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Bhadra Time: 20 अगस्त को भद्रा का साया! सुबह 8 बजे तक भूलकर भी न करें ये शुभ काम

Bhadra Time 20 August 2026: 20 अगस्त को सुबह 8 बजे से पहले कोई शुभ कार्य न करें, भद्रा का साया है. 19 अगस्त को भद्रा कब से लग रही, इस दौरान कौन से काम नहीं करना चाहिए देखें.

20 August 2026 Bhadra: हिंदू धर्म में किसी भी शुभ कार्य को करने से पहले तिथि, मुहूर्त, नक्षत्र, योग और करण का विचार किया जाता है.खासकर भद्रा और राहुकाल को अशुभ माना गया है. धार्मिक मान्यताओं में भद्रा के दौरान मांगलिक और शुभ कार्य करने से बचने की सलाह दी जाती है.

20 अगस्त 2026 को भी सुबह तक भद्रा का प्रभाव रहने वाला है. पंचांग गणना के अनुसार 19 अगस्त की शाम करीब 7:19 बजे से शुरू हुई भद्रा 20 अगस्त की सुबह करीब 8:15 बजे समाप्त होगी.

20 अगस्त को कितने बजे तक रहेगी भद्रा?

पंचांग के अनुसार 20 अगस्त 2026 गुरुवार को सुबह 8:15 (नई दिल्ली समय अनुसार) बजे तक भद्रा रहेगी. इसकी शुरुआत 19 अगस्त की शाम 7.19 पर होगी. ज्योतिषाचार्य अनीष व्यास के अनुसार अलग अलग शहरों में सूर्योदय और स्थानीय गणना के कारण समय में कुछ मिनट का अंतर हो सकता है. इसलिए 20 अगस्त की सुबह यदि कोई बड़ा शुभ कार्य करने की योजना है तो भद्रा समाप्त होने के बाद ही मुहूर्त देखकर कार्य करना बेहतर होगा.

भद्रा में क्यों नहीं किए जाते शुभ कार्य?

ज्योतिष और मुहूर्त परंपरा में भद्रा को शुभ कार्यों के लिए अनिष्ट माना गया है. खासकर विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, उपनयन संस्कार, मांगलिक पूजा और नए कार्य की शुरुआत जैसे कामों में भद्रा का विचार किया जाता है. मान्यता है कि भद्रा काल में किए गए शुभ कार्यों में बाधा आने की आशंका रहती है.

दैनिक कार्य, पूजा-पाठ, मंत्र जाप और इस अवधि में सामान्य रूप से किए जा सकते हैं. कोई बड़ा धार्मिक अनुष्ठान नहीं करना चाहिए. 

सुबह 8 बजे तक किन कामों से बचें?

20 अगस्त की सुबह भद्रा समाप्त होने तक विवाह, सगाई, गृह प्रवेश, नए घर या दुकान का शुभारंभ, मांगलिक संस्कार और बड़े निवेश या नए कार्य की शुभ शुरुआत करने से बचें. अगर किसी कार्य के लिए पहले से मुहूर्त निर्धारित है तो उसके लिए स्थानीय पंचांग और विद्वान ज्योतिषाचार्य से समय की पुष्टि कर लें.

भद्रा का वास किस लोक में माना जाता है

मुहूर्त चिंतामणि की परंपरा में चंद्रमा की राशि के आधार पर भद्रा के निवास का भी विचार किया जाता है. चंद्रमा के कर्क, सिंह, कुंभ या मीन में होने पर भद्रा का वास पृथ्वी लोक में माना जाता है. मेष, वृषभ, मिथुन और वृश्चिक में स्वर्ग तथा कन्या, तुला, धनु और मकर में पाताल लोक का विचार किया जाता है. इसका फल भी उसी लोक के अनुसार माना जाता है.

FAQs

  1. भद्रा काल को अशुभ क्यों माना जाता है?
    पंचांग में भद्रा को विष्टि करण कहा जाता है. मुहूर्त शास्त्र में इसे उग्र और बाधाकारक प्रकृति का माना गया है, इसलिए विवाह और अन्य मांगलिक कार्यों के लिए भद्रा का त्याग किया जाता है.
  2. क्या भद्रा में नया काम शुरू कर सकते हैं?
    भद्रा काल में नए कार्य की शुभ शुरुआत करने से बचने की परंपरा है. यदि कोई जरूरी कार्य है तो उसके लिए पंचांग में उपलब्ध शुभ मुहूर्त और अन्य योगों का विचार करना चाहिए.
  3. क्या भद्रा और राहुकाल एक ही होते हैं?
    नहीं, भद्रा और राहुकाल अलग-अलग होते हैं. भद्रा पंचांग के करणों में आने वाला विष्टि करण है, जबकि राहुकाल प्रत्येक दिन का एक विशेष समयखंड होता है, जिसे शुभ कार्यों के लिए सामान्यतः त्याज्य माना जाता है.
  4. भद्रा का दूसरा नाम क्या है?
    भद्रा का पंचांग संबंधी नाम विष्टि करण है. करण तिथि का आधा भाग होता है और विष्टि करण को ही भद्रा कहा जाता है.

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Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. 

जागृति सोनी बरसले (Jagriti Soni Barsaley)

धर्म, ज्योतिष और भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं पर शोध आधारित लेखन करने वाली डिजिटल पत्रकार

जागृति सोनी बर्सले धर्म, ज्योतिष, वास्तु और भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं से जुड़े विषयों की अनुभवी डिजिटल पत्रकार और लेखिका हैं. उन्हें डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग 10 वर्षों का अनुभव है. वर्तमान में वह ABP Live (Abplive.com) में बतौर कंसल्टेंट कार्यरत हैं, जहां वह व्रत-त्योहार जैसे नवरात्रि, करवा चौथ, दिवाली, होली, एकादशी, प्रदोष व्रत, हरियाली तीज आदि, रमजान, धार्मिक मान्यताओं, ज्योतिषीय घटनाओं, शुभ मुहूर्त, वास्तु और फेंगशुई, पंचांग जैसे विषयों पर शोध आधारित और प्रमाणिक लेख लिखती हैं.

विशेषज्ञता (Expertise)

जागृति सोनी बर्सले विशेष रूप से इन विषयों पर लेखन करती हैं:

  • व्रत-त्योहार और भारतीय धार्मिक परंपराएं
  • वैदिक ज्योतिष और ग्रह-नक्षत्र आधारित घटनाएं
  • शुभ मुहूर्त और धार्मिक विधि-विधान
  • वास्तु शास्त्र और फेंगशुई
  • आध्यात्मिक मान्यताएं और सांस्कृतिक परंपराएं

उनके लेखों में धार्मिक विषयों को केवल आस्था के दृष्टिकोण से नहीं बल्कि शास्त्रीय स्रोतों और प्रमाणिक ग्रंथों के आधार पर प्रस्तुत किया जाता है.

शिक्षा और पृष्ठभूमि

जागृति सोनी बर्सले ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से की है.

उन्होंने अपने करियर की शुरुआत दैनिक भास्कर डॉट कॉम से की, जहां डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने धर्म, समाज और संस्कृति से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर लेख लिखे.

डिजिटल मीडिया में काम करते हुए उन्होंने टेक्स्ट और वीडियो दोनों फॉर्मेट में काम किया है और वीडियो सेक्शन में सीनियर प्रोड्यूसर के रूप में भी लंबे समय तक योगदान दिया है. इस अनुभव ने उन्हें आधुनिक डिजिटल पत्रकारिता के विभिन्न फॉर्मेट को समझने और प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करने की क्षमता दी है.

शास्त्रीय अध्ययन और शोध

जागृति सोनी बर्सले की विशेष रुचि धर्म और ज्योतिष के शास्त्रीय अध्ययन में है.

उन्हें प्राचीन धार्मिक ग्रंथों जैसे:

  • धर्म सिंधु
  • मुहूर्त चिंतामणि
  • शकुन शास्त्र
  • वास्तु

का अच्छा ज्ञान है. इन ग्रंथों के आधार पर वह व्रत-त्योहार, पूजा-विधि, ज्योतिषीय घटनाओं और मुहूर्त से जुड़े विषयों को सरल, प्रमाणिक और शोधपरक तरीके से पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास करती हैं.

योगदान

जागृति सोनी बर्सले एक फ्रीलांस लेखक के रूप में भी कई मंचों पर आध्यात्म, भारतीय संस्कृति और ज्योतिष से जुड़े विषयों पर लेख लिख चुकी हैं.

उनका उद्देश्य धार्मिक और आध्यात्मिक विषयों को सरल भाषा में विश्वसनीय जानकारी के साथ प्रस्तुत करना है, ताकि पाठक इन विषयों को समझ सकें और सही जानकारी प्राप्त कर सकें.

व्यक्तिगत रुचियां

अध्यात्म और भारतीय परंपराओं के अध्ययन के प्रति उनकी गहरी रुचि है. खाली समय में उन्हें आध्यात्मिक और ज्ञानवर्धक पुस्तकें पढ़ना पसंद है. यह अध्ययन उनके लेखन को और अधिक गहन, तथ्यपूर्ण और संदर्भ आधारित बनाता है.

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