अलावा उन्हें सिनेमा, संगीत, साहित्य, राजनीति, बाजार, पर्यावरण, ग्रामीण जीवन और यात्राओं में विशेष रुचि है. इन अनुभवों का असर उनके विषय चयन और लेखन शैली में साफ दिखाई देता है.

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