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Bhagavad Gita: ज्ञान नहीं, कर्म से मिलता है मोक्ष! जानें गीता में श्रीकृष्ण ने बताया कौन है ज्यादा श्रेष्ठ?

Bhagavad Gita: श्रीकृष्ण बताते हैं कि धर्म का सार निष्काम कर्म में है. ज्ञान और योग का मूल कर्तव्य पालन है. फल त्यागकर ईश्वरार्थ किया गया कर्म ही श्रेष्ठ योग और सच्चा धर्म है.

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  • ईश्वर प्राप्ति के लिए कर्मकांड से परे सच्चा धर्म आवश्यक है।
  • ज्ञान और कर्म दोनों आवश्यक, कर्म से न भागें।
  • क्षत्रिय के लिए धर्मयुद्ध कर्तव्य, जीत-मृत्यु दोनों यशदायी।
  • ईश्वर के लिए कर्म करना निष्काम कर्मयोग सर्वोत्तम है।

Bhagavad Gita: श्रीकृष्ण के अनुसार, जब संसार में धर्म केवल बाहरी कर्मकांड, परंपराओं और संप्रदायों में बँध जाता है, तब किसी महापुरुष का प्रकट होना आवश्यक हो जाता है, जो सच्चे धर्म और ईश्वर की प्राप्ति का मार्ग पुनः स्पष्ट करे.

गीता के छठे अध्याय में श्रीकृष्ण ने कहा है कि केवल ज्ञानी कहलाने के लिए कर्म छोड़ देना वास्तविक ज्ञान नहीं है. ज्ञानयोग हो या निष्काम कर्मयोग दोनों का मूल एक ही है, और वह है कर्म करना. कर्म छोड़े बिना न योग सिद्ध होता है और न ही ज्ञान पूर्ण होता है. अर्जुन को श्रीकृष्ण ने यही समझाया कि धैर्य और विवेक के साथ निरंतर कर्तव्य करते रहना ही धर्म है.

कर्तव्य सर्वोपरि, युद्ध भी धर्म है

श्रीकृष्ण ने गीता में कहा है कि क्षत्रिय के लिए धर्मयुद्ध से बढ़कर कोई कल्याणकारी पथ नहीं है. जीत मिले तो भी यश, और यदि मृत्यु भी मिले तो देवत्व का यश मिलता है. इस भाव से अपने कर्तव्य का पालन करना ही सच्चे ज्ञान की पहचान है. गुरु और महापुरुष प्रेरक ज़रूर होते हैं, पर निर्णय और कर्म मनुष्य को स्वयं ही करना होता है. इस प्रकार श्रीकृष्ण यह स्पष्ट करते हैं कि ज्ञान का मार्ग “बैठे रहने” की शिक्षा नहीं देता बल्कि धर्मयुक्त कर्म में दृढ़ता सिखाता है.

निष्काम कर्मयोग ज्ञान से भी श्रेष्ठ

श्रीकृष्ण ने इस अध्याय में कहा है कि दोनों मार्ग परम श्रेय देने वाले हैं, पर निष्काम कर्मयोग अधिक सरल, सहज और श्रेष्ठ है. क्योंकि बिना त्याग की भावना के कोई संन्यासी नहीं बन सकता और बिना कर्म किए कोई योगी नहीं हो सकता. कर्म दोनों में है, पर दृष्टि अलग है. ज्ञानयोग में विवेक मुख्य है, निष्काम कर्मयोग में समर्पण मुख्य है. यज्ञरूप कर्म को छोड़कर कोई मार्ग सिद्ध नहीं होता है.

ईश्वर के लिए कर्म करना

छठे अध्याय में, श्रीकृष्ण ने कहा है कि वही सच्चा संन्यासी और योगी है जो फल की आसक्ति छोड़कर अपने कर्तव्य का पालन करता है. न वह व्यक्ति संन्यासी है जो अग्निहोत्र छोड़ दे, और न वह योगी है जो कर्म छोड़कर आँखें मूँद ले. अष्टांगयोग साधना तो उच्च है, पर कलियुग में कठिन है. इसलिए श्रीकृष्ण ने कर्मयोग को सर्वोपरि बताया है. क्योंकि हर मनुष्य कर्म करता ही है. जब वही कर्म ईश्वर के लिए किया जाए तो वह योग बन जाता है.

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में छोटा-सा गांव है तिलबिहता, जहां 22 साल की कहकशां परवीन रहती हैं. पढ़ाई की शौक कहकशां अपने सपने पूरे करने के लिए लगातार मेहनत कर रही हैं. 25 मार्च 2003 के दिन तिलबिहता गांव में अपनी जिंदगी का सफर शुरू करने वाली कहकशां के पिता मोहम्मद जिकरुल्लाह बिजनेसमैन हैं तो मां नजदा खातून हाउसवाइफ हैं. भाई आमिर आजम, बहन उजमा परवीन, जेबा परवीन, सदफ परवीन और दरख्शां परवीन को वह अपनी ताकत मानती हैं. वहीं, उनकी सबसे अच्छी दोस्त सान्या कुमारी हैं. 

तिलबिहता के ओरेकल पब्लिश स्कूल से स्कूलिंग करने के बाद कहकशां ने हरदी के आरकेएसपी अकैडमी हाई स्कूल से मैट्रिक किया तो जैतपुर स्थित एसआरपीएस कॉलेज से इंटर पास किया. मुजफ्फरपुर के लंगट सिंह कॉलेज से बैचलर ऑफ मास कम्यूनिकेशन (BMC) करने वाली कहकशां को अब अपने फाइनल रिजल्ट का इंतजार है. 

कहकशां की जिंदगी में पढ़ाई के साथ-साथ कई शौक हैं, जो उनकी दिनचर्या को रोचक बनाते हैं. अपने आसपास की खूबसूरत चीजों को कैमरे में कैद करने में माहिर कहकशां को खबरें पढ़ना और पेंटिंग बनाना बेहद पसंद है. इसके अलावा वह खाना बनाना, नमाज पढ़ना, रील्स देखना, गाना सुनना और कॉमेडी वीडियो देखना भी पसंद करती हैं. 

फिल्म संजू का 'कर हर मैदान फतेह' गाना हर मुश्किल वक्त में उन्हें हिम्मत देता है तो आमिर खान, शाहरुख खान और ऐश्वर्या राय बच्चन उनके पसंदीदा सेलेब्स हैं. वहीं, फिल्म चक दे इंडिया से उन्हें कुछ कर दिखाने की प्रेरणा मिलती है. एमएस धोनी, विराट कोहली और सचिन तेंदुलकर उनके फेवरेट क्रिकेटर्स हैं. वहीं, सुबह का वक्त और सर्दी का मौसम उन्हें बेहद पसंद है. कहकशां फोटोग्राफी के जरिए लोगों की कहानियां बयां करना चाहती हैं, जिसके लिए वह लगातार मेहनत कर रही हैं.

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