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Amalaki Ekadashi 2026: आमलकी एकादशी की संपूर्ण व्रत कथा का करें पाठ, विष्णु जी होंगे प्रसन्न

Amalaki Ekadashi 2026: आमलकी एकादशी व्रत 27 फरवरी 2026 को है. ये व्रत विष्णु जी की कृपा प्राप्ति के लिए किया जाता है. आमलकी एकादशी पर कथा का पाठ करने से सहस्त्र गौदान के समान फल मिलता है.

Amalaki Ekadashi: प्राचीन समय में वैदिक नाम का एक नगर था. उस नगर में ब्राह्मण, वैश्य, क्षत्रिय, शूद्र, चारों वर्ण के मनुष्य प्रसन्तापूर्वक निवास करते थे. नगर में सदैव वेदध्वनि गूँजा करती थी.उस नगरी में कोई भी पापी, दुराचारी, नास्तिक आदि न था.

उस नगर में चैत्ररथ नामक चन्द्रवंशी राजा राज्य करता था. वह उच्चकोटि का विद्वान तथा धार्मिक प्रवृत्ति का व्यक्ति था, उसके राज्य में कोई भी निर्धन एवं लोभी नहीं था. उस राज्य के सभी लोग भगवान विष्णु के अनन्य भक्त थ. वहां के छोटे-बड़े सभी निवासी प्रत्येक एकादशी का उपवास करते थे.

एक बार फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की आमलकी नामक एकादशी आयी. उस दिन राजा एवं प्रत्येक प्रजाजन, वृद्ध से बालक तक ने आनन्दपूर्वक उस एकादशी को उपवास किया. उस मन्दिर में रात को सभी ने जागरण किया. रात के समय उस स्थान पर एक बहेलिया आया. वह महापापी तथा दुराचारी था.

अपने कुटुम्ब का पालन वह जीव-हिंसा करके करता था. वह भूख-प्यास से अत्यन्त व्याकुल था, कुछ भोजन पाने की इच्छा से वह मन्दिर के एक कोने में बैठ गया. उस स्थान पर बैठकर वह भगवान विष्णु की कथा तथा एकादशी माहात्म्य सुनने लगा. इस प्रकार उस बहेलिये ने सम्पूर्ण रात्रि अन्य लोगों के साथ जागरण कर व्यतीत की.

प्रातःकाल सभी लोग अपने-अपने निवास पर चले गये. इसी प्रकार वह बहेलिया भी अपने घर चला गया और वहाँ जाकर भोजन किया. कुछ समय व्यतीत होने के पश्चात उस बहेलिये की मृत्यु हो गयी. हालांकि, जीव-हिंसा करने के कारण वह घोर नरक का भागी था, परन्तु उस दिन आमलकी एकादशी व्रत तथा जागरण के प्रभाव से उसने राजा विदुरथ के यहाँ जन्म लिया. उसका नाम वसुरथ रखा गया. बड़ा होने पर वह चतुरङ्गिणी सेना सहित तथा धन-धान्य से युक्त होकर दस सहस्र ग्रामों का सञ्चालन करने लगा.

एक समय राजा वसुरथ शिकार खेलने के लिये गया. दैवयोग से वन में वह रास्ता भटक गया और दिशा का ज्ञान न होने के कारण उसी वन में एक वृक्ष के नीचे सो गया. कुछ समय पश्चात पहाड़ी डाकू वहाँ आये और राजा को अकेला देखकर 'मारो-मारो' चिल्लाते हुये राजा वसुरथ की ओर दौड़े। वह डाकू कहने लगे कि, "इस दुष्ट राजा ने हमारे माता-पिता, पुत्र-पौत्र आदि समस्त सम्बन्धियों को मारा है तथा देश से निकाल दिया. अब हमें इसे मारकर अपने अपमान का बदला लेना चाहिये."

इतना कह वे डाकू राजा को मारने लगे और उस पर अस्त्र-शस्त्र का प्रहार करने लगे. डाकुओं के वह अस्त्र-शस्त्र राजा के शरीर से स्पर्श होते ही नष्ट होने लगे तथा राजा को वह शस्त्र पुष्पों के समान प्रतीत होने लगे. कुछ समय पश्चात् प्रभु इच्छा से उन डाकुओं के अस्त्र-शस्त्र उन्हीं पर प्रहार करने लगे, जिससे वे सभी डाकू मूर्च्छित हो गये.

उसी समय राजा के शरीर से एक दिव्य देवी प्रकट हुयी. वह देवी अत्यन्त सुन्दर थी तथा सुन्दर वस्त्रों तथा आभूषणों से अलङ्कृत थी. उसकी भृकुटी टेढ़ी थी. उसके नेत्रों से क्रोध की भीषण लपटें निकल रही थीं. उस समय वे लपटें काल के समान प्रतीत हो रही थीं. उसने देखते-ही-देखते उन सभी डाकुओं का समूल नाश कर दिया.

नींद से उठने पर राजा ने वहां अनेक डाकुओं को मृत पड़ा देखा. वह सोचने लगा किसने इन्हें मारा? इस वन में कौन मेरा हितैषी रहता है? राजा वसुरथ ऐसा विचार कर ही रहा था कि उसी समय आकाशवाणी हुयी - "हे राजन! इस संसार में भगवान विष्णु के अतिरिक्त तेरी रक्षा कौन कर सकता है!"

इस आकाशवाणी को सुनकर राजा ने भगवान विष्णु को स्मरण कर उन्हें प्रणाम किया, तत्पश्चात् अपने नगर को वापस आ गया और सुखपूर्वक राज्य करने लगा.

महर्षि वशिष्ठ ने कहा- "हे राजन! यह सब आमलकी एकादशी के व्रत का प्रभाव था, जो मनुष्य एक भी आमलकी एकादशी का व्रत करता है, वह प्रत्येक कार्य में सफल होता है तथा अन्त में वैकुण्ठ धाम को पाता है.

जागृति सोनी बरसले (Jagriti Soni Bursle)

धर्म, ज्योतिष और भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं पर शोध आधारित लेखन करने वाली डिजिटल पत्रकार

जागृति सोनी बर्सले धर्म, ज्योतिष, वास्तु और भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं से जुड़े विषयों की अनुभवी डिजिटल पत्रकार और लेखिका हैं. उन्हें डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग 10 वर्षों का अनुभव है. वर्तमान में वह ABP Live (Abplive.com) में बतौर कंसल्टेंट कार्यरत हैं, जहां वह व्रत-त्योहार जैसे नवरात्रि, करवा चौथ, दिवाली, होली, एकादशी, प्रदोष व्रत, हरियाली तीज आदि, धार्मिक मान्यताओं, ज्योतिषीय घटनाओं, शुभ मुहूर्त, वास्तु और फेंगशुई, पंचांग जैसे विषयों पर शोध आधारित और प्रमाणिक लेख लिखती हैं.

विशेषज्ञता (Expertise)

जागृति सोनी बर्सले विशेष रूप से इन विषयों पर लेखन करती हैं:

  • व्रत-त्योहार और भारतीय धार्मिक परंपराएं
  • वैदिक ज्योतिष और ग्रह-नक्षत्र आधारित घटनाएं
  • शुभ मुहूर्त और धार्मिक विधि-विधान
  • वास्तु शास्त्र और फेंगशुई
  • आध्यात्मिक मान्यताएं और सांस्कृतिक परंपराएं

उनके लेखों में धार्मिक विषयों को केवल आस्था के दृष्टिकोण से नहीं बल्कि शास्त्रीय स्रोतों और प्रमाणिक ग्रंथों के आधार पर प्रस्तुत किया जाता है.

शिक्षा और पृष्ठभूमि

जागृति सोनी बर्सले ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से की है.

उन्होंने अपने करियर की शुरुआत दैनिक भास्कर डॉट कॉम से की, जहां डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने धर्म, समाज और संस्कृति से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर लेख लिखे.

डिजिटल मीडिया में काम करते हुए उन्होंने टेक्स्ट और वीडियो दोनों फॉर्मेट में काम किया है और वीडियो सेक्शन में सीनियर प्रोड्यूसर के रूप में भी लंबे समय तक योगदान दिया है. इस अनुभव ने उन्हें आधुनिक डिजिटल पत्रकारिता के विभिन्न फॉर्मेट को समझने और प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करने की क्षमता दी है.

शास्त्रीय अध्ययन और शोध

जागृति सोनी बर्सले की विशेष रुचि धर्म और ज्योतिष के शास्त्रीय अध्ययन में है.

उन्हें प्राचीन धार्मिक ग्रंथों जैसे:

  • धर्म सिंधु
  • मुहूर्त चिंतामणि

का अच्छा ज्ञान है. इन ग्रंथों के आधार पर वह व्रत-त्योहार, पूजा-विधि, ज्योतिषीय घटनाओं और मुहूर्त से जुड़े विषयों को सरल, प्रमाणिक और शोधपरक तरीके से पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास करती हैं.

योगदान

जागृति सोनी बर्सले एक फ्रीलांस लेखक के रूप में भी कई मंचों पर आध्यात्म, भारतीय संस्कृति और ज्योतिष से जुड़े विषयों पर लेख लिख चुकी हैं.

उनका उद्देश्य धार्मिक और आध्यात्मिक विषयों को सरल भाषा में विश्वसनीय जानकारी के साथ प्रस्तुत करना है, ताकि पाठक इन विषयों को समझ सकें और सही जानकारी प्राप्त कर सकें.

व्यक्तिगत रुचियां

अध्यात्म और भारतीय परंपराओं के अध्ययन के प्रति उनकी गहरी रुचि है. खाली समय में उन्हें आध्यात्मिक और ज्ञानवर्धक पुस्तकें पढ़ना पसंद है. यह अध्ययन उनके लेखन को और अधिक गहन, तथ्यपूर्ण और संदर्भ आधारित बनाता है.

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