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Digital Parenting: पाबंदी लगाने से काम नहीं चलेगा, बच्चों की सेफ डिजिटल लाइफ के लिए पेरेंट्स अपनाएं ये तरीके

Online Risks For Children: गेमिंग ऐप्स, मैसेजिंग प्लेटफॉर्म, यूट्यूब, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस चैट टूल्स और स्कूल के डिजिटल डिवाइस अब बच्चों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा हैं.

How Much Online Freedom Should Children Have: आज के माता-पिता ऐसी दुनिया में बच्चों की परवरिश कर रहे हैं, जहां दस साल के बच्चे के हाथ में स्मार्टफोन होना बिल्कुल आम बात बन चुका है. गेमिंग ऐप्स, मैसेजिंग प्लेटफॉर्म, यूट्यूब, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस चैट टूल्स और स्कूल के डिजिटल डिवाइस अब बच्चों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा हैं. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि बच्चों को ऑनलाइन दुनिया में कितनी आजादी दी जाए और किस उम्र में दी जाए. एक्सपर्ट्स मानते हैं कि यह सिर्फ स्क्रीन टाइम का मामला नहीं, बल्कि बच्चों की डिजिटल समझ और मानसिक सुरक्षा से जुड़ा बड़ा मुद्दा है. 

क्यों बढ़ रही है माता- पिता की जिम्मेदारी?

लॉस एंजेलिस बेस्ड सिलिकॉन वैली हाई स्कूल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डेविड स्मिथ, जो टेक्नोलॉजी आधारित ऑनलाइन एजुकेशन पर काम करते हैं, वे कहते हैं कि आज बच्चे एक साथ कई डिवाइस इस्तेमाल करते हैं. माता-पिता अब सिर्फ एक मोबाइल स्क्रीन नहीं संभाल रहे, बल्कि ऐप्स, गेम्स और ऑनलाइन कम्युनिटीज की पूरी दुनिया से जूझ रहे हैं. कई प्लेटफॉर्म बच्चों को ज्यादा देर तक जोड़े रखने के लिए डिजाइन किए जाते हैं, इसलिए माता-पिता की जिम्मेदारी पहले से ज्यादा बढ़ गई है.

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क्या सिर्फ पाबंदी लगाने से काम चलेगा?

हालांकि सही तरीके से दी गई ऑनलाइन आजादी बच्चों के लिए फायदेमंद भी हो सकती है. इंटरनेट बच्चों को नई जानकारी, क्रिएटिविटी और सीखने के मौके देता है. जर्नल ऑफ कम्युनिकेशन  में प्रकाशित 2017 की एक बड़ी यूरोपियन स्टडी में 8 देशों के 6,400 बच्चों और उनके माता-पिता को शामिल किया गया था. इसमें पाया गया कि जिन माता-पिता ने सिर्फ रोक लगाने के बजाय बच्चों से खुलकर बातचीत की, उनके बच्चों में बेहतर डिजिटल स्किल्स और सुरक्षित ऑनलाइन आदतें विकसित हुईं. रिसर्च में यह भी सामने आया कि जरूरत से ज्यादा पाबंदियां बच्चों की सीखने और आत्मविश्वास बढ़ाने की क्षमता को सीमित कर सकती हैं.

कब सीमाएं तय करना जरूरी?

एक्सपर्ट्स मानते हैं कि बच्चों को ऑनलाइन आजादी देने का फैसला सिर्फ उम्र देखकर नहीं होना चाहिए. डेविड स्मिथ के मुताबिक दो एक ही उम्र के बच्चों की समझ और जिम्मेदारी लेने की क्षमता बिल्कुल अलग हो सकती है. अगर बच्चा खुलकर अपनी ऑनलाइन एक्टिविटी के बारे में बात करता है, गलत चीज दिखने पर माता-पिता को बताता है और तय नियमों का पालन करता है, तो यह इस बात का संकेत है कि वह ज्यादा डिजिटल आजादी संभाल सकता है. वहीं अगर बच्चा ऑनलाइन एक्टिविटी छिपाने लगे, ज्यादा चिड़चिड़ा हो जाए या स्क्रीन टाइम कंट्रोल ना कर पाए, तो उसे अभी और सीमाओं की जरूरत है. 

बच्चों से बातचीत करना क्यों जरूरी?

कंप्यूटर्स इन ह्यूमन बिहेवियर जर्नल में 2023 में छपी एक स्टडी में करीब 3,000 माता-पिता और बच्चों को शामिल किया गया. इसमें पाया गया कि जो माता-पिता बच्चों से खुलकर बातचीत करते थे, उन्हें बच्चों की असली ऑनलाइन जिंदगी के बारे में ज्यादा सही जानकारी रहती थी. जबकि सिर्फ मॉनिटरिंग ऐप्स और तकनीकी निगरानी पर भरोसा करने वाले माता-पिता कई बार झूठी तसल्ली में रहते थे. एक्सपर्ट्स कहते हैं कि बच्चों के साथ भरोसे वाला रिश्ता बनाना किसी भी पैरेंटल कंट्रोल ऐप से ज्यादा जरूरी है.

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About the author सोनम

जर्नलिज्म की दुनिया में करीब 15 साल बिता चुकीं सोनम की अपनी अलग पहचान है. वह खुद ट्रैवल की शौकीन हैं और यही वजह है कि अपने पाठकों को नई-नई जगहों से रूबरू कराने का माद्दा रखती हैं. लाइफस्टाइल और हेल्थ जैसी बीट्स में उन्होंने अपनी लेखनी से न केवल रीडर्स का ध्यान खींचा है, बल्कि अपनी विश्वसनीय जगह भी कायम की है. उनकी लेखन शैली में गहराई, संवेदनशीलता और प्रामाणिकता का अनूठा कॉम्बिनेशन नजर आता है, जिससे रीडर्स को नई-नई जानकारी मिलती हैं. 

लखनऊ यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म में ग्रैजुएशन रहने वाली सोनम ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत भी नवाबों के इसी शहर से की. अमर उजाला में उन्होंने बतौर इंटर्न अपना करियर शुरू किया. इसके बाद दैनिक जागरण के आईनेक्स्ट में भी उन्होंने काफी वक्त तक काम किया. फिलहाल, वह एबीपी लाइव वेबसाइट में लाइफस्टाइल डेस्क पर बतौर कंटेंट राइटर काम कर रही हैं.

ट्रैवल उनका इंटरेस्ट  एरिया है, जिसके चलते वह न केवल लोकप्रिय टूरिस्ट प्लेसेज के अनछुए पहलुओं से रीडर्स को रूबरू कराती हैं, बल्कि ऑफबीट डेस्टिनेशन्स के बारे में भी जानकारी देती हैं. हेल्थ बीट पर उनके लेख वैज्ञानिक तथ्यों और सामान्य पाठकों की समझ के बीच बैलेंस बनाते हैं. सोशल मीडिया पर भी सोनम काफी एक्टिव रहती हैं और अपने आर्टिकल और ट्रैवल एक्सपीरियंस शेयर करती रहती हैं.

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