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अबू जहल: मक्का का क्रूर तानाशाह, जिसने बदल दी शहर की दिशा! जानें उसकी साजिशें और हुकूमत की हवस

Abu Jahl History: इतिहासकारों के मुताबिक, अबू जहल हुकूमत, घमंड और लालच के लिए मशहूर था. उसकी चालबाजियां न सिर्फ मक्का की राजनीति बल्कि समाज और मजहबी माहौल पर गहरा असर डालती थीं.

Abu Jahl History: अबू जहल, जिनका नाम अम्र इब्न हिशम था, वह मक्का का एक शख्त और जालिम नेता थे. इतिहास में अबू जहल को हेमशा झगड़े और हुकूमत के लिए कोई भी तरीका अपनाने वाला शख्स बताया जाता है. उन्हें इस्लाम के पैगंबर मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के विरोध के लिए जाना जाता है.

अबू जहल अपनी घमंड, लालच और हुकूमत की तड़प के लिए मशहूर थे. वह कई बार मुसलमानों और पैगंबर के काम को रोकने के लिए समाज में अराजी फैलाने की कोशिश करते थे. उनकी हरकतें सिर्फ अपनी ताकत बढ़ाने तक पाबंद नहीं थी, बल्कि उन्होंने पूरे उम्मत की सोच और जीने के तरीके को भी मुतासिर किया.

उसकी चालें और साजिशें मक्का की सोच और समाज पर गहरा असर डालती थी. अबू जहल की साजिशें और छुपी हुई चालें उसे ऐसा इंसान बनाती हैं, जिसकी हरकतें इतिहास के पन्ने में हमेशा के लिए छाप छोड़ गई.

हुकूमत की तड़प
अबू जहल अपनी हुकूमत और ताकत बढ़ाने के लिए किसी भी हद तक जाने वाला शख्स था. वह अपने दुश्मनों को दबाने में पीछे नहीं हटता था और हमेशा उन्हें कमजोर करने की कोशिश करता था.

मक्का की राजनीति में भूमिका बहुत बड़ी थी, और उसकी चालबाजियां से शहर का माहौल अक्सर उसके फायदे के हिसाब से बदल जाता था. उसकी यह तड़प और लालच उसे सख्त और डरावना नेता बनाती थी.

घमंड और लालच
अबू जहल का घमंड और लालच उसे मक्का का सबसे कड़ा और डरावना नेता बना देता था. वह हमेशा खुद को दूसरों से ऊपर समझता था और किसी भी हाल में अपने फायदे के लिए पीछे नहीं हटता था. उसकी तड़प इतनी बड़ी थी कि वह किसी भी काम को अंजाम देने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार रहता था.

यही घमंड और लालच उसके फैसलों और हरकतों में साफ झलकता था. इसके वजह से वह अपने दुश्मनों को दबाने और अपनी हुकूमत मजबूत करने में हमेशा आगे रहता था.

छुपी हुई चालबाजियां
अबू जहल हमेशा अपने फायदे के लिए छुपी हुई चालें चलता था. वह अपने दुश्मनों को कमजोर करने और अपनी हुकूमत मजबूत करने के लिए कोई भी तरीका अपनाने से नहीं हिचकिचाता था.

उसकी यह चालबाजियां इतनी रहस्यमय होती थीं कि दुश्मन अक्सर उसके इरादों को समझ नहीं पाते थे. मक्का की राजनीति और समाज में उसकी यह चालबाजियां बहुत असर डालती थीं

मक्का की दिशा पर असर
इतिहासकार बताते हैं कि अबू जहल की हुकूमत की चाह ने मक्का के हालात बदल दिए. वह सिर्फ ताकत और राज के पीछे भागता रहा, जिसकी वजह से शहर की मजहबी और समाजी फिजा पर गहरा असर पड़ा.

उसकी सोच और फैसले अक्सर मक्का के लोगों को उलझन में डाल देते थे और उनका जीने का तरीका भी बदलने लगा. यही वजह है कि उसे शहर की दिशा मोड़ने वाला शख्स माना जाता है.

समाज और धर्म पर असर
अबू जहल की हुकूमत की चाह और उसकी चालबाजियों का असर सिर्फ अपनी ताकत बढ़ाने में ही नहीं लगा था, बल्कि लोगों के दिमाग और उनके मजहबी यकीन को भी बदलने की कोशिश करता था. उसकी वजह से मक्का का माहौल बार-बार बिगड़ता रहा और लोगों के बीच दर और बंटवारा फैल गया.

इतिहास की छवि
अबू जहल का नाम आज भी लोगों के जेहन में लालच, घमंड और ताकत की हवस के तौर पर याद किया जाता है. उसकी चालें और उसके सख्त फैसले मक्का के दौर का बड़ा हिस्सा रहे. लोग इसे एक ऐसे शख्स के रूप में देखते हैं जिसने अपने मकसद पूरे करने के लिए किसी भी हद तक जाने से परहेज नहीं किया.

इसी वजह से उसकी पहचान इतिहास में नफरत और सियासी चालबाजी से जुड़ी हुई मानी जाती है.

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में छोटा-सा गांव है तिलबिहता, जहां 22 साल की कहकशां परवीन रहती हैं. पढ़ाई की शौक कहकशां अपने सपने पूरे करने के लिए लगातार मेहनत कर रही हैं. 25 मार्च 2003 के दिन तिलबिहता गांव में अपनी जिंदगी का सफर शुरू करने वाली कहकशां के पिता मोहम्मद जिकरुल्लाह बिजनेसमैन हैं तो मां नजदा खातून हाउसवाइफ हैं. भाई आमिर आजम, बहन उजमा परवीन, जेबा परवीन, सदफ परवीन और दरख्शां परवीन को वह अपनी ताकत मानती हैं. वहीं, उनकी सबसे अच्छी दोस्त सान्या कुमारी हैं. 

तिलबिहता के ओरेकल पब्लिश स्कूल से स्कूलिंग करने के बाद कहकशां ने हरदी के आरकेएसपी अकैडमी हाई स्कूल से मैट्रिक किया तो जैतपुर स्थित एसआरपीएस कॉलेज से इंटर पास किया. मुजफ्फरपुर के लंगट सिंह कॉलेज से बैचलर ऑफ मास कम्यूनिकेशन (BMC) करने वाली कहकशां को अब अपने फाइनल रिजल्ट का इंतजार है. 

कहकशां की जिंदगी में पढ़ाई के साथ-साथ कई शौक हैं, जो उनकी दिनचर्या को रोचक बनाते हैं. अपने आसपास की खूबसूरत चीजों को कैमरे में कैद करने में माहिर कहकशां को खबरें पढ़ना और पेंटिंग बनाना बेहद पसंद है. इसके अलावा वह खाना बनाना, नमाज पढ़ना, रील्स देखना, गाना सुनना और कॉमेडी वीडियो देखना भी पसंद करती हैं. 

फिल्म संजू का 'कर हर मैदान फतेह' गाना हर मुश्किल वक्त में उन्हें हिम्मत देता है तो आमिर खान, शाहरुख खान और ऐश्वर्या राय बच्चन उनके पसंदीदा सेलेब्स हैं. वहीं, फिल्म चक दे इंडिया से उन्हें कुछ कर दिखाने की प्रेरणा मिलती है. एमएस धोनी, विराट कोहली और सचिन तेंदुलकर उनके फेवरेट क्रिकेटर्स हैं. वहीं, सुबह का वक्त और सर्दी का मौसम उन्हें बेहद पसंद है. कहकशां फोटोग्राफी के जरिए लोगों की कहानियां बयां करना चाहती हैं, जिसके लिए वह लगातार मेहनत कर रही हैं.

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